छह माह से अनिश्चित जलापूर्ति, बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान अकलतरा नगर की जनता
बोर खनन और नई मोटर पंपों की स्थापना पर लाखों खर्च के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था — पानी कब आएगा, यह तय नहीं; जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
अकलतरा – नगर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था छह माह से बदहाल होने के साथ नगरवासियों में राज्य शासन जिला प्रशासन एवं नगर पालिका परिषद के प्रति नाराजगी जताई है, लोगों का कहना है कि पानी सप्लाई का कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है और कई इलाकों में नियमित एवं पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंच रहा है। इसके कारण नगर की जनता को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नगर में पेयजल व्यवस्था सुधारने के नाम पर नए बोर खनन और नई मोटर पंपों की स्थापना में लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद आम नागरिकों को नियमित रूप से पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में नागरिकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि जब जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार राशि खर्च की जा रही है, तो उसका अपेक्षित लाभ नगरवासियों को क्यों नहीं मिल रहा है?
पानी कब आएगा, यह भी नहीं रहता पता –
नगरवासियों के लिए सबसे बड़ी समस्या जलापूर्ति के समय को लेकर बनी हुई है। लोगों का कहना है कि पानी सप्लाई का कोई निश्चित समय नहीं होने के कारण घरों के दैनिक कामकाज की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कभी पानी सुबह आता है तो कभी देर से, जबकि कई बार लंबे इंतजार के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
पानी के इंतजार में लोगों को अपने अन्य जरूरी कार्यों को रोकना पड़ता है। नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, व्यापारियों तथा बुजुर्गों के साथ गृहणियों को भी विशेष परेशानी उठानी पड़ रही है। जिन परिवारों में पानी के पर्याप्त भंडारण की सुविधा नहीं है, उनकी स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है।
नगरवासियों का कहना है कि यदि जलापूर्ति का वार्डवार निश्चित समय निर्धारित कर दिया जाए और उसकी सार्वजनिक जानकारी दी जाए तो कम से कम लोग अपने दैनिक कार्यों की योजना बना सकेंगे। लेकिन समय की अनिश्चितता के कारण नागरिकों को हर समय पानी आने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
लाखों खर्च के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था –
नगर में पेयजल समस्या से निपटने के लिए बोर खनन तथा नई मोटर पंपों की स्थापना जैसे कार्य किए जाने की बात सामने आती रही है। इन कार्यों पर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि नागरिकों को नियमित पानी नहीं मिल रहा है तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
नगरवासियों का सवाल है कि नए बोर और मोटर पंप लगाने के बाद जलापूर्ति में कितना सुधार हुआ, किन वार्डों को उसका लाभ मिला, कितनी क्षमता से पानी उपलब्ध हो रहा है और वर्तमान में कौन-कौन से बोर एवं मोटर पंप चालू हालत में हैं—इन सभी बिंदुओं की सार्वजनिक रूप से समीक्षा होनी चाहिए।
लोगों का कहना है कि केवल नए संसाधन स्थापित करना पर्याप्त नहीं है। उनकी नियमित निगरानी, रखरखाव, विद्युत व्यवस्था, मोटर संचालन और पाइपलाइन के माध्यम से अंतिम छोर तक पानी पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है।
कहीं कम दबाव तो कहीं पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने की शिकायत –
नगर के विभिन्न हिस्सों से जलापूर्ति को लेकर अलग-अलग तरह की परेशानियां सामने आने की बात कही जा रही है। कुछ क्षेत्रों में पानी कम दबाव से पहुंचने की शिकायत है तो कुछ जगहों पर पर्याप्त समय तक पानी नहीं मिलने से लोगों को आवश्यकता के अनुरूप पानी संग्रहित करने का अवसर नहीं मिल पाता।
नगरवासियों का कहना है कि यदि किसी वार्ड में पाइपलाइन, वाल्व, मोटर, पंप या अन्य तकनीकी कारणों से समस्या है तो नगर पालिका को तत्काल उसकी पहचान कर सुधार करना चाहिए। लंबे समय तक समस्या बनी रहने से इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है।
जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी कौन कर रहा है?
पेयजल व्यवस्था को लेकर नागरिकों के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि नगर की जलापूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। नगर के सभी बोर, मोटर पंप, पानी की टंकियों, पाइपलाइनों एवं वाल्वों की स्थिति की वार्डवार समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
यदि किसी मोटर में खराबी आती है अथवा किसी बोर की क्षमता कम होती है तो उसकी वैकल्पिक व्यवस्था तत्काल की जानी चाहिए। इसी तरह पाइपलाइन में लीकेज या कम दबाव की समस्या का भी समयबद्ध तरीके से निराकरण होना जरूरी है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल –
करीब छह माह से जलापूर्ति की समस्या बने रहने के बीच नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी नागरिक सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता से जुड़ी समस्या का स्थायी समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
नगरवासियों के अनुसार समय-समय पर समस्या की जानकारी जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने के बावजूद यदि व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं होता है तो इससे लोगों में निराशा स्वाभाविक है। नागरिक चाहते हैं कि समस्या को केवल अस्थायी रूप से नहीं, बल्कि स्थायी समाधान के दृष्टिकोण से देखा जाए।
नगरवासियों ने वार्डवार जलापूर्ति व्यवस्था की मांग की –
नगरवासियों ने मांग की है कि नगर पालिका परिषद द्वारा तत्काल सभी वार्डों की जलापूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की जाए। प्रत्येक वार्ड के लिए पानी सप्लाई का निश्चित समय निर्धारित, सार्वजनिक और पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कम पानी मिलने वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां पर्याप्त दबाव एवं मात्रा में जलापूर्ति की व्यवस्था की जाए।
इसके अलावा नगर में स्थापित सभी बोर एवं मोटर पंपों की तकनीकी जांच कर उनकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने, खराब मोटरों को तत्काल सुधारने अथवा बदलने तथा आवश्यकता वाले क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग भी की जा रही है।
‘पानी कब आएगा’ की चिंता से मिले निजात
नगरवासियों का कहना है कि पेयजल कोई विलासिता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की बुनियादी आवश्यकता है। गर्मी हो या सामान्य मौसम, घरों में पीने, खाना बनाने, स्नान, सफाई और अन्य दैनिक कार्यों के लिए नियमित पानी जरूरी है। ऐसे में लोगों को प्रतिदिन यह चिंता करनी पड़े कि “आज पानी कब आएगा और आएगा भी या नहीं”, यह स्थिति नगर की जलापूर्ति व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
लोगों का कहना है कि नए बोर और मोटर पंपों पर खर्च की गई राशि तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उसका वास्तविक लाभ घर-घर तक नियमित पेयजल के रूप में पहुंचे। केवल कागजों में व्यवस्था दुरुस्त होने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि नागरिकों को जमीन पर उसका लाभ मिलना चाहिए।
अब नगरवासियों की निगाहें नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि करीब छह माह से चली आ रही जलापूर्ति की इस समस्या का समाधान कब और किस स्तर पर किया जाता है। नागरिकों को आश्वासन से अधिक आवश्यकता नियमित, पर्याप्त और निर्धारित समय पर मिलने वाले पेयजल की है।
