कृष्ण-सुदामा चरित्र, शुकदेव विदाई, व्यास पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के साथ श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन हुआ
बारिश के बीच भी उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, भक्ति में सराबोर हुआ कथा परिसर
अकलतरा – कान्हा राइस प्रोडक्ट परिसर, झलमला रोड नरियरा में जिंदल परिवार द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शनिवार को अत्यंत भक्तिमय एवं भावपूर्ण वातावरण में भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिवस व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य अनुराग कृष्ण शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के विभिन्न प्रसंगों, श्री राधा रानी की महिमा तथा अत्यंत मार्मिक कृष्ण-सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के समापन अवसर पर शुकदेव विदाई, व्यास पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
अंतिम दिवस कथा स्थल पर श्रद्धा और भक्ति का ऐसा वातावरण निर्मित हुआ कि बारिश भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए डटे रहे और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में भाव-विभोर नजर आए। कथा पंडाल में गूंजते भजनों, जयकारों और श्रीकृष्ण की लीलाओं के वर्णन से पूरा वातावरण कृष्णमय हो उठा।
कृष्ण-सुदामा की मित्रता ने भाव-विभोर किया
कथा के अंतिम दिवस आचार्य अनुराग कृष्ण शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता सांसारिक स्वार्थों से परे प्रेम, समर्पण, विश्वास और आत्मीयता का अनुपम उदाहरण है। सुदामा की गरीबी के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण ने उनके प्रति अपने प्रेम और सम्मान में कोई कमी नहीं आने दी।
कथा के दौरान जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे और दोनों मित्रों का मिलन हुआ, उस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सुदामा का आत्मीय स्वागत और उनके प्रति प्रेम की कथा सुनकर श्रद्धालु भक्ति एवं भावनाओं में डूब गए। महाराज ने कहा कि सच्ची मित्रता में धन-दौलत, पद और प्रतिष्ठा का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि प्रेम और आत्मीयता ही उसका वास्तविक आधार है।
श्री राधा रानी की महिमा का किया गुणगान –
कथा के दौरान आचार्य अनुराग कृष्ण शास्त्री महाराज ने श्री राधा रानी की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने श्रीराधा और श्रीकृष्ण के दिव्य प्रेम को भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप बताते हुए श्रद्धालुओं को प्रेम, समर्पण और भगवान के प्रति निष्काम भक्ति का संदेश दिया। श्रीराधा-कृष्ण के जयकारों से कथा परिसर गूंज उठा और श्रद्धालु भजनों पर भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए।
सात दिनों तक बही भक्ति की अविरल धारा – 
जिंदल परिवार द्वारा आयोजित इस सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों से लेकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और उनकी दिव्य लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया गया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, बाल लीलाएं, पूतना वध, कालिया नाग मर्दन, गोवर्धन लीला, रासलीला, मथुरा गमन, कंस वध, रुक्मिणी विवाह सहित भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण एवं रोचक वर्णन किया गया।
आचार्य अनुराग कृष्ण शास्त्री महाराज की ओजपूर्ण वाणी, सरल एवं प्रभावशाली कथा शैली तथा मधुर भजनों ने श्रद्धालुओं को सातों दिनों तक बांधे रखा। कथा के प्रत्येक प्रसंग में श्रद्धालुओं ने भगवान की लीलाओं का रसास्वादन किया और भक्ति के रंग में रंगते नजर आए।
तेज बारिश भी नहीं रोक सकी श्रद्धालुओं की आस्था –
कथा के अंतिम दिवस मौसम ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और तेज बारिश हुई। इसके बावजूद कथा श्रवण के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर मौजूद रहे और पूरे मनोयोग से कथा का श्रवण करते रहे।
बारिश के बीच भगवान श्रीकृष्ण की कथा, भजनों और जयकारों का दृश्य अत्यंत मनोहारी रहा। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को देखकर ऐसा प्रतीत हुआ मानो प्रकृति भी इस पावन आयोजन की साक्षी बनकर भक्ति की इस धारा में सहभागी हो रही हो।
आसपास के क्षेत्रों से भी पहुंचे श्रद्धालु
सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में अकलतरा सहित आसपास के अनेक गांवों एवं क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह से ही कथा स्थल पर भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता था। कथा श्रवण के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा आयोजन स्थल पर उपलब्ध भोजन प्रसाद एवं भंडारे का भी लाभ लिया।
श्रद्धालुओं के लिए की गई थी सुव्यवस्थित व्यवस्था –
आयोजक परिवार द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे आयोजन की विशेष एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था की गई थी। कथा श्रवण के लिए बैठने की व्यवस्था, प्रसाद वितरण, भंडारा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया। व्यवस्थाओं के कारण श्रद्धालुओं को शांतिपूर्ण एवं भक्तिमय वातावरण में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने का अवसर मिला।
व्यास पूजन, हवन एवं पूर्णाहुति के साथ हुआ समापन –
कथा के अंतिम चरण में धार्मिक विधि-विधान के साथ व्यास पूजन किया गया। इसके पश्चात हवन एवं पूर्णाहुति का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने हवन में आहुति देकर परिवार, समाज एवं समस्त मानव समाज के सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की। शुकदेव विदाई के प्रसंग के साथ सात दिवसीय कथा ज्ञान यज्ञ का विधिवत समापन हुआ।
पूर्णाहुति के अवसर पर कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। पूरा परिसर “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।
आयोजक परिवार ने जताया हृदय से आभार –
श्रीमद्भागवत कथा के आयोजक ताराचंद अग्रवाल एवं मनोज अग्रवाल की ओर से कथा में शामिल होने वाले सभी श्रद्धालुओं, भक्तजनों एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वाले सभी लोगों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया गया।
आयोजक परिवार ने कहा कि सात दिनों तक श्रद्धालुओं ने जिस प्रेम, आस्था और उत्साह के साथ कथा में सहभागिता की, वह उनके लिए सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी श्रद्धालुओं की उपस्थिति और सहयोग से यह धार्मिक आयोजन सफल एवं यादगार बन सका।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा सभी श्रद्धालुओं एवं उनके परिवारों पर सदैव बनी रहे तथा सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल का संचार हो।
सात दिनों तक चली श्रीमद्भागवत कथा के समापन के साथ कथा परिसर भले ही शांत हो गया, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, भजनों की मधुर गूंज और कृष्ण-सुदामा की मित्रता का भाव श्रद्धालुओं के मन में लंबे समय तक बना रहने वाला है।
