भक्ति और समर्पण की अनूठी मिसाल बने गिरीश जायसवाल
चारों सोमवार 45 किलोमीटर पैदल कांवड़ यात्रा कर पारसनाथ धाम में किया जलाभिषेक
अकलतरा – सावन का महीना भगवान शिव की आराधना, आस्था और भक्ति का पर्व माना जाता है, इस पावन अवसर पर शिवभक्त अपनी-अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान भोलेनाथ की उपासना करते हैं, अकलतरा नगर के वार्ड क्रमांक 17 निवासी युवक गिरीश जायसवाल ने सावन के चारों सोमवार भगवान शिव के प्रति अपनी गहरी आस्था, अटूट श्रद्धा और समर्पण का परिचय देते हुए लगातार कांवड़ यात्रा कर क्षेत्र में भक्ति की एक प्रेरणादायी मिसाल कायम की है।
गिरीश जायसवाल ने सावन के प्रथम सोमवार को उड़ीसा के राउरकेला से घोघड़ धाम तक पैदल कांवड़ यात्रा पूरी की, इसके बाद सावन के द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ सोमवार को भी उन्होंने अपनी धार्मिक साधना को जारी रखते हुए प्रत्येक सोमवार शिवरीनारायण स्थित महानदी से कांवड़ में पवित्र जल भरकर लगभग 45 किलोमीटर की पैदल यात्रा की और क्षेत्र के प्रसिद्ध पारसनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव के शिवलिंग पर विधि-विधान एवं श्रद्धापूर्वक जल अर्पित किया।
लगातार चार सोमवार तक लंबी दूरी की पैदल कांवड़ यात्रा करना गिरीश के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट आस्था और आत्मिक समर्पण का प्रतीक रहा। तेज धूप, उमस, थकान और लंबी दूरी की कठिनाइयों के बावजूद उनके कदम शिवभक्ति की राह पर निरंतर आगे बढ़ते रहे। हर सोमवार महानदी से जल लेकर पैदल पारसनाथ धाम पहुंचना उनके संकल्प, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
गिरीश जायसवाल का कहना है कि भगवान शिव के प्रति सच्ची श्रद्धा मन में हो तो कठिन से कठिन यात्रा भी सहज लगने लगती है। कांवड़ यात्रा के दौरान उनका एकमात्र उद्देश्य भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हुए अपनी श्रद्धा अर्पित करना और क्षेत्र एवं समाज की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करना रहा। उनके लिए यह यात्रा किसी प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तिगत आस्था और भक्ति का विषय रही।
चारों सोमवार लगातार पैदल कांवड़ यात्रा कर पारसनाथ धाम में जलाभिषेक करने के गिरीश जायसवाल के संकल्प की क्षेत्र में सराहना हो रही है। उनकी इस भक्ति यात्रा ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि जब उसमें संकल्प, अनुशासन और समर्पण जुड़ जाता है तो वह प्रेरणा का माध्यम बन जाती है।
गिरीश की इस अनूठी कांवड़ यात्रा से युवा पीढ़ी को भी अपनी धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। सावन के प्रत्येक सोमवार लंबी दूरी पैदल तय कर भगवान शिव के दरबार में पहुंचना निश्चित रूप से शारीरिक परिश्रम के साथ मानसिक दृढ़ता की भी परीक्षा थी, जिसे उन्होंने श्रद्धा और विश्वास के बल पर पूरा किया।
भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था, कठिन यात्रा में भी नहीं डिगा संकल्प और हर सोमवार जलाभिषेक के साथ पूर्ण हुई भक्ति की यह यात्रा गिरीश जायसवाल को क्षेत्र में शिवभक्ति की एक प्रेरणादायी मिसाल बना गई है।












