अकलतरा में 104 लीटर अवैध शराब बरामद, पुलिस-आबकारी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
चार लोहे के दरवाजों के पीछे बने कमरे में छिपाकर रखी थी शराब, 334 नग जब्त; पुलिस ने आरोपी को भेजा न्यायिक रिमांड पर
अकलतरा – 2 अक्टूबर के शुष्क दिवस के मद्देनजर अवैध शराब के निर्माण, संग्रहण, परिवहन एवं बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान अकलतरा पुलिस ने वार्ड क्रमांक 13 में बड़ी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में अवैध शराब बरामद की है। पुलिस के अनुसार आरोपी अपने घर के भीतर चार लोहे के दरवाजों के पीछे बने एक कमरे में शराब छिपाकर रखता था तथा किराना दुकान की आड़ में शराब बिक्री किए जाने की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर शराब बरामद की।
पुलिस ने मामले में प्रकाश भारद्वाज पिता स्व. भारत भारद्वाज, उम्र 42 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 13, अकलतरा को गिरफ्तार किया है। आरोपी के विरुद्ध आबकारी एक्ट की धारा 34(2), 59(क) एवं 39(ग) के तहत अपराध दर्ज कर उसे 02 अक्टूबर को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
334 नग शराब, 104 लीटर से अधिक मात्रा बरामद
पुलिस के मुताबिक तलाशी कार्रवाई के दौरान अलग-अलग ब्रांड की शराब बरामद हुई। जब्त शराब में 180 एमएल देशी प्लेन यूनिक ब्रांड के 235 नग, देशी प्लेन सुपर 36 ब्रांड के 46 नग, गोवा स्पेशल व्हिस्की के 206 नग, रॉयल चैलेंज व्हिस्की के 31 नग तथा सिम्बा एक्स्ट्रा बीयर के 16 नग शामिल हैं।
पुलिस द्वारा जारी विवरण के अनुसार कुल 334 नग शराब, लगभग 104 लीटर, जिसकी कीमत ₹56,560 बताई गई है। इसके अलावा बिक्री की रकम ₹28,615 तथा वोल्टास कंपनी का फ्रिज, जिसकी कीमत करीब ₹10,000 बताई गई है, भी जब्त किया गया। पुलिस के अनुसार कुल जुमला जब्ती ₹95,175 की है।
चार लोहे के दरवाजों के पीछे छिपाकर रखा था माल –
कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि पुलिस के अनुसार शराब को घर के भीतर सामान्य स्थान पर नहीं बल्कि चार लोहे के दरवाजों के पीछे बने कमरे में छिपाकर रखा गया था। इतनी बड़ी मात्रा में शराब के इस प्रकार सुरक्षित तरीके से रखे जाने से यह सवाल भी उठता है कि शराब का संग्रहण कब से किया जा रहा था और इसे यहां तक पहुंचाने की पूरी कड़ी क्या थी।
पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिलने के बाद टीम ने मकान की घेराबंदी कर तलाशी कार्रवाई की और उक्त कमरे को खोलने के लिए आवश्यक कार्रवाई करते हुए शराब बरामद की।
थाना से कुछ दूरी पर इतनी बड़ी मात्रा में शराब मिलने से उठे सवाल –
इस कार्रवाई के बाद अकलतरा में पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि पुलिस के अनुसार एक व्यक्ति अपने घर में इतनी बड़ी मात्रा में अलग-अलग ब्रांड की शराब जमा कर उसे बिक्री के लिए रखे हुए था, तो यह पता लगाया जाना आवश्यक है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब आरोपी तक कब, कहां से और किस माध्यम से पहुंची।
विशेष रूप से यह जांच का विषय हो सकता है कि शराब की आपूर्ति किसी अधिकृत स्रोत से हुई थी अथवा अवैध चैनल के माध्यम से। यदि शराब वैध रूप से खरीदी गई थी तो उसकी बिक्री और भंडारण किस नियम के तहत किया जा रहा था, जबकि यदि शराब अवैध स्रोत से पहुंची थी तो उसके पीछे मौजूद आपूर्ति नेटवर्क तक पहुंचना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
शराब पर लगे स्टीकर और स्कैनर की भी हो सघन जांच –
जब्त शराब की बोतलों पर लगे लेबल, स्टीकर, बैच नंबर, बारकोड/स्कैनर कोड एवं अन्य पहचान चिन्हों की तकनीकी जांच किए जाने की मांग भी उठ रही है। प्रत्येक ब्रांड की शराब किस बैच से संबंधित है, उसका निर्माण एवं वितरण कहां हुआ, वह किस अधिकृत चैनल के माध्यम से बाजार में आई और जिस क्षेत्र के लिए उसका वितरण किया गया था, वहां से वह अकलतरा तक कैसे पहुंची—इन सभी बिंदुओं की जांच से शराब की आपूर्ति श्रृंखला की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
