न्याय और शिक्षा से मिलेगी बेटियों को नई उड़ान -श्रीमती शिवानी सिंह
कोटमी सोनार में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत विधिक जागरूकता, कैरियर मार्गदर्शन एवं काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित
बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों, बाल विवाह निषेध अधिनियम, निःशुल्क विधिक सहायता एवं साइबर अपराधों से बचाव की दी गई जानकारी
अकलतरा – बेटियां किसी भी समाज की प्रगति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं। जब बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण, अपने अधिकारों की जानकारी और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलते हैं, तभी एक सशक्त एवं जागरूक समाज का निर्माण संभव होता है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जांजगीर-चांपा के मार्गदर्शन में तालुका विधिक सेवा समिति अकलतरा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग अकलतरा के संयुक्त तत्वावधान में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के अंतर्गत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोटमी सोनार में विधिक जागरूकता, कैरियर मार्गदर्शन एवं काउंसलिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों, शिक्षा के महत्व, बाल विवाह की रोकथाम, निःशुल्क कानूनी सहायता, बाल संरक्षण से संबंधित योजनाओं तथा वर्तमान समय में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही छात्राओं को अपने भविष्य के प्रति गंभीर रहने, अपनी रुचि एवं क्षमताओं को पहचानने तथा शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं में उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता विकसित करना, उन्हें राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना तथा शिक्षा और कैरियर के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से परिचित कराना था।
बेटियों को शिक्षा और सुरक्षा के समान अवसर देना हमारा दायित्व : श्रीमती शिवानी सिंह –
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं अध्यक्ष, तालुका विधिक सेवा समिति अकलतरा श्रीमती शिवानी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बेटियां समाज का आधार हैं। उन्हें शिक्षा और सुरक्षा के समान अवसर प्रदान करना हम सभी का कानूनी एवं नैतिक दायित्व है। बेटियों को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक है कि उन्हें न केवल शिक्षित किया जाए, बल्कि उनके अधिकारों के प्रति भी जागरूक बनाया जाए, ताकि वे किसी भी परिस्थिति में अपने अधिकारों को समझ सकें और अन्याय के विरुद्ध उचित कदम उठा सकें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा बालिकाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम है। जागरूकता के अभाव में कई बार बालिकाएं अपने कानूनी अधिकारों तथा उन्हें मिलने वाली सहायता से वंचित रह जाती हैं। ऐसे में विद्यालय स्तर पर विधिक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्राओं को कानून की जानकारी मिलने के साथ ही अपनी समस्याओं के समाधान के लिए उपलब्ध संस्थागत सहायता के बारे में भी पता चलता है।
श्रीमती सिंह ने छात्राओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अपने लक्ष्य निर्धारित करें, नियमित रूप से अध्ययन करें और अपने भविष्य के निर्माण के लिए उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाएं। समाज में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए परिवार, विद्यालय और प्रशासन की सामूहिक भूमिका आवश्यक है।
नालसा की योजनाओं एवं निःशुल्क कानूनी सहायता की दी जानकारी-
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती शिवानी सिंह ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की विभिन्न योजनाओं के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों के लिए बाल-अनुकूल कानूनी सहायता योजना, 2024 के बारे में बताया तथा समझाया कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए विधिक सेवा संस्थाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39-क (39A) के अंतर्गत समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता की संवैधानिक व्यवस्था के संबंध में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्थिक या अन्य कठिनाइयों के कारण किसी भी व्यक्ति को न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित नहीं रहना चाहिए। पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण की व्यवस्था की गई है।
छात्राओं को यह भी समझाया गया कि यदि उन्हें अपने अधिकारों के संरक्षण, किसी प्रकार के शोषण या अन्य कानूनी समस्या के संबंध में सहायता की आवश्यकता हो, तो वे संबंधित विधिक सेवा संस्थाओं से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकती हैं। इस जानकारी का उद्देश्य बालिकाओं में कानून के प्रति विश्वास बढ़ाना तथा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग बनाना था।
बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रति किया जागरूक-
कार्यक्रम में बाल विवाह निषेध अधिनियम के संबंध में भी विस्तार से जानकारी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि बाल विवाह बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत विकास और भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं के सामने अनेक सामाजिक एवं शैक्षणिक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
