लायंस डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल की वार्षिक प्रदर्शनी ‘सृजन’ में दिखा ज्ञान, विज्ञान, कला, संस्कृति और नवाचार का अद्भुत संगम
विद्यार्थियों ने आकर्षक मॉडल, कार्यशील प्रतिकृतियों एवं रचनात्मक प्रस्तुतियों से दिखाई अपनी प्रतिभा, अभिभावकों एवं अतिथियों ने मुक्त कंठ से की सराहना
अकलतरा – लायंस डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, अकलतरा में 5 नवंबर को विद्यालय की वार्षिक शैक्षिक प्रदर्शनी ‘सृजन’ का आयोजन अत्यंत उत्साह, उमंग, गरिमा एवं भव्यता के साथ किया गया। ज्ञान, विज्ञान, कला, संस्कृति, साहित्य, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक नवाचारों को एक ही मंच पर समाहित करने वाली इस प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच का शानदार परिचय दिया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए आकर्षक मॉडल, कार्यशील प्रतिकृतियां, विषय आधारित परियोजनाएं, चार्ट एवं कलात्मक प्रस्तुतियां दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एसडीएम सुमित बघेल, विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने फीता काटकर प्रदर्शनी का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर नगर के अनेक गणमान्य नागरिक, अभिभावकगण एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। प्रदर्शनी का अवलोकन करने बड़ी संख्या में अभिभावक एवं नगरवासी पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों की बारीकी, विषयों की गहन समझ, प्रस्तुतीकरण की शैली तथा उनके पीछे छिपे परिश्रम की सराहना करते हुए बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
‘सृजन’ ने प्रस्तुत की पुस्तकीय ज्ञान से प्रयोगात्मक शिक्षा तक की प्रेरणादायक यात्रा –
वार्षिक प्रदर्शनी का शीर्षक ‘सृजन’ अपने आप में शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को अभिव्यक्त करता नजर आया। शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकों में दिए गए पाठों को याद करना नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान को कल्पनाशीलता, प्रयोग, अनुभव और नवाचार के माध्यम से व्यवहारिक जीवन में उतारना है। इसी विचार को केंद्र में रखकर विद्यार्थियों ने अपनी विषयगत समझ एवं रचनात्मक क्षमता को विभिन्न आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से साकार किया।
इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि विद्यालय के सभी विषयों एवं विभागों को एक साझा मंच पर शामिल किया गया। अंग्रेजी, हिंदी एवं संस्कृत, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य, कला एवं शिल्प, संगीत, शारीरिक शिक्षा तथा प्री-प्राइमरी विभाग के विद्यार्थियों ने अपने-अपने विषयों से संबंधित ऐसे मॉडल एवं परियोजनाएं प्रस्तुत कीं, जिनमें शिक्षा के साथ व्यावहारिक ज्ञान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक सोच का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
गणित विभाग ने सरल एवं रोचक मॉडलों से समझाए कठिन सिद्धांत
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गणित विभाग में विद्यार्थियों ने ज्यामितीय आकृतियों, त्रिविमीय संरचनाओं, गणितीय सूत्रों, क्षेत्रफल एवं आयतन तथा दैनिक जीवन में गणित के उपयोग से संबंधित आकर्षक मॉडल प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने गणित के कठिन माने जाने वाले सिद्धांतों को सरल, सहज एवं व्यावहारिक तरीके से समझाते हुए यह प्रदर्शित किया कि गणित केवल अंकों और सूत्रों का विषय नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने गणितीय अवधारणाओं को रोचक बनाकर प्रस्तुत किया।
विज्ञान विभाग में पर्यावरण संरक्षण एवं आधुनिक तकनीक का प्रभावशाली प्रदर्शन –
विज्ञान विभाग की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। जल चक्र, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, मानव शरीर के विभिन्न तंत्रों तथा वैज्ञानिक प्रक्रियाओं पर आधारित कार्यशील मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी वैज्ञानिक समझ और प्रयोगात्मक क्षमता का परिचय दिया।
विशेष रूप से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से संबंधित प्रस्तुतियों ने भविष्य की चुनौतियों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने बताया कि विज्ञान का वास्तविक महत्व तभी है, जब उसका उपयोग मानव जीवन को बेहतर बनाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में किया जाए।
सामाजिक विज्ञान विभाग ने इतिहास, संविधान और भारतीय विरासत को दिया जीवंत स्वरूप –
सामाजिक विज्ञान विभाग में भारतीय इतिहास, भूगोल, संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था, प्राकृतिक संसाधनों एवं भारतीय सांस्कृतिक विरासत पर आधारित मॉडल एवं परियोजनाएं प्रदर्शित की गईं। विद्यार्थियों ने भारत की ऐतिहासिक, भौगोलिक और सामाजिक विविधता को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया। इन मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने देश की गौरवशाली विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा सामाजिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जानकारियों को सरल भाषा में समझाया।
