हसदेव नदी में पिकनिक का मातम: तीन छात्रों में से एक का शव मिला, दो की तलाश जारी
देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट पर हादसे के बाद मचा हड़कंप, 2 किलोमीटर दूर सत्तीगुड़ी एनीकेट के पास मिला छात्र पवन पाल का शव
तेज बहाव और गहरे पानी के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, दो छात्रों का अब तक सुराग नहीं
आठ साल में आठ मौतों के बावजूद सुरक्षा इंतजामों पर उठ रहे गंभीर सवाल
अकलतरा – बलौदा विकासखंड के देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट में हसदेव नदी के तेज बहाव में बहे तीन छात्रों में से एक छात्र का शव शनिवार सुबह रेस्क्यू टीम ने बरामद कर लिया। घटनास्थल से करीब दो किलोमीटर दूर सत्तीगुड़ी एनीकेट के पास सुबह लगभग 8 बजे छात्र पवन पाल का शव तेज बहाव वाले पानी से निकाला गया। वहीं नदी में बहे अन्य दो छात्रों मुरारी साहू और सचिन सिंह की तलाश अब भी जारी है।
हादसे के बाद से ही जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की निगरानी में रेस्क्यू टीम लगातार नदी में तलाश अभियान चला रही है। हालांकि हसदेव नदी में पानी का बहाव तेज होने और कई स्थानों पर पानी की गहराई अधिक होने के कारण रेस्क्यू टीम को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पिकनिक मनाने पहुंचे थे आठ छात्र-छात्राएं –
जानकारी के अनुसार 11 सितंबर को बिलासपुर स्थित चौकसे कॉलेज के आठ छात्र-छात्राएं देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट पहुंचे थे। दोपहर करीब 2 बजे पिकनिक के दौरान तीन छात्र हसदेव नदी में नहाने के लिए उतरे। इसी दौरान अचानक नदी के तेज बहाव की चपेट में आने से मुरारी साहू, सचिन सिंह और पवन पाल बह गए।
तीनों छात्रों के नदी में बहने की खबर मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन को दी गई। इसके बाद रेस्क्यू टीम को मौके पर बुलाकर नदी में तलाश अभियान शुरू किया गया।
अंधेरा और बढ़ते जलस्तर के कारण रोकना पड़ा अभियान
11 सितंबर को देर शाम तक रेस्क्यू टीम ने नदी में काफी तलाश की, लेकिन अंधेरा बढ़ने तथा घटनास्थल पर पानी का स्तर बढ़ने और बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू अभियान रोकना पड़ा। इसके बाद शनिवार सुबह करीब 6 बजे दोबारा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
टीम ने नदी के संभावित बहाव क्षेत्र, किनारों और आसपास के हिस्सों में तलाश तेज की। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद घटनास्थल से लगभग दो किलोमीटर दूर सत्तीगुड़ी एनीकेट के पास रेस्क्यू टीम को एक युवक का शव दिखाई दिया। जांच के बाद शव की पहचान पवन पाल के रूप में हुई।
शव मिलते ही परिजनों में पसरा मातम
पवन पाल का शव मिलने की खबर जैसे ही परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों को मिली, वहां का माहौल गमगीन हो गया। बेटे की मौत की खबर से परिजन सदमे में डूब गए। परिजनों ने शव के पास बैठकर अपना दुख व्यक्त किया। हादसे के बाद पिकनिक स्पॉट पर खुशी का माहौल पूरी तरह मातम में बदल गया।
दो छात्रों की तलाश में जुटी रेस्क्यू टीम –
पवन पाल का शव बरामद होने के बाद रेस्क्यू टीम ने नदी में बहे अन्य दो छात्रों मुरारी साहू और सचिन सिंह की तलाश और तेज कर दी है। नदी का बहाव लगातार तेज होने तथा पानी गहरा होने के कारण अभियान में कठिनाई आ रही है। प्रशासन और पुलिस की टीम संभावित बहाव क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही है।
मौके पर मौजूद पंतोरा चौकी प्रभारी के.के. साहू ने बताया कि रेस्क्यू टीम द्वारा घटनास्थल से लगभग दो किलोमीटर दूर सत्तीगुड़ी एनीकेट के पास पवन पाल का शव बरामद किया गया है। अन्य दोनों युवकों की तलाश लगातार जारी है, लेकिन अभी तक उनका पता नहीं चल पाया है।
आठ साल में आठ मौतें, फिर भी नहीं चेता प्रशासन?
देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट में हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि क्षेत्र में लंबे समय से मौजूद सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों पर भी सवाल खड़े करता है। हसदेव नदी के किनारे स्थित यह पिकनिक स्पॉट बिलासपुर, कोरबा सहित आसपास के कई जिलों के युवाओं और परिवारों के आकर्षण का केंद्र है। बड़ी संख्या में लोग यहां पिकनिक मनाने पहुंचते हैं।
लेकिन यही खूबसूरत पर्यटन स्थल बरसात के मौसम में बेहद खतरनाक रूप धारण कर लेता है। नदी में पानी का स्तर बढ़ने के साथ ही बहाव बेहद तेज हो जाता है, जबकि कई हिस्सों में पानी की गहराई भी काफी अधिक है। इसके बावजूद लोग नदी में उतरकर नहाने का जोखिम उठाते हैं।
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार वर्ष 2018 से अब तक देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट में करीब आठ लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद यहां स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होना प्रशासनिक इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सिर्फ चेतावनी बोर्ड से कैसे रुकेगी मौत?
प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा घटनास्थल पर सांकेतिक एवं चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल चेतावनी बोर्ड लगाकर नदी में होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिकनिक सीजन और खासकर बारिश के दौरान यहां पुलिस जवानों की नियमित तैनाती, प्रशिक्षित लाइफगार्ड, पर्याप्त बैरिकेडिंग, नदी के खतरनाक हिस्सों की स्पष्ट पहचान तथा आपातकालीन रेस्क्यू व्यवस्था बेहद जरूरी है।
यदि नदी के गहरे और तेज बहाव वाले हिस्सों में लोगों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम किए जाएं तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक टाला जा सकता है।
हादसे के बाद फिर वही सवाल—जिम्मेदारी किसकी?
देवरी-चिचोली में बार-बार हो रही घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि आखिर प्रशासन कब इस पिकनिक स्पॉट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर और स्थायी कदम उठाएगा?
हर हादसे के बाद रेस्क्यू टीम नदी में उतरती है, परिवारों में मातम छाता है और कुछ समय के लिए सुरक्षा व्यवस्था की चर्चा होती है। लेकिन यदि आठ साल में आठ लोगों की जान जा चुकी है, तो यह व्यवस्था की समीक्षा का गंभीर विषय है।
फिलहाल पूरा ध्यान नदी में बहे दो छात्रों को सुरक्षित तलाशने पर केंद्रित है। रेस्क्यू टीम लगातार अभियान चला रही है। परिजनों की निगाहें नदी की ओर टिकी हैं और हर गुजरते पल के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रेस्क्यू टीम मुरारी साहू और सचिन सिंह को भी तलाश पाने में सफल होगी और क्या इस हादसे के बाद देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस और स्थायी कदम उठाया जाएगा?













