अकलतरा के अजंता मैदान में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी उत्सव, 45 फीट ऊंचे रावण के पुतले का हुआ दहन
भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण की भव्य झांकी निकाली गई, शस्त्र पूजन के साथ क्षत्रिय समाज ने मनाया विजय का पर्व; देवी जसगीत एवं छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
अकलतरा – असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक विजयादशमी पर्व के अवसर पर अकलतरा नगर में उत्साह, उमंग और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। नगर के अजंता मैदान में राजपूत क्षत्रिय समाज द्वारा विजयादशमी उत्सव धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण की आकर्षक झांकी निकाली गई तथा विधि-विधान के साथ शमी पूजन संपन्न कराया गया। इसके पश्चात विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह ने 45 फीट ऊंचे रावण के विशाल पुतले का दहन किया। रावण दहन के साक्षी बनने के लिए नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अजंता मैदान पहुंचे। वहीं, विजयादशमी उत्सव के अंतर्गत शाम को आयोजित देवी जगराता एवं जसगीत कार्यक्रम में कलाकारों ने देवी भजनों और छत्तीसगढ़ी गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
शस्त्र पूजन कर बुजुर्गों से लिया आशीर्वाद-
विजयादशमी का पर्व राजपूत क्षत्रिय समाज के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ परंपरा, शौर्य, साहस और स्वाभिमान का प्रतीक भी है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए राजपूत क्षत्रिय समाज के लोगों ने अपने-अपने घरों में शस्त्रों की पूजा-अर्चना की। परिवार के सदस्यों ने विधि-विधान से पूजन कर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर परिवार के बुजुर्गों से आशीर्वाद प्राप्त कर समाज की गौरवशाली परंपराओं एवं सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन की परंपरा शक्ति, पराक्रम और धर्म की रक्षा के संकल्प का संदेश देती है। समाज के लोगों ने इस पर्व को पारंपरिक उत्साह के साथ मनाते हुए आपसी एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।
आजाद चौक से निकली भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण की भव्य झांकी-
विजयादशमी उत्सव के अंतर्गत नगर के आजाद चौक से भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण की आकर्षक झांकी निकाली गई। धार्मिक उत्साह और उल्लास के वातावरण में निकली यह झांकी नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी। झांकी पोस्ट ऑफिस मार्ग, शास्त्री चौक एवं आजाद चौक से गुजरते हुए वापस अजंता मैदान स्थित कार्यक्रम स्थल पहुंची।
भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण की झांकी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। मार्ग में झांकी के दर्शन करने के लिए लोग उपस्थित रहे। भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश देती इस झांकी के माध्यम से विजयादशमी पर्व की धार्मिक महत्ता को प्रदर्शित किया गया।
झांकी के कार्यक्रम स्थल पहुंचने के बाद अजंता मैदान में विजयादशमी उत्सव की धार्मिक गतिविधियां आगे बढ़ीं। पूरा परिसर पर्व के उल्लास और उत्साह से सराबोर नजर आया।
विधि-विधान से शमी पूजन, विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह ने किया रावण दहन
अजंता मैदान परिसर में पंडित हरिमोहन पांडेय द्वारा विधि-विधान के साथ शमी वृक्ष की पूजा-अर्चना कराई गई। धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न पूजन के दौरान विजयादशमी पर्व की महत्ता को रेखांकित किया गया। पूजा-अर्चना के पश्चात कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण 45 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया।
विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह ने रावण के विशाल पुतले का दहन किया। पुतले में आग लगते ही उपस्थित लोगों ने उत्साह के साथ विजयादशमी पर्व का उल्लास मनाया। विशाल पुतले को देखने के लिए अजंता मैदान में लोगों की भारी भीड़ जुटी रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में रावण दहन को लेकर विशेष उत्सुकता दिखाई दी।
रावण दहन भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जो प्रत्येक वर्ष समाज को यह संदेश देती है कि अहंकार, अन्याय और अधर्म चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य, सदाचार और धर्म की ही विजय होती है। भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने की स्मृति में मनाया जाने वाला यह पर्व लोगों को अपने भीतर की बुराइयों का त्याग कर सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह ने दी विजयादशमी की शुभकामनाएं-
विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह ने क्षेत्रवासियों को विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पर्व के ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए भगवान श्रीराम के आदर्शों और सत्य की विजय के संदेश को स्मरण किया।
विजयादशमी केवल रावण के पुतले के दहन तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह जीवन में सत्य, न्याय, सदाचार और नैतिक मूल्यों को अपनाने का अवसर भी है। यह पर्व हमें प्रेरणा देता है कि समाज में व्याप्त बुराइयों, अहंकार और अन्याय के विरुद्ध खड़े होकर सदैव धर्म एवं सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने उत्साहपूर्वक विजयादशमी पर्व मनाया। अजंता मैदान में आयोजित इस उत्सव ने नगर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ सामाजिक एकजुटता का संदेश भी दिया।
देवी जसगीत एवं जगराता कार्यक्रम में भक्तिरस की बही धारा-
विजयादशमी उत्सव के अवसर पर अजंता मैदान परिसर में शाम 6 बजे से देवी जगराता एवं जसगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने देवी भजनों के साथ छत्तीसगढ़ी गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति संगीत और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के अनूठे संगम ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।
देवी भजनों की प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से मां दुर्गा की महिमा का गुणगान किया। वहीं, छत्तीसगढ़ी गीतों ने स्थानीय लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। उपस्थित श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों ने भक्ति संगीत का आनंद लेते हुए कार्यक्रम में सहभागिता की।
जसगीत छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक एवं धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। देवी आराधना से जुड़े इन गीतों में आस्था, भक्ति और लोकजीवन की भावनाएं अभिव्यक्त होती हैं। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने धार्मिक उत्सव को सांस्कृतिक रंगों से भी समृद्ध किया।
भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण की झांकी, शमी पूजन और रावण दहन के आयोजन के बाद शाम को जगराता कार्यक्रम ने उत्सव की रौनक को और बढ़ा दिया। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा यह आयोजन नगरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
सामाजिक सहभागिता से सफल हुआ विजयादशमी उत्सव-
अजंता मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में राजपूत क्षत्रिय समाज के अनेक सदस्यों, गणमान्य नागरिकों एवं नगरवासियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में रवि सिंह सिसोदिया, शुभा सिंह, पल्लवी सिंह, अनील सिंह, राज बहादुर सिंह, रविंद्र सिंह बैस, धनराज सिंह चौहान, संतोष सिंह बैस, प्रतिपाल सिंह, अमित सिंह बैस, डॉ. विवेक सिंह बैस, अंकित सिंह सिसोदिया, जयदीप सिंह बैस, अभिनव सिंह, गगन सिंह बैस, सिद्धांत सिंह, ऐश्वर्य सिंह, हिमांशु सिंह बैस, स्वयं सिंह, कान्हा सिंह, नितिन सिंह, युवराज सिंह, अपूर्वपाल सिंह, सृजन सिंह लोकेंद्र सिंह, अशोक मनकशा, हरीश गोयल, अविनाश लाटा, भविष्य चंद्राकर,खुलन सोनवानी, रामगोपाल देवांगन, महेश्वर टंडन, उत्तम पाटले,विजय खांडेल, शेख सितारा टंडन, अविनाश साहू, मुकेश शर्मा एवं नगरवासी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सभी की सहभागिता से विजयादशमी उत्सव धार्मिक उल्लास और सामाजिक समरसता के वातावरण में संपन्न हुआ।
सत्य और धर्म की विजय का संदेश दे गया विजयादशमी उत्सव –
अकलतरा के अजंता मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव ने एक बार फिर भारतीय संस्कृति की उस शाश्वत मान्यता को सामने रखा कि अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण की झांकी, शमी पूजन, 45 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन तथा देवी जसगीत और जगराता कार्यक्रम ने आयोजन को धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष बना दिया।
इस उत्सव ने लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने, अहंकार एवं बुराइयों का त्याग करने तथा सामाजिक एकता और सद्भाव को मजबूत बनाने की प्रेरणा दी। धार्मिक आस्था, पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक संस्कृति के संगम के साथ अकलतरा में विजयादशमी पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया।
