विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर ग्राम पंचायत लटिया में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के अधिकारों और निःशुल्क विधिक सहायता की दी गई जानकारी
नालसा योजना, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवं 12 दिसंबर को होने वाली नेशनल लोक अदालत के बारे में ग्रामीणों को किया गया जागरूक
अकलतरा – मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने, मानसिक रूप से बीमार एवं बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने तथा समाज में व्याप्त भ्रांतियों और भेदभाव को दूर करने के उद्देश्य से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर ग्राम पंचायत लटिया में विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जांजगीर के निर्देशानुसार तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं अध्यक्ष, तालुका विधिक सेवा समिति अकलतरा श्रीमती शिवानी सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में ग्रामीणों को मानसिक स्वास्थ्य, मानवीय गरिमा, विधिक अधिकारों और निःशुल्क कानूनी सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं।
शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा उनके लिए संचालित राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की योजनाओं की जानकारी देना था। इस दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करना, उन्हें सम्मान देना और उनके अधिकारों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में पैरालीगल वालंटियर (पीएलवी) गजानन प्रसाद कश्यप एवं डालेश्वर प्रसाद पटेल ने ग्रामीणों को मानसिक स्वास्थ्य और विधिक अधिकारों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां देते हुए समाज में जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया।
मानसिक बीमारी कोई अपराध या पाप नहीं, पीड़ितों को भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार
शिविर में पीएलवी गजानन प्रसाद कश्यप ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक बीमारी कोई अपराध या पाप नहीं है, बल्कि अन्य बीमारियों की तरह ही एक स्वास्थ्य संबंधी समस्या है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों को लेकर समाज में अनेक भ्रांतियां और गलत धारणाएं प्रचलित हैं, जिनके कारण प्रभावित व्यक्तियों को कई बार उपेक्षा, भेदभाव और सामाजिक अलगाव का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्हें प्रताड़ित करना, मारपीट करना, अपमानित करना अथवा घर से निकाल देना उनके अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो सकता है और परिस्थितियों के अनुसार कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है।
उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को समाज से अलग करने के बजाय उनके प्रति सहयोग, संवेदनशीलता और सहानुभूति का व्यवहार अपनाना चाहिए। परिवार के सदस्यों और समुदाय की सकारात्मक भूमिका ऐसे व्यक्तियों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।
उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों को भी गरिमा के साथ जीवन जीने, समुदाय में रहने, उचित उपचार प्राप्त करने, पुनर्वास की सुविधाओं का लाभ उठाने तथा पात्रता के अनुसार निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि मानसिक बीमारी को लेकर किसी व्यक्ति या उसके परिवार का उपहास न करें और न ही उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग करें। इसके स्थान पर उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने तथा समाज की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए सहयोग करें।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही स्वस्थ समाज की आधारशिला
शिविर में मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसके प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। पीएलवी गजानन प्रसाद कश्यप ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के संभावित कारणों की जानकारी देते हुए बताया कि आनुवंशिक कारक, मस्तिष्क में चोट, बचपन के प्रतिकूल अनुभव, जीवनशैली से जुड़ी समस्याएं तथा नशीले पदार्थों का सेवन मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति की स्थिति को समझे बिना उसके बारे में नकारात्मक धारणा बनाना उचित नहीं है। ऐसी समस्याओं की स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना और समय पर उपचार प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अर्थ केवल बीमारी की पहचान करना नहीं, बल्कि अपने दैनिक जीवन में ऐसी आदतों को अपनाना भी है, जो मन को स्वस्थ रखने में सहायक हों।
इसके लिए उन्होंने पर्याप्त नींद लेने, नियमित योग एवं शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करने, मोबाइल फोन का संतुलित उपयोग करने, परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने और सकारात्मक सामाजिक संबंध बनाए रखने जैसे उपायों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक मानसिक परेशानी, तनाव या अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो, तो उसे अनदेखा करने के बजाय उचित चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। समय पर सहायता प्राप्त करने से व्यक्ति को अपनी स्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है।
नालसा योजना और निःशुल्क विधिक सहायता की दी गई जानकारी
विधिक जागरूकता शिविर में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीणों को बताया गया कि कानूनी जानकारी और न्याय तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण कोई व्यक्ति अपने अधिकारों से वंचित न रहे, इसके लिए विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों तथा बौद्धिक अक्षमता वाले लोगों के अधिकारों के संबंध में जागरूकता फैलाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे व्यक्तियों और उनके परिवारों को यह जानकारी होना आवश्यक है कि जरूरत पड़ने पर वे कानूनी सहायता प्राप्त करने के लिए कहां संपर्क कर सकते हैं।
