वंदे मातरम् की 150वीं जयंती पर अकलतरा में गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर
सरस्वती शिशु मंदिर में ठीक 11 बजे एक लय, एक स्वर में हुआ सामूहिक गायन, स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् के योगदान को किया गया स्मरण
अकलतरा – विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली की योजना के अंतर्गत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पूरे देश के सरस्वती शिशु मंदिरों में एक साथ राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी कड़ी में सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अकलतरा में भी निर्धारित समय ठीक प्रातः 11 बजे एक लय और एक स्वर में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसडीएम अकलतरा सुमीत बघेल, अध्यक्षता नगर पालिका परिषद अकलतरा की अध्यक्ष श्रीमती दीप्ति सारथी, विशिष्ट अतिथि श्रीमती स्वाति राठौर, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी अकलतरा, मुख्य वक्ता श्रीमती वर्षा यादव, व्याख्याता राजेंद्र कुमार सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अकलतरा, संयोजक बिहारी लाल ताम्रकार, अध्यक्ष सरस्वती शिशु मंदिर अकलतरा तथा व्यवस्था प्रमुख गोपेश तुलस्यान, व्यवस्थापक सरस्वती शिशु मंदिर अकलतरा के आतिथ्य में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ – 
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पूजन-अर्चन के साथ किया गया। इसके पश्चात निर्धारित समय प्रातः 11 बजे वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया। विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों, अतिथियों एवं उपस्थित नागरिकों ने एक साथ राष्ट्रगीत का गायन कर देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रप्रेम की भावना को अभिव्यक्त किया।
सामूहिक गायन के पश्चात विद्यालय के प्राचार्य केशव कुमार कौशिक द्वारा अतिथियों का परिचय कराया गया। स्वागत कार्यक्रम का दायित्व व्यवस्था प्रमुख गोपेश तुलस्यान ने निभाया।
वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, राष्ट्रभावना का सशक्त प्रतीक : वर्षा यादव
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता श्रीमती वर्षा यादव ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व, राष्ट्रीय चेतना में इसके योगदान तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देवी के विभिन्न स्वरूपों की श्रद्धा एवं भक्ति के साथ आराधना की जाती है, उसी प्रकार शस्य-श्यामला स्वरूप में विराजित भारत माता के स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करने वाला वंदे मातरम् देशवासियों की राष्ट्रीय भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के वीरों का स्मरण करते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना संपूर्ण जीवन मातृभूमि को समर्पित कर दिया। उन्होंने लाठियां खाईं, अंग्रेजों की गोलियां सहीं, जेलों की यातनाएं झेलीं और अनेक वीरों ने हंसते-हंसते फांसी का फंदा स्वीकार किया। ऐसे वीरों में राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना जगाने में वंदे मातरम् की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
श्रीमती यादव ने कहा कि वंदे मातरम् में भारत माता के प्रति श्रद्धा, सम्मान, गौरव और समर्पण की भावनाएं समाहित हैं। यही कारण है कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जन-जन में राष्ट्रीय चेतना और उत्साह का संचार करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बना।
उन्होंने वंदे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में इसकी रचना की गई और बाद में 1882 में उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में इसे स्थान मिला। उन्होंने वंदे मातरम् के महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इसकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
बंग-भंग आंदोलन में वंदे मातरम् ने जगाई थी राष्ट्रीय चेतना : एसडीएम सुमीत बघेल
मुख्य अतिथि एसडीएम अकलतरा सुमीत बघेल ने अपने उद्बोधन में वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राष्ट्रगीत के रूप में इसकी स्वीकार्यता और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।
उन्होंने विशेष रूप से 1905 के बंग-भंग आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् की भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार यह गीत राष्ट्रीय जागरण और देशभक्ति की भावना से जुड़ गया था। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों एवं नागरिकों से देश के गौरवशाली इतिहास को समझने और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग एवं बलिदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
देश की आजादी के संघर्ष में वंदे मातरम् का महत्वपूर्ण योगदान : दीप्ति सारथी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं नगर पालिका परिषद अकलतरा की अध्यक्ष श्रीमती दीप्ति सारथी ने वंदे मातरम् के माध्यम से देश की आजादी के संघर्ष में उत्पन्न हुई राष्ट्रीय चेतना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौर में वंदे मातरम् ने लोगों में देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करने का कार्य किया।
उन्होंने इस महत्वपूर्ण अवसर पर आयोजित सामूहिक राष्ट्रगीत गायन कार्यक्रम के लिए विद्यालय परिवार एवं उपस्थित सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्रगान की तरह वंदे मातरम् के प्रति भी सम्मान का भाव जरूरी : बिहारी लाल ताम्रकार
कार्यक्रम के संयोजक एवं सरस्वती शिशु मंदिर अकलतरा के अध्यक्ष बिहारी लाल ताम्रकार ने कहा कि जिस प्रकार राष्ट्रगान के प्रति प्रत्येक नागरिक के मन में सम्मान और श्रद्धा का भाव होता है, उसी प्रकार वंदे मातरम् के प्रति भी सभी को सम्मान की भावना रखनी चाहिए।
उन्होंने प्रतिकूल मौसम के बावजूद कार्यक्रम में उपस्थित होने वाले अतिथियों, नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों, विद्यालय परिवार एवं सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।
नगर के गणमान्य नागरिक एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में नगर के अनेक गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं सदस्यों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, कार्यक्रम में लव कुमार सिंह चंदेल, ओम प्रकाश साहू, श्रीमती रजनी साहू, दीन दयाल अग्रवाल, अयन जैन, रोहित सारथी, रामेंद्र सिंह चौहान, मुरारी लाल ताम्रकार, रविंद्र सिंह बैस, चिराग शर्मा, अभिषेक केडिया, राकेश नायक, सुरेश मुकीम, पुरुषोत्तम नामदेव, दिनेश दास, लखन शर्मा, विनोद द्विवेदी, दीनानाथ पांडेय, बिपिन पाण्डेय, दशरथ नामदेव सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
विद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयास से सफल हुआ आयोजन –
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की आचार्या सत्या सिंह ने किया। पूरे आयोजन को व्यवस्थित एवं गरिमापूर्ण ढंग से संपन्न कराने में विद्यालय परिवार के समस्त सदस्यों का सक्रिय योगदान रहा। कार्यक्रम में विद्यार्थियों एवं विद्यालय परिवार की सहभागिता ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।
वंदे मातरम् की सामूहिक स्वर-लहरियों से गूंजता सरस्वती शिशु मंदिर परिसर न केवल राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने का साक्षी बना, बल्कि इस अवसर ने उपस्थित लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के उन असंख्य ज्ञात-अज्ञात वीरों के त्याग, तपस्या और बलिदान का स्मरण भी कराया, जिनके संघर्ष से देश को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। कार्यक्रम ने राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और मातृभूमि के प्रति सम्मान की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश दिया।