इसलिए बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने के लिए जागरूकता आवश्यक है। बालिकाओं को अपनी शिक्षा पूरी करने, अपने भविष्य के लिए निर्णय लेने तथा किसी भी दबावपूर्ण परिस्थिति में उचित सहायता प्राप्त करने के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बेटियों को कम उम्र में विवाह के बंधन में बांधने के बजाय उन्हें शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। जागरूक परिवार और शिक्षित समाज ही बाल विवाह जैसी कुरीतियों के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
शिक्षा का अधिकार और कैरियर निर्माण पर दिया जोर–
छात्राओं को शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के संबंध में जानकारी देते हुए शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि शिक्षा केवल विद्यालय की पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अपने अधिकारों को समझने, सही निर्णय लेने और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए सक्षम बनाती है।
कैरियर मार्गदर्शन के माध्यम से छात्राओं को अपने भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा अपनी रुचि, योग्यता और क्षमता के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें बताया गया कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर अध्ययन के माध्यम से वे शिक्षा, प्रशासन, चिकित्सा, कानून, विज्ञान, तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपना भविष्य बना सकती हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं के मन में भविष्य को लेकर उत्पन्न होने वाली आशंकाओं को दूर करना तथा उन्हें उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक बनाना भी था। बालिकाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और किसी भी परिस्थिति में अपनी शिक्षा को महत्व देने का संदेश दिया गया।
मोटर व्हीकल एक्ट एवं साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी —
वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए कार्यक्रम में साइबर अपराधों के कारणों और उनसे बचाव के उपायों पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। छात्राओं को इंटरनेट, सोशल मीडिया और मोबाइल फोन का सावधानीपूर्वक उपयोग करने तथा अपनी व्यक्तिगत जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई।
उन्हें बताया गया कि अनजान लिंक पर क्लिक करना, संदिग्ध संदेशों पर विश्वास करना, ओटीपी अथवा बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा करना और सोशल मीडिया पर अपरिचित लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी, धमकी, उत्पीड़न या संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर घबराने के बजाय अभिभावकों, शिक्षकों अथवा संबंधित अधिकारियों से सहायता लेनी चाहिए।
इसके साथ ही मोटर व्हीकल एक्ट के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई। सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों के पालन और वाहन चलाते समय आवश्यक सावधानियों के महत्व को समझाया गया। छात्राओं को जागरूक नागरिक बनने तथा स्वयं यातायात नियमों का पालन करने के साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी किया मार्गदर्शन-
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग अकलतरा की सुपरवाइजर श्रीमती जास्मीन निराला तथा सखी वन स्टॉप सेंटर, जांजगीर की केंद्र प्रशासक एवं परामर्शदाता ने भी छात्राओं का मार्गदर्शन किया।
उन्होंने बालिकाओं की सुरक्षा, उनके अधिकारों, आवश्यक परामर्श तथा कठिन परिस्थितियों में उपलब्ध सहायता के महत्व पर जानकारी दी। छात्राओं को यह संदेश दिया गया कि किसी भी समस्या का सामना करने पर उसे छिपाने या अकेले सहने के बजाय विश्वसनीय व्यक्ति अथवा संबंधित सहायता केंद्र से संपर्क करना चाहिए।
महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों के संरक्षण के लिए संचालित व्यवस्थाओं की जानकारी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती है। इससे बालिकाओं में जागरूकता बढ़ने के साथ ही जरूरत पड़ने पर सहायता प्राप्त करने का आत्मविश्वास भी विकसित होता है।
जागरूकता कार्यक्रम से मजबूत होगा बालिकाओं का आत्मविश्वास-
कोटमी सोनार उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम बालिकाओं को कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के साथ उनके शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। विधिक जागरूकता, कैरियर मार्गदर्शन और काउंसलिंग को एक साथ जोड़कर आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्राओं को शिक्षा, सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और भविष्य निर्माण के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया।
कार्यक्रम का मंच संचालन पैरालीगल वॉलंटियर (पीएलवी) गजानंद प्रसाद कश्यप ने किया।
इस अवसर पर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोटमी सोनार के प्राचार्य संजय चंद्रशेखर, पीएलवी डालेश्वर प्रसाद पटेल, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा विद्यालय की छात्राएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के माध्यम से यह प्रेरक संदेश दिया गया कि न्याय की जानकारी, शिक्षा का अवसर और सुरक्षित वातावरण बेटियों को सशक्त बनाने के तीन महत्वपूर्ण आधार हैं। जब बालिकाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होंगी और अपने भविष्य के प्रति आत्मविश्वास से आगे बढ़ेंगी, तभी ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का उद्देश्य वास्तविक रूप से साकार हो सकेगा।