पीएलवी गजानन प्रसाद कश्यप ने ग्रामीणों को नालसा की हेल्पलाइन संख्या 15100 के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विधिक सहायता संबंधी जानकारी और मार्गदर्शन के लिए इस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझ रहा हो और उसे कानूनी सहायता या अपने अधिकारों की जानकारी की आवश्यकता हो, तो उसे संबंधित विधिक सेवा प्राधिकरण तक पहुंचने के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि कानूनी जागरूकता से ही लोग अपने अधिकारों को समझ सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने का उद्देश्य बताया
शिविर में पीएलवी डालेश्वर प्रसाद पटेल ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस दिवस का महत्वपूर्ण उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक समस्याओं से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करना और लोगों को जरूरत के समय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना है।
उन्होंने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी आवश्यक है। मानसिक परेशानियों को छिपाने, प्रभावित व्यक्ति को दोषी ठहराने या उसका मजाक उड़ाने के बजाय उसकी स्थिति को समझना और उचित सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार और समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करें। विशेष रूप से बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की भावनात्मक परेशानियों को गंभीरता से सुनना तथा जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह भी बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने में परिवार, विद्यालय, ग्राम पंचायत और सामाजिक संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सामूहिक प्रयासों से समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर कर प्रभावित व्यक्तियों के लिए अधिक सहयोगपूर्ण वातावरण बनाया जा सकता है।
12 दिसंबर 2026 को होने वाली नेशनल लोक अदालत की दी जानकारी –
कार्यक्रम के दौरान पीएलवी डालेश्वर प्रसाद पटेल ने आगामी 12 दिसंबर 2026 को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी।
उन्होंने लोक अदालत के महत्व और विवादों के आपसी सहमति से समाधान की उपयोगिता के बारे में बताया। लोक अदालत के माध्यम से ऐसे मामलों का निपटारा किया जा सकता है, जो कानून के अनुसार वहां सुनवाई और समझौते के लिए उपयुक्त हों।
उन्होंने ग्रामीणों को सलाह दी कि यदि उनका कोई मामला न्यायालय में लंबित है अथवा वे किसी ऐसे विवाद से संबंधित हैं, जिसका समाधान लोक अदालत के माध्यम से संभव है, तो वे संबंधित विधिक सेवा प्राधिकरण से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
लोक अदालत का उद्देश्य उपयुक्त मामलों में पक्षकारों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का अवसर प्रदान करना तथा न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाना है। इससे संबंधित जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाना विधिक जागरूकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
ग्रामीणों को दिलाया जागरूकता और संवेदनशीलता का संदेश
शिविर में उपस्थित ग्रामीणों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहने तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को उचित सहायता दिलाने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक समाज ही अपने सभी सदस्यों को सम्मान और सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्ति को तिरस्कार या उपेक्षा का सामना करने के बजाय परिवार और समुदाय का सहयोग मिलना चाहिए। उसके साथ सामान्य एवं सम्मानजनक व्यवहार करना, उसकी बात सुनना और उचित उपचार के लिए प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।
इसी क्रम में मानसिक स्वास्थ्य और जीवनशैली के संबंध को समझाते हुए ग्रामीणों से स्वस्थ दिनचर्या अपनाने, नशे से दूर रहने तथा तनाव की स्थिति में उचित सहायता लेने की अपील की गई।
कार्यक्रम के दौरान “मन स्वस्थ तो जीवन स्वस्थ” का संदेश दिया गया। इस नारे के माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझने और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।
ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की रही सहभागिता –
ग्राम पंचायत लटिया में आयोजित इस विधिक जागरूकता शिविर में ग्राम पंचायत के सचिव ध्रुव कुमार शर्मा, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष, पंचगण तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक और कानूनी पहलुओं की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। साथ ही निःशुल्क विधिक सहायता, नालसा की योजनाओं और आगामी नेशनल लोक अदालत के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं।
कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को जागरूक करने के साथ यह संदेश देना रहा कि न्याय, सम्मान और स्वास्थ्य संबंधी सहायता तक पहुंच प्रत्येक व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उनके अधिकारों की रक्षा करने में समुदाय की सकारात्मक भूमिका आवश्यक है।
जागरूकता से ही बनेगा संवेदनशील और न्यायपूर्ण समाज –
ग्राम पंचायत लटिया में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर ने मानसिक स्वास्थ्य और कानूनी अधिकारों के बीच महत्वपूर्ण संबंध को रेखांकित किया। शिविर में दी गई जानकारी से ग्रामीणों को यह समझने का अवसर मिला कि मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति भेदभाव के बजाय संवेदनशीलता और सहयोग का व्यवहार अपनाना चाहिए।
इसके साथ ही नालसा की योजनाओं, हेल्पलाइन नंबर 15100 तथा नेशनल लोक अदालत की जानकारी ने ग्रामीणों को कानूनी सहायता प्राप्त करने के उपलब्ध माध्यमों से परिचित कराया।
शिविर का मूल संदेश रहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का सम्मान और जरूरतमंदों तक विधिक सहायता पहुंचाना एक संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है। जब ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को अपने अधिकारों और उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी होगी, तभी जागरूकता का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।
