महामाया मंदिर में प्रज्वलित हो रहे 896 मनोकामना ज्योति कलश
690 तेल और 206 घृत ज्योति कलशों से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर, सप्तमी पर होगी विशेष पूजा-अर्चना, नवमी को हवन-पूजन के बाद भव्य भंडारे का आयोजन
अकलतरा – कुँवार शारदीय नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर अकलतरा नगर के रामसागर तालाब के समीप स्थित प्राचीन आदिशक्ति मां महामाया मंदिर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। मां महामाया के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास के बीच मंदिर में कुल 896 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित हो रहे हैं। इनमें 690 तेल ज्योति कलश एवं 206 घृत ज्योति कलश शामिल हैं। नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर मां महामाया की पूजा-अर्चना कर रहे हैं तथा परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलकामना के लिए माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
शारदीय नवरात्रि के आगमन के साथ ही महामाया मंदिर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। सुबह और शाम होने वाली मंगल आरती, नियमित पूजा-अर्चना तथा देवी स्तुति से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव से सराबोर हो रहा है। माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु ज्योति कलश के दर्शन कर अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की आवाजाही बनी हुई है।
896 मनोकामना ज्योति कलशों से जगमगा रहा महामाया मंदिर
नवरात्रि पर्व में मनोकामना ज्योति कलशों का विशेष धार्मिक महत्व होता है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति, परिवार की सुख-शांति, आरोग्य, समृद्धि और जीवन में खुशहाली की कामना के साथ माता के दरबार में ज्योति प्रज्वलित कराते हैं। अकलतरा के प्राचीन महामाया मंदिर में इस वर्ष 896 ज्योति कलशों का प्रज्वलन श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और माता रानी के प्रति उनकी श्रद्धा को दर्शाता है।
मंदिर में प्रज्वलित 690 तेल ज्योति कलश एवं 206 घृत ज्योति कलश नवरात्रि की धार्मिक महत्ता को और विशेष बना रहे हैं। ज्योति कलश कक्ष में दीपों की निरंतर देखरेख की जा रही है, ताकि पूरे नवरात्रि पर्व के दौरान ज्योतियां सुरक्षित रूप से प्रज्वलित रहें। इसके लिए रतनपुर से आए प्रशिक्षित लोगों द्वारा 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
प्राचीन परंपरा के अनुसार पंचमी पर माता को अर्पित किया गया ध्वज – 
महामाया मंदिर में नवरात्रि के दौरान धार्मिक परंपराओं का विशेष रूप से निर्वहन किया जा रहा है, मंदिर प्रबंध समिति के सौरभ सिंह, अनिल सिंह, नंद कुमार चौधरी एवं रविन्द्र साहू ने बताया कि कुँवार शारदीय नवरात्रि पर्व के अवसर पर मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम मंगल आरती के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है।
उन्होंने बताया कि नवरात्रि की पंचमी तिथि पर मां महामाया को ध्वज अर्पित किया गया। प्राचीन समय से ही पंचमी के अवसर पर माता रानी को ध्वज अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है। इस परंपरा का निर्वहन श्रद्धा और धार्मिक विधि-विधान के साथ किया जाता है। ध्वज अर्पण को माता के प्रति समर्पण, आस्था और मंगलकामना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
मंदिर में नवरात्रि के प्रत्येक दिन का अपना विशेष धार्मिक महत्व है। इसी क्रम में सप्तमी तिथि पर विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इस अवसर पर श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचकर पूजा करेंगे और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
सप्तमी पर विशेष पूजा-अर्चना, नवमी को हवन-पूजन और भव्य भंडारा
नवरात्रि के आगामी धार्मिक आयोजनों को लेकर भी मंदिर परिसर में तैयारियां की जा रही हैं। सप्तमी के पावन अवसर पर मां महामाया की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दौरान विधि-विधान से पूजन कर माता रानी से नगर सहित क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की जाएगी।
वहीं, नवरात्रि की नवमी तिथि पर मंदिर परिसर में हवन एवं पूजन के पश्चात भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन में नगर के श्रद्धालुओं और नागरिकों के शामिल होने की संभावना है। भंडारे के माध्यम से श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे और माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करेंगे।
