धूमधाम से मनाया गया दस लक्षण महापर्व का नवां दिवस
उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना के साथ हुई पूजा-अर्चना, तत्वार्थ सूत्र वाचन और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता
अकलतरा। दस लक्षण महापर्व के नवें दिवस उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना जैन मंदिर अकलतरा में निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महाराज एवं मुनि श्री 108 शीतल सागर महाराज के मंगल सानिध्य में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ की गई। इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की और उत्तम आकिंचन धर्म के आध्यात्मिक स्वरूप को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान श्रवण संस्कृति संस्थान, सांगानेर जयपुर से आईं स्नातक अणिमा जैन एवं विदुषी अक्षरा जैन द्वारा मधुर संगीत की धुन पर श्रद्धालुओं को विधिवत पूजा-अर्चना कराई गई। भक्ति एवं संगीत के वातावरण में पूरा मंदिर परिसर धार्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया। समाज के लोगों द्वारा तत्वार्थ सूत्र का वाचन भी किया गया।
विभिन्न परिवारों ने किया शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त
उत्तम आकिंचन धर्म के पावन अवसर पर श्री 1008 शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा पर शांतिधारा करने का सौभाग्य वासु जैन (आईएएस), जिला पंचायत सीईओ सक्ती, राहुल जैन एवं रक्ष जैन चंदेरिया परिवार को प्राप्त हुआ।
इसी प्रकार श्री 1008 आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर शांतिधारा करने का सौभाग्य मंगल चंद जैन, पवन जैन कोछल परिवार एवं कमल जैन, सारिका जैन आयल मिल परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं श्री 1008 नेमिनाथ भगवान की प्रतिमा पर शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रदीप जैन, प्रतीक जैन केपी परिवार एवं प्रकाश चंद जैन, प्रवीण जैन बड़कुल परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए और वातावरण भक्तिमय हो गया।
मुनिश्री ने बताया आकिंचन धर्म का आध्यात्मिक महत्व
धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महाराज ने उत्तम आकिंचन धर्म पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुनिश्री ने बताया कि आकिंचन का भाव बाहरी वस्तुओं के संग्रह से अधिक आंतरिक ममत्व और परिग्रह का त्याग करने से जुड़ा है। मनुष्य संसार में रहते हुए अनेक वस्तुओं, संबंधों और परिस्थितियों के प्रति मोह एवं ममता का भाव रखता है। जब वह इन ममत्व भावों से ऊपर उठकर आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानता है, तब आकिंचन धर्म की भावना सार्थक होती है।
मुनिश्री 108 शीतल सागर महराज ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन करते हुए जीवन में आवश्यकता और संग्रह के बीच अंतर समझने तथा परिग्रह एवं आसक्ति को कम करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आत्मा का वास्तविक वैभव बाहरी संपत्ति में नहीं, बल्कि त्याग, संयम, शुद्धता और आत्मज्ञान में निहित है। दस लक्षण महापर्व का उद्देश्य केवल धार्मिक क्रियाओं तक सीमित न होकर जीवन में इन धर्मों के गुणों को उतारना है।
फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में बच्चों ने दी शानदार प्रस्तुतियां –
महापर्व के अवसर पर आयोजित फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रतियोगिता में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विभिन्न आकर्षक वेशभूषाओं में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और मंच प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। बच्चों की प्रस्तुतियों के दौरान मंदिर परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
दस लक्षण महापर्व के नवें दिवस आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में जैन समाज के महिला-पुरुषों के साथ बच्चों और युवाओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूजा-अर्चना, शांतिधारा, तत्वार्थ सूत्र वाचन, मुनिश्री के मंगल प्रवचन एवं बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को श्रद्धा, भक्ति और संस्कारों से भर दिया।
कार्यक्रम के अंत में समाजजनों ने उत्तम आकिंचन धर्म के संदेश को अपने जीवन में अपनाने तथा दस लक्षण महापर्व की धार्मिक भावना को आत्मसात करने का संकल्प लिया, जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन एवं सचिव रूपेश जैन ने बताया कि दस लक्षण महापर्व के अंतिम दिवस अनंत चौदस के अवसर पर दोपहर 2 बजे जैन मंदिर से निर्यापक श्रवण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महराज एवं मुनिश्री 108 शीतल सागर महराज के मंगल सानिध्य में धूमधाम से भव्य शोभायात्रा नगर में निकाली जाएगी नगर भ्रमण करने के पश्चात शोभा यात्रा वापस जैन मंदिर में पहुंचेगी अनंत चौदस के अवसर पर जैन मंदिर में समस्त भगवानों का अभिषेक एवं शांति धारा करने के साथ-साथ समाज के लोगों द्वारा सामूहिक रूप से पूजा अर्चना की जाएगी।