यदि स्कैनर अथवा बारकोड के माध्यम से बोतलों की ट्रेसिंग संभव है, तो जांच एजेंसी को जब्त शराब के प्रत्येक बैच और कोड का मिलान संबंधित रिकॉर्ड से करना चाहिए। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि जब्त शराब वैध आपूर्ति श्रृंखला की है अथवा उसके संबंध में कोई अनियमितता है।
क्या केवल आरोपी तक सीमित रहेगी जांच –
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच केवल शराब रखने और बेचने के आरोपी तक सीमित रहेगी या फिर शराब की पूरी सप्लाई चेन तक पहुंचेगी।
104 लीटर से अधिक शराब किसी व्यक्ति तक अचानक नहीं पहुंचती। इतनी बड़ी मात्रा में अलग-अलग ब्रांड की शराब के संग्रहण के पीछे परिवहन, आपूर्ति और आर्थिक लेन-देन की संभावित कड़ियों की जांच आवश्यक है। पुलिस और आबकारी विभाग यदि जब्त शराब के स्रोत की पड़ताल करते हैं तो इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि शराब की आपूर्ति करने वाला व्यक्ति अथवा नेटवर्क कौन है।
इसके साथ ही पुलिस को बिक्री की जब्त रकम ₹28,615 के संबंध में भी आवश्यक जांच करनी चाहिए कि यह राशि किस अवधि की बिक्री से संबंधित है और क्या आरोपी द्वारा लंबे समय से शराब बिक्री का काम किया जा रहा था।
किराना दुकान की आड़ में बिक्री के आरोप की भी हो जांच –
पुलिस के अनुसार आरोपी द्वारा किराना दुकान की आड़ में शराब बेचने की सूचना मिली थी। ऐसे में किराना दुकान की गतिविधियों, वहां आने-जाने वाले लोगों, बिक्री के रिकॉर्ड और आसपास के लोगों से पूछताछ के माध्यम से यह भी जांचा जा सकता है कि कथित शराब बिक्री कब से संचालित हो रही थी।
यदि लंबे समय से इस प्रकार की गतिविधि संचालित होने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होंगे। हालांकि, इन बिंदुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
पुलिस की कार्रवाई से अवैध शराब कारोबारियों में हड़कंप –
पुलिस अधीक्षक विजय पांडेय के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. यूलेण्डन यार्क के मार्गदर्शन तथा अनुविभागीय अधिकारी पुलिस अकलतरा डॉ. मेखलेन्द्र प्रताप सिंह के पर्यवेक्षण में कार्रवाई किए जाने की जानकारी पुलिस ने दी है। थाना प्रभारी निरीक्षक जय साहू सहित पुलिस टीम ने कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कार्रवाई में उप निरीक्षक कमलदास बनर्जी, प्रशिक्षु उप निरीक्षक दिव्या कुर्रे, प्रधान आरक्षक शरीफुद्दीन खान, आरक्षक शैलेन्द्र राठौर, शेषनारायण साहू, महेन्द्र राज, बसंत साहू, महिला आरक्षक रश्मि भदोरिया एवं कृष्णा पटेल की भूमिका रही।
अब असली परीक्षा जांच की दिशा और गहराई की –
अकलतरा में हुई यह कार्रवाई केवल एक आरोपी की गिरफ्तारी और शराब जब्ती तक सीमित न रहकर यदि शराब के स्रोत से लेकर अंतिम बिक्री केंद्र तक की पूरी कड़ी की जांच तक पहुंचती है, तो अवैध शराब कारोबार के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
जनचर्चा का मुख्य सवाल भी यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर आरोपी तक कैसे पहुंची? क्या शराब अधिकृत दुकान या वितरण चैनल से निकली? क्या बोतलों के स्टीकर और स्कैनर से इसकी आपूर्ति का स्रोत पता लगाया जा सकता है? क्या लंबे समय से इस प्रकार की बिक्री चल रही थी? और यदि ऐसा था तो संबंधित निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
इन सभी सवालों का जवाब पुलिस एवं आबकारी विभाग की निष्पक्ष, तकनीकी और विस्तृत जांच से ही सामने आ सकता है। इसलिए जब्त शराब के स्टीकर, बैच नंबर एवं स्कैनर कोड की जांच के साथ-साथ परिवहन, आपूर्ति स्रोत, बिक्री नेटवर्क और आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल किए जाने की आवश्यकता है, ताकि कार्रवाई केवल शराब जब्त करने और एक आरोपी को गिरफ्तार करने तक सीमित न रहे, बल्कि यदि कोई बड़ा आपूर्ति नेटवर्क मौजूद है तो उसकी वास्तविक कड़ी तक भी पहुंचा जा सके।
