अकलतरा में निःशुल्क योग शिविर सम्पन्न, योगाभ्यास से प्रतिभागियों ने अनुभव की मानसिक शांति और आंतरिक आनंद
योगाचार्य रामेन्द्र सिंह चौहान ने कहा—योग भारत की प्राचीन धरोहर, स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए इसे दैनिक दिनचर्या में शामिल करना आवश्यक
अकलतरा -वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, बढ़ती व्यस्तता और मानसिक तनाव के बीच शरीर को स्वस्थ रखने तथा मन को शांत बनाए रखने में योग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। भारतीय संस्कृति की प्राचीन योग परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने और नागरिकों को नियमित योगाभ्यास के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से अकलतरा नगर में योग मित्र मंडल एवं योग साधना केंद्र के तत्वावधान में छह दिवसीय निःशुल्क योग शिविर का आयोजन किया गया। 12 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक बगड़िया भवन में आयोजित इस शिविर में प्रतिभागियों को सरल योगासन, मंत्र जाप, प्राणायाम, ध्यान एवं योग निद्रा का प्रशिक्षण दिया गया। शिविर में शामिल प्रतिभागियों ने योगाभ्यास के दौरान अद्भुत आनंद, मानसिक शांति और आंतरिक सुकून का अनुभव होने की बात कही।
इस शिविर का संचालन बिहार योग विद्यालय, मुंगेर से प्रशिक्षित तथा योग साधना के क्षेत्र में चार दशकों का अनुभव रखने वाले कर्म संन्यासी धर्मकीर्ति (रामेन्द्र सिंह चौहान) ने किया। सीमित अवधि के इस विशेष शिविर में 15 प्रतिभागियों ने निःशुल्क योग प्रशिक्षण का लाभ उठाया। छह दिनों तक चले इस आयोजन में योग के विभिन्न अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति के महत्व से परिचित कराया गया।
सरल योगासन, प्राणायाम और ध्यान से परिचित हुए प्रतिभागी-
बगड़िया भवन में आयोजित योग शिविर में प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में आसानी से अपनाए जा सकने वाले सरल योगासनों का अभ्यास कराया गया। इसके साथ मंत्र जाप, प्राणायाम, ध्यान और योग निद्रा जैसी विधियों को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया, ताकि प्रतिभागी योग को केवल शारीरिक व्यायाम के रूप में नहीं, बल्कि शरीर, मन और श्वास के बीच संतुलन स्थापित करने वाली समग्र जीवन पद्धति के रूप में समझ सकें।
योगाभ्यास के दौरान श्वास पर नियंत्रण, मन को एकाग्र करने, शरीर को सहज रखने और तनावपूर्ण परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया गया। ध्यान एवं योग निद्रा के अभ्यासों ने प्रतिभागियों को विश्राम और आत्मचिंतन के लिए समय निकालने की प्रेरणा दी।
शिविर में शामिल प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि योगाभ्यास से उन्हें आनंद और मानसिक शांति का अनुभव हुआ। ऐसे शिविर लोगों को अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने तथा स्वयं के लिए समय निकालने का अवसर प्रदान करते हैं।
चार दशकों के अनुभव से मिला योग प्रशिक्षण का लाभ –
शिविर के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले कर्म संन्यासी धर्मकीर्ति (रामेन्द्र सिंह चौहान) बिहार योग विद्यालय, मुंगेर से प्रशिक्षित हैं और उन्हें योग साधना के क्षेत्र में लगभग 40 वर्षों का अनुभव है। उनके मार्गदर्शन में आयोजित शिविर का उद्देश्य प्रतिभागियों को योग की मूलभूत विधियों से परिचित कराना तथा उन्हें नियमित अभ्यास के लिए प्रेरित करना रहा।
योग प्रशिक्षण के दौरान सरल और सहज अभ्यासों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे प्रतिभागी योग की विभिन्न विधियों को समझ सकें और उन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित हों। योग का नियमित अभ्यास शरीर को सक्रिय रखने, श्वास संबंधी जागरूकता बढ़ाने, एकाग्रता विकसित करने तथा तनाव प्रबंधन में सहायक हो सकता है।
शिविर में योग के व्यावहारिक पक्ष को प्रमुखता दी गई। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि योग के लाभ प्राप्त करने के लिए नियमितता, धैर्य और सही तरीके से अभ्यास करना आवश्यक है।
समापन अवसर पर योगाचार्य रामेन्द्र सिंह चौहान ने बताया योग का महत्व-
छह दिवसीय शिविर के समापन अवसर पर योग साधना केंद्र के संस्थापक एवं योगाचार्य रामेन्द्र सिंह चौहान ने योग के महत्व, उसकी प्राचीन परंपरा और वर्तमान जीवन में उसकी उपयोगिता के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की।
उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन पद्धति और गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे आज संपूर्ण विश्व अपना रहा है। योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, मानसिक संतुलन और सकारात्मकता विकसित करने का भी महत्वपूर्ण साधन है।
उन्होंने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग अपने कार्यों और जिम्मेदारियों के बीच स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते। ऐसे में नियमित योगाभ्यास के लिए कुछ समय निर्धारित करना आवश्यक है। योग को दैनिक जीवनचर्या में शामिल करके व्यक्ति अपने शरीर को सक्रिय और स्वस्थ रखने के साथ मन को शांत रखने की दिशा में भी प्रयास कर सकता है।
योगाचार्य चौहान ने प्रतिभागियों को प्रेरित करते हुए कहा कि योग को केवल शिविर या किसी विशेष अवसर तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे जीवन का नियमित हिस्सा बनाना चाहिए। प्रतिदिन अपनी क्षमता के अनुरूप योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करने से स्वस्थ जीवनशैली विकसित करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। योग के माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर और मन के प्रति सजग बनता है तथा जीवन में संतुलन स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ता है।
योग भारत की प्राचीन धरोहर, विश्व में बढ़ रही स्वीकार्यता-
भारत की योग परंपरा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही योग को शारीरिक अनुशासन, मानसिक एकाग्रता और आत्मिक विकास की महत्वपूर्ण विधि माना जाता रहा है। आधुनिक जीवन में भी योग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। आज अनेक देशों में लोग स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और बेहतर जीवनशैली के लिए योग का अभ्यास कर रहे हैं।
योग की विशेषता यह है कि इसकी अनेक सरल विधियों को व्यक्ति अपनी क्षमता, उम्र और दैनिक दिनचर्या के अनुरूप अपना सकता है। हालांकि, योगाभ्यास के दौरान सही तकनीक, नियमितता और व्यक्तिगत स्वास्थ्य परिस्थितियों का ध्यान रखना आवश्यक है।
अकलतरा में आयोजित इस शिविर ने स्थानीय नागरिकों को योग की प्राचीन परंपरा से जोड़ने के साथ यह संदेश दिया कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता किसी बड़े संसाधन की मोहताज नहीं है। सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास के संकल्प से स्वस्थ जीवनशैली की दिशा में सार्थक पहल की जा सकती है।
15 प्रतिभागियों ने लिया निःशुल्क शिविर का लाभ-
योग मित्र मंडल एवं योग साधना केंद्र के इस छह दिवसीय शिविर में कुल 15 प्रतिभागियों ने निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त किया। शिविर में चन्द्रशेखर बगड़िया, महेश बनाफर, सुधीर केडिया, संतोष केडिया, सी. एल. शर्मा, रमेश सोनी, पंकज भारती, गोपीचंद सावलानी, श्रीमती सावलानी, जयकुमार अग्रवाल, मनोज जैन, वीरेंद्र जैन एवं विक्रम सिंह सहित अन्य प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सीमित संख्या में प्रतिभागियों के साथ आयोजित इस शिविर में योग की विभिन्न विधियों के अभ्यास और उनके महत्व को समझने पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों की सहभागिता ने यह दर्शाया कि नगर में योग एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में ऐसे प्रयास उपयोगी साबित हो सकते हैं।
योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाने का दिया संदेश –
योग मित्र मंडल एवं योग साधना केंद्र के तत्वावधान में आयोजित यह निःशुल्क शिविर योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा। छह दिनों तक चले प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को योगासन, मंत्र जाप, प्राणायाम, ध्यान और योग निद्रा के अभ्यासों से परिचित कराया गया। समापन अवसर पर योगाचार्य रामेन्द्र सिंह चौहान ने योग के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी को इसे नियमित जीवनचर्या में शामिल करने के लिए प्रेरित किया।
शिविर का मूल संदेश यही रहा कि स्वस्थ जीवन के लिए शरीर के साथ मन की देखभाल भी आवश्यक है। नियमित योगाभ्यास, संतुलित दिनचर्या और स्वास्थ्य के प्रति सजगता व्यक्ति के जीवन को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकती है।
अकलतरा में योग मित्र मंडल एवं योग साधना केंद्र की यह पहल नगरवासियों को भारतीय योग परंपरा से जोड़ने तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करने वाली सराहनीय गतिविधि के रूप में सामने आई।