नवमी पर होने वाला हवन-पूजन नवरात्रि के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल है। इस अवसर पर भक्तजन माता की आराधना कर अपने परिवार और समाज के कल्याण की कामना करेंगे। भंडारे का आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, सामूहिक सहभागिता और सेवा भावना को भी प्रोत्साहित करेगा।
पुजारियों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना, ज्योति कलश कक्ष में चौबीस घंटे निगरानी
महामाया मंदिर में नवरात्रि के दौरान नियमित पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी मंदिर के पुजारी श्यामसुंदर दुबे एवं हेमंत कुमार दुबे द्वारा निभाई जा रही है। दोनों पुजारियों द्वारा धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार माता रानी की पूजा-अर्चना संपन्न कराई जा रही है। सुबह और शाम होने वाली आरती में श्रद्धालु शामिल होकर मां महामाया के दर्शन करते हैं।
मंदिर में प्रज्वलित 896 मनोकामना ज्योति कलशों की देखरेख के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। रतनपुर से आए प्रशिक्षित लोग ज्योति कलश कक्ष में चौबीस घंटे निगरानी कर रहे हैं। नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक ज्योतियों की देखरेख करना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ ही एक जिम्मेदारीपूर्ण कार्य भी है। इसके लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत निरंतर निगरानी की जा रही है।
जसगीत और देवी गीतों से गूंज रहा मंदिर परिसर –
नवरात्रि पर्व के दौरान महामाया मंदिर में केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि भक्ति संगीत का भी विशेष वातावरण देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर में महिला कीर्तन मंडलियों द्वारा जसगीत एवं अन्य देवी गीतों की प्रस्तुति दी जा रही है। देवी गीतों की मधुर स्वर लहरियों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठता है और श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबकर माता की आराधना करते हैं।
छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में जसगीत का विशेष स्थान है। नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा और आदिशक्ति की महिमा का गुणगान करने वाले जसगीत श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक उत्साह का संचार करते हैं। महिला कीर्तन मंडलियों की प्रस्तुतियां मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
नवरात्रि के प्रत्येक दिन मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालु धार्मिक वातावरण का आनंद लेने के साथ माता रानी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त कर रहे हैं। सुबह से शाम तक मंदिर परिसर में भक्तिभाव का माहौल बना हुआ है।
नगर की आस्था का प्रमुख केंद्र है प्राचीन महामाया मंदिर –
रामसागर तालाब के समीप स्थित मां महामाया मंदिर अकलतरा नगर के प्रमुख प्राचीन धार्मिक स्थलों में शामिल है। नगर के अनेक परिवारों की इस मंदिर से गहरी आस्था जुड़ी हुई है। नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए ज्योति कलश प्रज्वलित कराते हैं।
वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं के कारण शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिर का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। विशेष पूजा-अर्चना, ध्वज अर्पण, मनोकामना ज्योति कलश, जसगीत और देवी गीतों की प्रस्तुतियां इस पर्व को धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से विशिष्ट बनाती हैं।
मां महामाया के दरबार में पहुंचने वाले श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रम नगरवासियों को एक साथ जोड़ने और धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस प्रकार, कुँवार शारदीय नवरात्रि के अवसर पर अकलतरा के प्राचीन मां महामाया मंदिर में 896 मनोकामना ज्योति कलशों का प्रज्वलन, प्रतिदिन होने वाली मंगल आरती, पंचमी पर ध्वज अर्पण, सप्तमी की विशेष पूजा-अर्चना और नवमी को प्रस्तावित हवन-पूजन एवं भंडारे का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मां महामाया की आराधना, जसगीतों की गूंज और भक्तों की आस्था से मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।