अंग्रेजी विभाग ने सतत विकास लक्ष्यों और जीव-जंतुओं से जोड़ा जीवन कौशल –
अंग्रेजी विभाग की प्रस्तुति पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और जीवन कौशल के अनूठे समन्वय के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र रही। विभाग द्वारा संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों को आकर्षक प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही पशु-पक्षियों एवं विभिन्न जीव-जंतुओं की विशेषताओं को जीवन कौशल के विकास से जोड़ते हुए एक रचनात्मक अवधारणा प्रदर्शित की गई।
विभाग के डिस्प्ले, खेल, पहेलियां, शब्दावली संबंधी गतिविधियां तथा व्याकरण आधारित रोचक खेल पशु-जगत की विविधता एवं विशेषताओं पर केंद्रित रहे। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि जीव-जंतु केवल प्रकृति का अभिन्न अंग ही नहीं हैं, बल्कि उनके व्यवहार, अनुशासन, सहयोग, अनुकूलन और जीवनशैली से मनुष्य भी अनेक महत्वपूर्ण बातें सीख सकता है। इस प्रकार अंग्रेजी विभाग ने भाषा शिक्षण को पर्यावरण जागरूकता, रचनात्मक अभिव्यक्ति एवं जीवनोपयोगी कौशलों के साथ जोड़कर अपनी विशिष्ट पहचान प्रस्तुत की।
हिंदी एवं संस्कृत विभाग का ‘कवि दरबार’ बना साहित्यिक आकर्षण –
हिंदी एवं संस्कृत विभाग की संयुक्त प्रदर्शनी साहित्य, भाषा और भारतीय संस्कृति का मनमोहक संगम रही। विभाग की विशेष प्रस्तुति आकर्षक ‘कवि दरबार’ रही, जिसमें हिंदी एवं संस्कृत साहित्य के महान कवियों, उनकी अमूल्य रचनाओं और साहित्यिक योगदान को जीवंत स्वरूप में प्रस्तुत किया गया।
इसके अतिरिक्त रस, अलंकार, संधि, समास, मुहावरे, लोकोक्तियां, शब्द रूप, धातु रूप, संस्कृत श्लोक, सुभाषित तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों को आकर्षक मॉडल एवं चार्ट के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। विद्यार्थियों ने भारतीय भाषाओं की समृद्ध साहित्यिक परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर मातृभाषा और संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित किया।
वाणिज्य विभाग ने आर्थिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों की दी व्यावहारिक जानकारी –
वाणिज्य विभाग में बैंकिंग व्यवस्था, मुद्रा प्रबंधन, बचत, निवेश, बजट निर्माण, लेखांकन एवं व्यापारिक गतिविधियों पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किए गए। इन मॉडलों के माध्यम से विद्यार्थियों ने बैंकिंग प्रणाली, आर्थिक प्रबंधन तथा व्यावसायिक गतिविधियों की कार्यप्रणाली को सरल तरीके से समझाया। प्रस्तुतियों ने विद्यार्थियों में वित्तीय साक्षरता एवं आर्थिक समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।
कला एवं शिल्प विभाग में दिखी बच्चों की अद्भुत कल्पनाशीलता –
कला एवं शिल्प विभाग में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा और कलात्मक अभिरुचि देखते ही बन रही थी। बेकार एवं अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी और सजावटी सामग्री का निर्माण, हस्तशिल्प, चित्रकला एवं विभिन्न कलात्मक प्रतिकृतियां दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि थोड़ी सी कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच से अनुपयोगी समझी जाने वाली वस्तुओं को भी उपयोगी स्वरूप दिया जा सकता है। इसने पुनः उपयोग, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की उपयोगिता को भी उजागर किया।
संगीत एवं शारीरिक शिक्षा विभाग ने कला और स्वस्थ जीवनशैली का दिया संदेश –
संगीत विभाग में भारतीय संगीत परंपरा एवं विभिन्न वाद्ययंत्रों से संबंधित प्रस्तुतियों ने प्रदर्शनी में सांस्कृतिक रंग भर दिए। विद्यार्थियों ने संगीत की विविध विधाओं एवं भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया।
वहीं शारीरिक शिक्षा विभाग में खेलों, योग, शारीरिक व्यायाम, फिटनेस, शारीरिक स्वास्थ्य एवं स्वस्थ जीवनशैली पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किए गए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को नियमित व्यायाम, योग एवं खेलों के महत्व से अवगत कराने के साथ स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन के विचार को प्रोत्साहित किया गया।
नन्हे-मुन्ने बच्चों की प्रस्तुतियों ने मोहा सबका मन –
प्री-प्राइमरी विभाग के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां भी प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण रहीं। रंगों, आकारों, फलों, सब्जियों, पशु-पक्षियों, यातायात एवं पर्यावरण से संबंधित आकर्षक मॉडल एवं गतिविधियों के माध्यम से छोटे बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता, सीखने की उत्सुकता और मासूम रचनात्मकता का परिचय दिया। नन्हे विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को देखकर अभिभावकों एवं अतिथियों के चेहरे पर विशेष प्रसन्नता दिखाई दी। इन गतिविधियों ने यह स्पष्ट किया कि बच्चों में सीखने और सृजन करने की क्षमता का विकास प्रारंभिक शिक्षा से ही किया जा सकता है।
भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत की मनमोहक झांकियों ने खींचा दर्शकों का ध्यान –
प्रदर्शनी का एक अन्य प्रमुख आकर्षण भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत पर आधारित भव्य प्रस्तुतियां रहीं। महालक्ष्मी, मां सरस्वती एवं भगवान गणेश का सुंदर दरबार, भाई दूज के पर्व का जीवंत दृश्य तथा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण करने की मनमोहक झांकी ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
इन प्रस्तुतियों में भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की सुंदर झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से भारतीय पर्वों, धार्मिक मान्यताओं एवं आध्यात्मिक मूल्यों को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया।
इसके साथ ही डी.ए.वी. संस्था की गौरवशाली परंपरा और शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान देने वाली महान विभूतियों महात्मा हंसराज एवं स्वामी दयानंद सरस्वती सहित अन्य प्रेरणास्रोतों के जीवन, विचारों और योगदान को भी विशेष स्थान दिया गया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में महान व्यक्तित्वों के योगदान से परिचित कराया गया।
विद्यालय प्रबंधन ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की –
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता, विषयों के प्रति उनकी समझ एवं शिक्षकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की शैक्षिक प्रदर्शनियां विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करती हैं। पुस्तकीय ज्ञान के साथ प्रयोगात्मक एवं व्यवहारिक शिक्षा का समन्वय बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विद्यालय के मैनेजर सी.एम. पांडेय ने वार्षिक प्रदर्शनी के सफल आयोजन पर समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के समर्पण, परिश्रम और रचनात्मक योगदान की प्रशंसा करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का हुआ समापन –
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती सीमा देवनाथ ने अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि, विद्यालय अध्यक्ष, गणमान्य नागरिकों एवं उपस्थित अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति, अभिभावकों का उत्साहपूर्ण सहयोग तथा शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं विद्यार्थियों के अथक परिश्रम, समर्पण और सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।
उन्होंने प्रदर्शनी की तैयारियों में जुटे सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के योगदान की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार शैक्षिक एवं रचनात्मक गतिविधियों के आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।
‘सृजन’ ने साबित किया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ज्ञान को व्यवहार में उतारना है –
निश्चित रूप से लायंस डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल की वार्षिक शैक्षिक प्रदर्शनी ‘सृजन’ केवल एक सामान्य प्रदर्शनी नहीं रही, बल्कि यह विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, परिश्रम, प्रयोगात्मक ज्ञान, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं नवाचार की सामूहिक अभिव्यक्ति बनकर सामने आई। विद्यार्थियों ने अपने-अपने मॉडलों की कार्यप्रणाली, उपयोगिता एवं विशेषताओं को आत्मविश्वास के साथ समझाते हुए अपनी तार्किक क्षमता, टीम भावना और प्रस्तुतीकरण कौशल का उत्कृष्ट परिचय दिया।
इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि वास्तविक शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि जब ज्ञान को अनुभव, प्रयोग, कला, संस्कृति और नवाचार से जोड़ा जाता है, तभी उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मविश्वास विकसित करने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करती हैं।
विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता, शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन, विद्यार्थियों की प्रतिभा, अभिभावकों के सहयोग और विद्यालय परिवार की सामूहिक प्रतिबद्धता का यह आयोजन उत्कृष्ट उदाहरण बना। ‘सृजन’ के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह सिद्ध कर दिया कि उनके भीतर प्रतिभा और कल्पनाशीलता की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता है तो बस उसे उचित मंच, मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करने की।
ज्ञान से कल्पना और कल्पना से नवाचार तक की इस प्रेरणादायक यात्रा ने लायंस डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, अकलतरा की शैक्षिक एवं रचनात्मक गतिविधियों को एक नई पहचान प्रदान की।
