अकलतरा में सजी साहित्य और कविता की महफिल, वरिष्ठ एवं युवा कवियों ने बांधा समां
‘छत्तीसगढ़ लोकरंग लोक मानस हाना शब्दकोष’ का हुआ विमोचन, हर माह प्रथम रविवार को होगी साहित्यिक संगोष्ठी
अकलतरा – नगर में साहित्यिक गतिविधियों को नई ऊर्जा देने और स्थानीय रचनाकारों को अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए सशक्त मंच उपलब्ध कराने की दिशा में अकलतरा साहित्य मंच के तत्वावधान में एक भव्य एवं सार्थक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्य, कविता और छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति से सराबोर इस आयोजन में नगर के वरिष्ठ एवं युवा कवियों, साहित्यकारों तथा साहित्य प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत कविताओं ने जहां श्रोताओं को भाव-विभोर किया, वहीं रचनाकारों की विविध विषयों पर केंद्रित प्रस्तुतियों ने साहित्य की समृद्ध परंपरा और सामाजिक सरोकारों को भी उजागर किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना एवं वंदना के साथ हुआ। इसके पश्चात साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ करते हुए कविता के माध्यम से जीवन, समाज, संस्कृति, संवेदना, रिश्तों और समसामयिक विषयों को अभिव्यक्ति दी। पूरे आयोजन में साहित्य के प्रति आत्मीयता और रचनात्मक संवाद का वातावरण बना रहा।
छत्तीसगढ़ी लोकभाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल –
काव्य गोष्ठी के दौरान साहित्यकार ध्रुव सिंह ठाकुर द्वारा रचित पुस्तक ‘छत्तीसगढ़ लोकरंग लोक मानस हाना शब्दकोष’ का विमोचन किया गया। पुस्तक को छत्तीसगढ़ की लोकभाषा, लोक संस्कृति, लोक जीवन और लोक मानस से जुड़े शब्दों एवं अभिव्यक्तियों को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया गया।
साहित्यकारों ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, बोली, परंपरा और लोक संस्कृति से होती है। ऐसे समय में जब आधुनिकता के प्रभाव से लोकभाषा के अनेक पारंपरिक शब्द और अभिव्यक्तियां धीरे-धीरे जनजीवन से दूर होती जा रही हैं, ऐसे साहित्यिक प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने का कार्य करते हैं। ‘छत्तीसगढ़ लोकरंग लोक मानस हाना शब्दकोष’ इसी दृष्टि से एक उपयोगी और महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति के रूप में सामने आया है।
कविताओं में दिखे रिश्ते, संवेदना, नारी शक्ति और सामाजिक सरोकार
काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि रमेश सोनी ने पितृ पक्ष की भावनाओं और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा पर आधारित अपनी भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की। उनकी रचना ने श्रोताओं को पारिवारिक रिश्तों और पूर्वजों की स्मृतियों से जोड़ दिया तथा वातावरण को भावुक बना दिया।
वहीं श्रीमती वर्षा यादव ने मां की ममता और वात्सल्य को केंद्र में रखकर ‘मां मुझे अपने आंचल में पलने दे’ शीर्षक भावपूर्ण लोरी प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने मां और संतान के अटूट रिश्ते की संवेदनाओं को जीवंत कर दिया और श्रोता भाव-विभोर हो उठे।
श्रीमती अर्चना शर्मा ने नारी शक्ति पर आधारित अपनी प्रभावशाली कविता प्रस्तुत करते हुए महिला के संघर्ष, आत्मसम्मान, सामर्थ्य और समाज में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को शब्दों में पिरोया। उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं की खूब सराहना और वाहवाही मिली।
मूलतः कहानीकार पंकज भारती ने अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति का अलग रंग प्रस्तुत करते हुए नेपाल में आए भूकंप की त्रासदी और उससे उपजी मानवीय पीड़ा को अपनी कविता में स्थान दिया। उनकी कविता में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की वेदना, असहायता और मानवीय संवेदनाओं की मार्मिक झलक दिखाई दी।
इसके अलावा राजेश अग्रवाल, दशरथ नामदेव, संजीव चंदेल, रमाकांत सिंह, दशरथ मतवाला, आयुष सिंह एवं ठाकुर व्यास सिंह ने भी अपनी-अपनी रचनाओं का काव्य पाठ किया। अलग-अलग भावभूमि और विषयों पर प्रस्तुत कविताओं ने गोष्ठी को विविधता प्रदान की। कभी हास्य और व्यंग्य ने श्रोताओं को गुदगुदाया तो कभी संवेदनशील रचनाओं ने मन को छुआ। कवियों की प्रस्तुतियों पर लगातार तालियों की गूंज सुनाई देती रही।
अकलतरा के साहित्यिक इतिहास पर डाला प्रकाश –
कार्यक्रम के दौरान रविन्द्र सिंह बैस ने अकलतरा के साहित्यिक इतिहास पर प्रकाश डालते हुए नगर में साहित्य और रचनात्मक गतिविधियों की परंपरा से उपस्थित साहित्य प्रेमियों को अवगत कराया। उन्होंने स्थानीय साहित्यकारों और रचनाकारों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि अकलतरा की धरती पर साहित्य एवं सृजन की समृद्ध परंपरा रही है। आवश्यकता इस बात की है कि इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ा जाए।
हर माह प्रथम रविवार को होगी साहित्यिक संगोष्ठी –
कार्यक्रम का संचालन छेदी शर्मा ने प्रभावशाली ढंग से किया। उन्होंने कहा कि अकलतरा साहित्य मंच का उद्देश्य नगर के रचनाकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों को एक ऐसा साझा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे नियमित रूप से अपनी रचनाओं को प्रस्तुत कर सकें, साहित्य पर संवाद कर सकें और एक-दूसरे की रचनात्मक प्रतिभा से परिचित हो सकें।
उन्होंने घोषणा की कि अब प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को काव्य एवं साहित्य संगोष्ठी का नियमित आयोजन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य नगर की साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर गति देना, स्थानीय साहित्यकारों को प्रोत्साहित करना तथा विशेष रूप से नए एवं युवा रचनाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने, संवेदनाओं को जीवित रखने और सामाजिक चेतना को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है। नियमित साहित्यिक आयोजनों से रचनाकारों के बीच संवाद बढ़ेगा और अकलतरा में साहित्यिक वातावरण को नई पहचान मिलेगी।
साहित्यिक चेतना को नई दिशा देने वाला आयोजन
अकलतरा में आयोजित यह काव्य गोष्ठी केवल कविता पाठ तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने साहित्य, लोकभाषा, संस्कृति, संवेदना और सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर जोड़ने का कार्य किया। वरिष्ठ साहित्यकारों के अनुभव और युवा रचनाकारों की ऊर्जा के समन्वय ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
‘छत्तीसगढ़ लोकरंग लोक मानस हाना शब्दकोष’ का विमोचन और विभिन्न रचनाकारों की विविध विषयों पर प्रस्तुतियां इस बात का प्रमाण रहीं कि अकलतरा में साहित्य के प्रति रुचि और रचनात्मक चेतना आज भी जीवंत है। हर माह प्रथम रविवार को होने वाली साहित्यिक संगोष्ठी की घोषणा से साहित्य प्रेमियों में उत्साह का संचार हुआ है। निश्चित रूप से यह पहल नगर की साहित्यिक गतिविधियों को एक नई दिशा देने के साथ-साथ अकलतरा के साहित्यिक परिदृश्य को और अधिक समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।













