जेएसडब्ल्यू महानदी पावर प्लांट के भूविस्थापित पेंशनधारियों की बैठक संपन्न, दिवाली बोनस से लेकर आजीवन पेंशन तक उठे अहम मुद्दे
राजगीत गाकर मनाया छत्तीसगढ़ राज्योत्सव, स्वास्थ्य बीमा, एंबुलेंस सुविधा, बच्चों को रोजगार और शिक्षा शुल्क में छूट की मांग; 2 नवंबर को प्लांट गेट पर जुटेंगे पेंशनधारी
अकलतरा – जेएसडब्ल्यू महानदी पावर प्लांट नरियरा से प्रभावित आठ ग्रामों के भूविस्थापित परिवारों के जीवन निर्वाह, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर जीवन निर्वाह भत्ता समिति (पेंशन) की मासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में भूविस्थापित पेंशनधारियों की विभिन्न समस्याओं, लंबित मांगों और कंपनी प्रबंधन से अपेक्षित सुविधाओं को लेकर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। बैठक की शुरुआत छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर राजगीत के सामूहिक गायन के साथ हुई। इस दौरान उपस्थित सदस्यों ने राज्योत्सव मनाते हुए प्रदेश की संस्कृति, अस्मिता और गौरव को याद किया।
बैठक में मुख्य रूप से कंपनी द्वारा दीपावली पर बोनस नहीं दिए जाने, भूविस्थापित परिवारों के स्वास्थ्य बीमा, आजीवन पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं की पुनर्बहाली, पेंशनधारियों के बेरोजगार बच्चों को रोजगार उपलब्ध कराने तथा शिक्षा शुल्क सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर सदस्यों ने अपनी बात रखी। बैठक में इन मांगों को कंपनी प्रबंधन के समक्ष प्रमुखता से रखने और उनके निराकरण के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने पर सहमति बनी।
दीपावली बोनस नहीं मिलने पर पेंशनधारियों में नाराजगी, प्लांट पहुंचकर रखेंगे अपनी बात –
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा दीपावली के अवसर पर कंपनी द्वारा भूविस्थापित पेंशनधारियों को बोनस प्रदान नहीं किए जाने का रहा। सदस्यों ने इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि दीपावली जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर बोनस मिलने की अपेक्षा थी, लेकिन कंपनी की ओर से बोनस नहीं दिया गया। इसे लेकर पेंशनधारियों ने अपनी असहमति व्यक्त की।
इस विषय को लेकर 2 नवंबर को अधिक से अधिक संख्या में पेंशनधारियों के प्लांट पहुंचने और कंपनी के अधिकारियों के समक्ष अपनी मांग रखने पर सहमति बनी। समिति का मानना है कि सामूहिक रूप से अपनी बात रखने से लंबे समय से लंबित विषयों के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल हो सकती है।
भूविस्थापित परिवारों के स्वास्थ्य बीमा की उठी पुरजोर मांग –
बैठक में दूसरा महत्वपूर्ण विषय भूविस्थापित किसानों एवं उनके आश्रित परिवारों के लिए परिवार स्वास्थ्य बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने का रहा। सदस्यों ने कहा कि प्लांट स्थापना के लिए अपनी जमीन देने वाले भूविस्थापित परिवारों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। ऐसे में कंपनी द्वारा सभी पात्र भूविस्थापित परिवारों का स्वास्थ्य बीमा कराया जाना चाहिए, जिससे परिवार के किसी सदस्य के बीमार होने अथवा आकस्मिक चिकित्सा आवश्यकता के समय उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
समिति के सदस्यों ने इस मांग को लंबे समय से लंबित बताते हुए कंपनी प्रबंधन से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई।
अस्थायी नहीं, आजीवन मिले जीवन निर्वाह भत्ता –
बैठक में जीवन निर्वाह भत्ते को आजीवन जारी रखने की मांग पर भी गंभीरता से चर्चा हुई। सदस्यों का कहना था कि भूविस्थापित परिवारों ने प्लांट स्थापना के लिए अपनी भूमि दी है और उनके जीवन निर्वाह से जुड़ी यह सुविधा उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए जीवन निर्वाह भत्ते को निश्चित अवधि तक सीमित रखने के बजाय आजीवन जारी रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
इस विषय पर उपस्थित सदस्यों ने एकजुट होकर कंपनी प्रबंधन के समक्ष अपनी मांग रखने और इसके स्थायी समाधान के लिए पहल करने का निर्णय लिया।
आठों आश्रित ग्रामों में पुनः शुरू हो स्वास्थ्य शिविर और एंबुलेंस सुविधा –
बैठक में ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। सदस्यों ने बताया कि पूर्व में कंपनी द्वारा प्लांट से प्रभावित सभी आठ आश्रित ग्रामों में डॉक्टर एवं एंबुलेंस की सुविधा के साथ स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते थे। इन शिविरों में ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ आवश्यक दवाइयों का वितरण भी किया जाता था।
