रायपुर में पहली बार राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन, समाजहित और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता पर हुआ मंथन
“खबर ऐसी हो जिससे समाज का कल्याण हो, भ्रम नहीं” — मुनि श्री आगम सागर जी
जनगणना-2027 में जैन समाज से अपनी धार्मिक पहचान ‘जैन’ दर्ज कराने की अपील 
रायपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पहली बार राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन का भव्य आयोजन श्री अग्रसेन धाम में किया गया। देश के विभिन्न राज्यों तथा छत्तीसगढ़ के अनेक जिलों से पहुंचे जैन पत्रकारों की सहभागिता से आयोजित इस सम्मेलन ने पत्रकारिता, धर्म, समाज और जैन संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन को लेकर एक सार्थक संवाद का मंच प्रदान किया।
छत्तीसगढ़ सकल दिगंबर जैन समाज, रायपुर के तत्वावधान में जैन पत्रकार महासंघ के सहयोग से आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पत्रकार शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य विषय “जैन धर्म आयतनों के संरक्षण एवं संवर्धन में पत्रकारिता की भूमिका” रहा। परिचर्चा के दौरान जैन धार्मिक स्थलों, तीर्थ क्षेत्रों, संस्थाओं एवं संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ समाज के समसामयिक विषयों को जिम्मेदारी और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ सामने रखने पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
सम्मेलन चातुर्मासरत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री आगम सागर जी, मुनि श्री पुनीत सागर जी, ऐलक श्री धैर्य सागर जी एवं ऐलक श्री स्वागत सागर जी के आशीर्वाद से संपन्न हुआ। संतों के मंगल आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन ने सम्मेलन को आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व प्रदान किया।
पत्रकारिता समाज को दिशा देने वाला सशक्त माध्यम
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में न्यूज 24 मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ तथा लल्लूराम के डायरेक्टर नमित जैन उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कांवाडिया ने की।
परिचर्चा में भारतीय प्रेस परिषद के पूर्व सदस्य एवं वरिष्ठ पत्रकार डॉ. बलदेव राज गुप्ता ने पत्रकारिता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रकारिता को देश का चौथा स्तंभ माना जाता है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के आंदोलन में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और वर्तमान समय में भी पत्रकारिता समाज को दिशा देने तथा जनचेतना निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माता-पिता बच्चों को संस्कार और सही दिशा प्रदान करते हैं, उसी प्रकार धर्मगुरु व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, संयम और नियंत्रण की भावना विकसित करते हैं। पत्रकारिता का दायित्व केवल समाचारों को प्रकाशित या प्रसारित करना नहीं, बल्कि समाज के सामने सत्य का दर्शन कराना भी है। उन्होंने पत्रकारों से अपनी लेखनी की शक्ति को समाजहित में उपयोग करने का आह्वान किया।
मुनि श्री पुनीत सागर जी ने कहा—‘जिए और जीने दो’ बने पत्रकारिता का आधार
मुनि श्री पुनीत सागर जी महाराज ने पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि “जिए और जीने दो” की भावना पत्रकारिता के मूल आधारों में शामिल होनी चाहिए।
उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि ऐसी खबरों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे समाज और समस्त जीवों का कल्याण हो। हिंसा, वैमनस्य अथवा तनाव को बढ़ावा देने वाली खबरों के बजाय सामाजिक सद्भाव, मानवता, करुणा और सकारात्मकता को बढ़ावा देने वाले विषयों को सामने लाने की आवश्यकता है।
मुनि श्री पुनीत सागर जी ने शब्दों के चयन को लेकर भी पत्रकारों को सावधान किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार की कलम में बहुत बड़ी शक्ति होती है और शब्द किसी के हृदय को जोड़ भी सकते हैं तथा अनावश्यक रूप से चोट भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए समाचार लेखन में तथ्य, संयम और संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
मुनि श्री आगम सागर जी—सत्य के लिए निर्भय होना आवश्यक
मुनि श्री आगम सागर जी महाराज ने पत्रकारिता के मूल तत्व के रूप में सत्य और निर्भयता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सत्य वही व्यक्ति कह और लिख सकता है, जिसके हृदय में भय न हो।
उन्होंने पत्रकारों से आह्वान किया कि पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते समय सत्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि सत्य की जीत निश्चित होती है, भले ही उसे सामने आने में समय लगे। पत्रकार को परिस्थितियों के दबाव में आकर सत्य से समझौता नहीं करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी परिस्थिति में सत्य बोलना संभव न हो तो शांत रहना बेहतर है, लेकिन भ्रम फैलाने से बचना चाहिए। सत्य को धर्म बताते हुए उन्होंने पत्रकारों से सत्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं करने की अपील की।
