जाति जनगणना में वैज्ञानिकता, प्रमाणिकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग
जिला कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग ने कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन, ओबीसी की स्पष्ट गणना और प्रत्येक जाति के लिए विशिष्ट वैज्ञानिक कोड की उठाई मांग
जांजगीर-चांपा – जाति जनगणना की प्रक्रिया को वैज्ञानिक, प्रमाणिक, पारदर्शी एवं भविष्य में नीति निर्माण के लिए उपयोगी बनाने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग द्वारा कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में विशेष रूप से ओबीसी वर्ग की स्पष्ट एवं व्यवस्थित गणना, देशभर में मानकीकृत जाति सूची, प्रत्येक जाति एवं समुदाय के लिए विशिष्ट वैज्ञानिक कोड तथा जातियों के वैज्ञानिक वर्गीकरण की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने की मांग रखी गई।
ज्ञापन में कहा गया कि भारत सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता वाला देश है। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में एक ही जाति अथवा समुदाय के लिए स्थानीय नाम, पर्यायवाची नाम, अलग-अलग उच्चारण एवं वर्तनी प्रचलित हैं। ऐसी स्थिति में यदि जातियों की पहचान एवं गणना के लिए एक समान और वैज्ञानिक प्रणाली नहीं अपनाई गई तो भविष्य में आंकड़ों में भ्रम, दोहराव तथा विसंगतियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जाति जनगणना में शुरुआत से ही स्पष्ट एवं मानकीकृत प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
मानकीकृत जाति सूची और वैज्ञानिक कोड की मांग – 
जिला कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग ने मांग की कि जाति जनगणना के लिए देशभर में एक स्पष्ट, अद्यतन एवं मानकीकृत जाति सूची तैयार की जाए। प्रत्येक जाति एवं समुदाय को विशिष्ट वैज्ञानिक कोड प्रदान किया जाए, ताकि किसी जाति के अलग-अलग क्षेत्रीय नामों के कारण उसकी गणना अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज न हो।
ज्ञापन में कहा गया कि एक ही समुदाय के अलग-अलग नामों को वैज्ञानिक तरीके से मैप करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे समान जाति या समुदाय की अलग-अलग नामों से होने वाली संभावित पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा और जनगणना के बाद प्राप्त आंकड़ों का तुलनात्मक एवं वैज्ञानिक विश्लेषण करना अधिक व्यवस्थित होगा।
ज्ञापन में रखी गई यह मांग देशभर में चल रही जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस के हालिया अभियानों में उठाए जा रहे मुद्दों से भी मेल खाती है। विभिन्न राज्यों में कांग्रेस के ओबीसी विभाग द्वारा स्पष्ट ओबीसी श्रेणी, वैज्ञानिक कोड, राज्यवार मानकीकृत जाति मास्टर लिस्ट और सूचीबद्ध विकल्पों की व्यवस्था की मांग को लेकर ज्ञापन दिए गए हैं।
ओबीसी की स्पष्ट गणना पर विशेष जोर –
ज्ञापन में ओबीसी वर्ग की गणना को विशेष रूप से स्पष्ट एवं व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने की मांग की गई। विभाग का कहना है कि सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक स्थिति से जुड़े प्रमाणिक आंकड़े उपलब्ध होने पर ही विभिन्न वर्गों की वास्तविक स्थिति का अध्ययन किया जा सकेगा और आवश्यकता के अनुरूप योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण में आंकड़ों का उपयोग किया जा सकेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर ओबीसी से संबंधित सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़े वर्गों के हितों और संवैधानिक सुरक्षा उपायों से जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की भी संवैधानिक भूमिका है। आयोग को सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के विकास तथा उनके लिए उपलब्ध संवैधानिक सुरक्षा उपायों की निगरानी एवं मूल्यांकन से संबंधित दायित्व सौंपे गए ।
‘सही आंकड़े होंगे तो सही नीति बनेगी –
जिला कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग ग्रामीण जिला अध्यक्ष भविष्य चंद्राकर ने कहा कि जाति जनगणना केवल संख्या गिनने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे देश की सामाजिक वास्तविकताओं को समझने का वैज्ञानिक आधार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंकड़ों का संकलन आधुनिक तकनीक, स्पष्ट मानकों और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इन आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल न उठे।
उन्होंने कहा कि एक ही जाति के अलग-अलग क्षेत्रीय एवं पर्यायवाची नामों की पहचान कर उन्हें एक वैज्ञानिक प्रणाली के तहत जोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए विशेषज्ञों की सलाह तथा आवश्यक वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जानी चाहिए।
आंकड़ों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर –
ज्ञापन में जाति जनगणना से प्राप्त आंकड़ों को भविष्य में शिक्षा, रोजगार, सामाजिक एवं आर्थिक विकास, सरकारी योजनाओं तथा नीति निर्माण के लिए प्रमाणिक आधार के रूप में उपयोगी बनाने की मांग की गई। इसके लिए आंकड़ों की गुणवत्ता, पारदर्शिता, विश्वसनीयता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।
विभाग ने कहा कि यदि जातियों की पहचान एवं वर्गीकरण के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं होगी तो अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित नामों के कारण आंकड़े अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज हो सकते हैं। इसलिए जनगणना प्रक्रिया में ही ऐसे तकनीकी प्रावधान किए जाने चाहिए, जिससे समान जाति अथवा समुदाय की पहचान एकरूपता के साथ हो सके।
केंद्र सरकार से संबंधित आधिकारिक जानकारी के अनुसार जनगणना-2027 के साथ जातियों की गणना किए जाने का निर्णय लिया गया है और जनगणना के प्रश्नों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद अधिसूचित किया जाना है। गृह मंत्रालय ने लोकसभा में यह भी बताया था कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की गणना उनकी अधिसूचित सूचियों के अनुसार की जाती है।
शहर अध्यक्ष ने कहा—विश्वसनीय आंकड़े सामाजिक नीति का आधार –
जिला कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग शहर अध्यक्ष लोकेश राठौर ने कहा कि सही आंकड़े ही प्रभावी नीति की मजबूत नींव होते हैं। इसलिए जाति जनगणना की पूरी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे प्राप्त आंकड़े भविष्य में सामाजिक न्याय, समान अवसर और जनकल्याणकारी योजनाओं के निर्माण में विश्वसनीय आधार बन सकें।
उन्होंने कहा कि जातियों की पहचान के लिए वैज्ञानिक कोड, मानकीकृत सूची एवं स्पष्ट वर्गीकरण की व्यवस्था होने से आंकड़ों को व्यवस्थित रूप से संकलित एवं विश्लेषित करने में सुविधा होगी।
राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि जाति जनगणना की प्रक्रिया में ओबीसी सहित सभी सामाजिक वर्गों की वास्तविक स्थिति का प्रमाणिक आंकड़ा सामने लाने के लिए आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही मानकीकृत जाति सूची, विशिष्ट वैज्ञानिक कोडिंग, क्षेत्रीय एवं पर्यायवाची नामों की मैपिंग तथा वैज्ञानिक वर्गीकरण को जनगणना प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए।
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने जाति जनगणना से संबंधित इन मांगों को ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति तक पहुंचाने की बात कही।
ये रहे उपस्थित –
ज्ञापन सौंपने के दौरान जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, रामकुमार पटेल, संदीप यादव, ललित नायक, नगर कांग्रेस कमेटी अकलतरा अध्यक्ष महेश्वर टंडन, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अकलतरा अध्यक्ष जितेंद्र वर्मा, दीक्षांत चंद्राकर, फागुराम केंवट, रमेश पटेल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
