विजयादशमी महोत्सव पर अकलतरा में गूंजा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुशासन और संगठन का संदेश
सरस्वती शिशु मंदिर से निकला भव्य पथ संचलन, नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरे स्वयंसेवक; जिला प्रचारक फूल सिंह यादव ने संघ की स्थापना, उद्देश्यों एवं कार्यों पर डाला प्रकाश
अकलतरा – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अकलतरा नगर द्वारा विजयादशमी महोत्सव हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक शाला परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात नगर में भव्य पथ संचलन निकाला गया। गणवेशधारी स्वयंसेवकों की अनुशासित कदमताल, एकरूपता और संगठनात्मक एकजुटता ने नगरवासियों का ध्यान आकर्षित किया। पथ संचलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों ने बड़ी संख्या में सहभागिता निभाई।
विजयादशमी महोत्सव के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में संघ की स्थापना के उद्देश्य, राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका, सामाजिक समरसता, संगठन की शक्ति तथा भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण जैसे विषयों का संदेश दिया गया।
सरस्वती शिशु मंदिर परिसर से हुआ पथ संचलन का शुभारंभ – 
विजयादशमी उत्सव के अंतर्गत सर्वप्रथम सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक शाला परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके पश्चात स्वयंसेवकों ने निर्धारित गणवेश में अनुशासित पंक्तियों में खड़े होकर पथ संचलन प्रारंभ किया। पथ संचलन की शुरुआत विद्यालय परिसर से हुई, जहां से स्वयंसेवक नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आगे बढ़े।
पथ संचलन कॉलेज रोड, थाना रोड, बजरंग चौक, शास्त्री चौक, सब्जी मार्केट रोड, भगवान परशुराम मार्ग, स्टेशन रोड, पोस्ट ऑफिस मार्ग, आजाद चौक एवं अंबेडकर चौक से होते हुए पुनः सरस्वती शिशु मंदिर परिसर पहुंचा। नगर के विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए स्वयंसेवकों की अनुशासित कदमताल ने संगठन की एकजुटता, अनुशासन और सामूहिकता का परिचय दिया। इस दौरान नगर में उत्सव जैसा वातावरण देखने को मिला।
विजयादशमी महोत्सव में जिला प्रचारक फूल सिंह यादव का उद्बोधन –
पथ संचलन के समापन के पश्चात सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में विजयादशमी महोत्सव का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक जांजगीर-चांपा फूल सिंह यादव ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, उसके उद्देश्यों, संगठनात्मक कार्यप्रणाली एवं राष्ट्रहित में किए जा रहे विभिन्न कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
उन्होंने विजयादशमी महोत्सव के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व भारतीय परंपरा में शक्ति, साहस, धर्म, सत्य और विजय का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी का पर्व हमें अन्याय और बुराई के विरुद्ध खड़े होने तथा अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के पीछे निहित विचारधारा एवं उद्देश्य की जानकारी देते हुए संगठन के अनुशासन, शाखा पद्धति, स्वयंसेवकों के व्यक्तित्व निर्माण तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके संगठित, जागरूक और संस्कारवान समाज में निहित होती है। समाज में आपसी सद्भाव, समरसता, सेवा भावना और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
संघ स्थापना दिवस और विजयादशमी का विशेष महत्व – 
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा नागपुर में की गई थी। इसी कारण विजयादशमी का पर्व संघ के लिए विशेष महत्व रखता है। संघ प्रतिवर्ष इस अवसर पर स्थापना दिवस एवं विजयादशमी उत्सव का आयोजन करता है। इस दौरान स्वयंसेवक संगठन के प्रति अपने दायित्वों का स्मरण करते हुए समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का संकल्प लेते हैं।
अकलतरा नगर में आयोजित विजयादशमी महोत्सव भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा, जिसमें पथ संचलन और मुख्य वक्ता के उद्बोधन के माध्यम से संगठन, अनुशासन, सामाजिक एकता एवं राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया।
अनुशासन और संगठन की भावना के साथ संपन्न हुआ आयोजन –
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अकलतरा नगर द्वारा आयोजित विजयादशमी महोत्सव ने नगर में संगठनात्मक एकजुटता और सामाजिक सहभागिता का वातावरण निर्मित किया। पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवकों की अनुशासित कार्यशैली और सामूहिक सहभागिता कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही। वहीं मुख्य वक्ता के उद्बोधन ने विजयादशमी पर्व के महत्व और संघ की स्थापना के उद्देश्यों को समझने का अवसर प्रदान किया।
इस प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अकलतरा नगर का विजयादशमी महोत्सव पूजा-अर्चना, भव्य पथ संचलन और वैचारिक उद्बोधन के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