लेकिन किसी कारणवश यह सुविधा वर्तमान में बाधित हो गई है। समिति के सदस्यों ने मांग की कि पूर्व की तरह सभी आठों आश्रित ग्रामों में नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएं तथा डॉक्टर, एंबुलेंस और आवश्यक दवाइयों सहित संपूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पुनः प्रारंभ की जाएं। ग्रामीणों के स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से इस व्यवस्था को अत्यंत आवश्यक बताया गया।
भूविस्थापितों के बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने की मांग –
बैठक में भूविस्थापित परिवारों के बच्चों की शिक्षा से संबंधित विषय पर भी चर्चा हुई। सदस्यों ने बताया कि कंपनी द्वारा निर्धारित स्कूलों में अध्ययनरत भूविस्थापित परिवारों के बच्चों की फीस का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन ऐसे अनेक बच्चे हैं जो अन्य विद्यालयों में अध्ययनरत हैं।
समिति ने मांग की कि कंपनी द्वारा निर्धारित विद्यालयों के साथ-साथ अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले भूविस्थापित परिवारों के बच्चों की फीस की व्यवस्था भी कंपनी द्वारा की जाए, ताकि विद्यालय के चयन के आधार पर बच्चों की शिक्षा संबंधी सहायता में अंतर न रहे और सभी पात्र बच्चों को समान शैक्षणिक अवसर मिल सकें।
पेंशनधारियों के बेरोजगार बच्चों को रोजगार देने का विषय भी उठा- –
बैठक में पेंशनधारी परिवारों के बेरोजगार बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। सदस्यों ने कहा कि भूविस्थापित परिवारों की नई पीढ़ी को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। कंपनी में उपलब्ध रिक्तियों एवं आवश्यकतानुसार योग्य बेरोजगार बच्चों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग प्रबंधन के समक्ष रखी जाएगी।
इसके अतिरिक्त बैठक में कई पेंशनधारियों के नॉमिनी परिवर्तन, पति-पत्नी के अलग-अलग कार्ड होने की स्थिति में दोनों को पृथक-पृथक पेंशन दिए जाने सहित अन्य तकनीकी एवं व्यक्तिगत समस्याओं पर भी चर्चा की गई। सदस्यों ने निर्णय लिया कि इन सभी समस्याओं को सूचीबद्ध कर आगामी समय में कंपनी प्रबंधन को अवगत कराया जाएगा, ताकि पात्र हितग्राहियों को उनकी सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सके।
2 नवंबर को प्लांट गेट पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील –
बैठक में समिति के पदाधिकारियों ने सभी भूविस्थापित पेंशनधारियों से सोमवार 2 नवंबर को सुबह 11 बजे जेएसडब्ल्यू महानदी पावर कंपनी लिमिटेड के मुख्य द्वार पर अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील की है।
इस दौरान स्वास्थ्य बीमा, दीपावली बोनस, आजीवन पेंशन, आठों आश्रित ग्रामों में स्वास्थ्य शिविर एवं एंबुलेंस सुविधा की पुनर्बहाली, पेंशनधारियों के बेरोजगार बच्चों को रोजगार तथा अन्य लंबित मांगों को लेकर कंपनी के अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। समिति का प्रयास रहेगा कि सभी विषयों पर सकारात्मक बातचीत हो और भूविस्थापित परिवारों की समस्याओं का उचित समाधान निकले।
भूविस्थापितों के अधिकार और सम्मान से जुड़ा है यह संघर्ष –
गौरतलब है कि जेएसडब्ल्यू महानदी पावर प्लांट नरियरा से प्रभावित आठ ग्रामों के भूविस्थापित परिवारों के जीवन निर्वाह, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषय केवल व्यक्तिगत समस्याएं नहीं हैं, बल्कि इन परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न हैं। अपनी जमीन देकर औद्योगिक विकास में योगदान देने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाएं, सम्मानजनक जीवन और भविष्य की सुरक्षा मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जीवन निर्वाह भत्ता समिति (पेंशन) की इस बैठक के माध्यम से भूविस्थापित सदस्यों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जायज मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए संगठित होकर कंपनी प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रखेंगे। अब देखना होगा कि कंपनी प्रबंधन इन महत्वपूर्ण मांगों पर कितना सकारात्मक रुख अपनाता है और भूविस्थापित परिवारों को राहत दिलाने की दिशा में क्या कदम उठाता है।