जनगणना-2027 में जैन पहचान दर्ज कराने की अपील
राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन में जैन समाज की जनसंख्या और धार्मिक पहचान को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि उपलब्ध जनगणना आंकड़ों में देश में जैन समुदाय की संख्या लगभग 44 लाख दर्ज है, जबकि समाज के कुछ वर्गों का मत है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है।
सम्मेलन में जैन समाज के लोगों से अपील की गई कि जनगणना-2027 के दौरान प्रत्येक जैन परिवार अपनी धार्मिक पहचान स्पष्ट रूप से “जैन” के रूप में दर्ज कराए। वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक एवं सामाजिक पहचान का सही आंकड़ों में दर्ज होना समाज की वास्तविक स्थिति को समझने और उससे जुड़े विषयों पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने में सहायक हो सकता है।
जैन धर्म आयतनों के संरक्षण में मीडिया की भूमिका पर मंथन
सम्मेलन में जैन धर्म के प्रमुख आयतनों, तीर्थ क्षेत्रों, मंदिरों, धार्मिक संस्थाओं और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन में पत्रकारिता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि देशभर में फैले जैन तीर्थ, प्राचीन मंदिर, धार्मिक संस्थाएं और सांस्कृतिक परंपराएं केवल जैन समाज की ही नहीं, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं।
ऐसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ी सकारात्मक गतिविधियों, संरक्षण की आवश्यकताओं और समाजोपयोगी कार्यों को मीडिया के माध्यम से व्यापक स्तर पर सामने लाने की आवश्यकता है। पत्रकारिता समाज की आवाज को शासन-प्रशासन और आम जनता तक पहुंचाने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बन सकती है।
देशभर के जैन पत्रकारों का एक मंच पर हुआ संवाद
राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन की विशेषता यह रही कि विभिन्न राज्यों और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय जैन पत्रकार एक मंच पर एकत्रित हुए। सम्मेलन ने पत्रकारों को अपने अनुभव साझा करने, विचारों का आदान-प्रदान करने और समाजहित से जुड़े विषयों पर सामूहिक चिंतन करने का अवसर प्रदान किया।
परिचर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जैन समाज के सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विषयों को तथ्यपरक एवं संतुलित तरीके से समाज के सामने लाया जाए। पत्रकारिता के माध्यम से समाज में जागरूकता, सकारात्मक सोच, अहिंसा, संयम, करुणा और आपसी सद्भाव को मजबूत करने के प्रयास किए जाएं।
सत्य, संयम और समाजहित को केंद्र में रखकर पत्रकारिता का आह्वान
सम्मेलन का मूल संदेश यही रहा कि पत्रकारिता केवल समाचार प्रकाशित करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के निर्माण और दिशा निर्धारण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। पत्रकार की लेखनी में तथ्य की विश्वसनीयता, भाषा में संयम और उद्देश्य में समाजहित होना आवश्यक है।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान दौर में सूचना का प्रसार अत्यंत तेज हो गया है। ऐसे समय में पत्रकारों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि किसी भी समाचार को प्रसारित करने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि की जाए और ऐसी सामग्री से बचा जाए जिससे समाज में भ्रम, वैमनस्य अथवा अनावश्यक तनाव उत्पन्न हो।
सम्मेलन में संतों के मार्गदर्शन के साथ पत्रकारों ने यह संदेश भी प्राप्त किया कि सत्य, अहिंसा, संयम, संवेदनशीलता और समाजकल्याण को पत्रकारिता की मूल भावना बनाया जाए।
बड़ी संख्या में पत्रकार एवं समाज के पदाधिकारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में पारस चैनल के डायरेक्टर एवं छत्तीसगढ़ सकल दिगंबर जैन समाज के कार्यकारी अध्यक्ष प्रकाश मोदी, प्रदीप कुमार जैन संपादक दैनिक विश्व परिवार, विनोद बड़जात्या, नरेंद्र जैन गुरु कृपा, संदीप लुहाडिया, क्षितिज जैन, सौरभ जैन संचालक समर्थ मीडिया, जैन पत्रकार महासंघ के अध्यक्ष रमेश तिजारिया, महामंत्री उदयभान जैन, बुंदेलखंड क्षेत्र के संयोजक भरत सेठ सहित देशभर से आए जैन समाज के पत्रकार, मीडिया प्रतिनिधि एवं समाज के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय जैन पत्रकार सम्मेलन ने रायपुर की धरती पर जैन पत्रकारिता को लेकर एक नए संवाद की शुरुआत की। सम्मेलन में उठे विचारों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि समाज की आवाज को मजबूती से सामने लाने के साथ-साथ पत्रकारिता को सत्य, संवेदनशीलता, सामाजिक सद्भाव और सर्वकल्याण से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
