भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारंभ
भगवान श्रीकृष्ण-राधा के जयकारों से गूंजा अकलतरा, नगरवासियों ने जगह-जगह किया कलश यात्रा का स्वागत
“भागवत कथा जीवन को धर्म, भक्ति और ज्ञान के मार्ग पर ले जाने वाला दिव्य उपदेश” — अनुराग कृष्ण शास्त्री
अकलतरा -कान्हा राइस प्रोडक्ट, नया घर परिसर, झलमला रोड नरियरा में जिंदल परिवार अकलतरा, कापन, खरसिया एवं रॉबर्टसन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का शुभारंभ रविवार को अत्यंत भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण में हुआ, कथा के शुभारंभ अवसर पर अकलतरा नगर में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं, युवतियों, श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। कलश यात्रा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा के जयकारों से पूरा नगर भक्तिरस में सराबोर नजर आया।
कलश यात्रा का शुभारंभ स्टेशन रोड स्थित जानकीलाल लिखमानिया धर्मशाला परिसर से हुआ। यात्रा में पंथी नृत्य, करमा नृत्य, डीजे, बैंड-बाजे तथा विभिन्न वाद्य यंत्रों की मनमोहक धुनों ने धार्मिक वातावरण को और भी आकर्षक बना दिया। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल महिलाओं एवं युवतियों ने सिर पर कलश धारण कर यात्रा की शोभा बढ़ाई। श्रद्धालुओं की लंबी कतार और धार्मिक जयघोष से नगर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
कलश यात्रा भगवान परशुराम मार्ग, सब्जी मार्केट, शास्त्री चौक, आजाद चौक, अंबेडकर चौक, अग्रसेन चौक, मिनीमाता चौक, फोरलेन चौक तरौद, बनाहिल होते हुए कथा स्थल पहुंची। यात्रा में वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथा व्यास अनुराग कृष्ण शास्त्री को सुसज्जित रथ में विराजमान किया गया था। जगह-जगह नगरवासियों ने पुष्पवर्षा एवं स्वागत कर कथा व्यास तथा कलश यात्रा का अभिनंदन किया।
राधा-कृष्ण के जयकारों से गूंजा नगर –
कलश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा लगातार लगाए जा रहे “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण” एवं भगवान के अन्य जयघोषों से पूरा नगर गूंज उठा। धार्मिक आयोजन को लेकर नगरवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। यात्रा के मार्ग में लोगों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया तथा भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
कथा स्थल पहुंचने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना, मंगलाचरण, दीप प्रज्वलन एवं व्यास पूजा संपन्न कराई गई। कथा व्यास अनुराग कृष्ण शास्त्री के सानिध्य में कलश स्थापना के साथ सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का विधिवत शुभारंभ हुआ।
भागवत कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अनुपम संगम
श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस व्यास पीठ से कथा व्यास अनुराग कृष्ण शास्त्री ने श्रीमद् भागवत महापुराण की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “भागवत कथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अनुपम संगम है, जो मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती है। यह जीवन को धर्म, भक्ति और ज्ञान के मार्ग पर ले जाने वाला दिव्य उपदेश है।”
उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण 18 हजार श्लोकों से युक्त महान ग्रंथ है, जिसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की। भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि मनुष्य के जीवन को संस्कारित करने वाली आध्यात्मिक यात्रा है। वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक जीवन की आपाधापी में उलझा हुआ है। उसके पास भगवान का स्मरण, पूजा-पाठ और आत्मचिंतन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। ऐसे समय में श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करती है।
कथा व्यास ने कहा कि कलियुग में मनुष्य अनेक प्रकार के दुख, अशांति, मोह एवं मानसिक तनाव से घिरा हुआ है। श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा मनुष्य को जीवन की वास्तविकता का बोध होता है। भगवान का नाम स्मरण एवं कथा श्रवण मन को शुद्ध करने के साथ जीवन को नई दिशा प्रदान करता है।
अत्याचार बढ़ने पर भगवान लेते हैं अवतार
अनुराग कृष्ण शास्त्री ने भगवान के अवतारों की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब धरती पर अत्याचार और अधर्म बढ़ता है तथा पीड़ित मानवता संकट में आती है, तब-तब भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेकर धर्म की स्थापना एवं मानवता की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को अहंकार, मोह एवं दुख से मुक्ति का मार्ग दिखाती है और उसे सत्य, धर्म, सेवा तथा भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
राजा परीक्षित एवं सुखदेव संवाद ने बांधा श्रद्धालुओं को –
कथा के दौरान राजा परीक्षित एवं महर्षि सुखदेव के संवाद का प्रसंग सुनाते हुए अनुराग कृष्ण शास्त्री ने राजा परीक्षित ने सात दिनों तक निरंतर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण किया और अंततः मोक्ष को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि कलियुग में हरि नाम एवं भागवत कथा मनुष्य के लिए मोक्ष का महत्वपूर्ण साधन है। कथा श्रवण से मन की अशुद्धियां दूर होती हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व जन्मों के पुण्य एवं वर्तमान जीवन के सत्कर्मों के फलस्वरूप ही मनुष्य को श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन का अवसर तथा कथा श्रवण का सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पहुंचकर भागवत कथा का रसपान करने तथा अपने मानव जीवन को धन्य बनाने का आह्वान किया।
प्रथम दिवस कथा व्यास अनुराग कृष्ण शास्त्री ने भीष्म पांडव चरित्र, परीक्षित जन्म एवं सुखदेव प्राकट्य सहित विभिन्न प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे।
14 सितंबर को होंगे विशेष धार्मिक प्रसंग –
श्रीमद् भागवत कथा आयोजन समिति के ताराचंद अग्रवाल एवं कन्हैया अग्रवाल ने बताया कि आगामी 14 सितंबर को कथा में ब्रह्मांड की उत्पत्ति, भगवान विराट का प्राकट्य, विदुर-मैत्रेय संवाद एवं कपिल व्याख्यान जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।
आयोजन को लेकर कथा स्थल पर विशाल एवं आकर्षक पंडाल का निर्माण किया गया है। श्रद्धालुओं के बैठने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। कथा स्थल के बाहर वाहनों की पार्किंग सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। आयोजन को सफल बनाने में जिंदल परिवार एवं आयोजन समिति के साथ क्षेत्र के लोगों द्वारा सक्रिय रूप से सहयोग किया जा रहा है।
हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग –
भव्य कलश यात्रा एवं कथा शुभारंभ कार्यक्रम में मनोज अग्रवाल, गौरव अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, आनंद अग्रवाल, विजय अग्रवाल, तरुण अग्रवाल, शुभम अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, राहुल अग्रवाल सहित आयोजन समिति के सदस्य, जिंदल परिवार के सदस्य एवं क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ से अकलतरा एवं आसपास के क्षेत्र में आगामी सात दिनों तक भक्तिमय वातावरण बना रहने की उम्मीद है। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पहुंचकर कथा श्रवण करने एवं धार्मिक आयोजन का लाभ लेने की अपील की गई है।













