साइबर ठगों से सावधान रहें, अनजान लिंक और कॉल से बनाएं दूरी
सरस्वती शिशु मंदिर में साइबर अपराध जागरूकता कार्यक्रम, विद्यार्थियों को 1930 हेल्पलाइन की दी जानकारी
गुड टच-बैड टच से लेकर नशामुक्ति तक हुई सार्थक चर्चा, विद्यार्थियों से परिवार और समाज को भी जागरूक करने का आह्वान
अकलतरा – डिजिटल दौर में मोबाइल और इंटरनेट जहां शिक्षा, सूचना और संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं, वहीं साइबर अपराधों का बढ़ता खतरा भी समाज के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, विशेषकर बच्चे और युवा साइबर ठगी, फर्जी लिंक, अनजान कॉल, सोशल मीडिया के दुरुपयोग तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी का आसानी से शिकार हो सकते हैं। इन्हीं खतरों से विद्यार्थियों को जागरूक करने के उद्देश्य से वेल विशर फाउंडेशन के तत्वावधान में सरस्वती शिशु मंदिर में साइबर अपराध जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को केवल साइबर अपराध से बचने के उपाय ही नहीं बताए गए, बल्कि गुड टच-बैड टच, मोबाइल के संतुलित उपयोग, नशे से दूरी, योग एवं ध्यान और जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला साइबर थाना प्रभारी भास्कर शर्मा रहे।
एक छोटी सी गलती बन सकती है साइबर ठगी की बड़ी वजह – 
कार्यक्रम में जिला साइबर थाना प्रभारी भास्कर शर्मा ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए साइबर अपराध की बदलती प्रकृति और उससे बचाव के तरीकों को सरल भाषा में समझाया।
उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि मोबाइल पर आने वाले अनजान लिंक पर किसी भी स्थिति में क्लिक न करें। कई बार साइबर अपराधी आकर्षक ऑफर, इनाम, नौकरी, छात्रवृत्ति अथवा अन्य बहानों का सहारा लेकर लोगों को फर्जी लिंक भेजते हैं और एक छोटी सी गलती के माध्यम से मोबाइल या बैंक खाते से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर लेते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ OTP साझा नहीं करना चाहिए। चाहे सामने वाला व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, कंपनी का कर्मचारी या कोई परिचित व्यक्ति ही क्यों न बताए, गोपनीय जानकारी साझा करने से पहले पूरी तरह सतर्क रहना जरूरी है।
उन्होंने अनजान नंबरों से आने वाले कॉल से सावधान रहने तथा संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल परिवार के बड़े सदस्यों को जानकारी देने की सलाह दी।
साइबर अपराध हो जाए तो घबराएं नहीं, तुरंत उठाएं कदम –
भास्कर शर्मा ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने की जानकारी भी दी।
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे घबराने के बजाय तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए अथवा नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि साइबर अपराध के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। घटना की जानकारी जितनी जल्दी संबंधित एजेंसी तक पहुंचेगी, उतनी ही जल्दी आवश्यक कार्रवाई की संभावना बढ़ेगी।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि साइबर सुरक्षा केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। विद्यार्थी अपने घर जाकर माता-पिता, भाई-बहन, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को भी साइबर अपराध से बचाव की जानकारी दें।
गुड टच और बैड टच की भी दी महत्वपूर्ण जानकारी
कार्यक्रम की शुरुआत में भास्कर शर्मा ने विद्यार्थियों को गुड टच और बैड टच के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने बच्चों को अपने शरीर की सुरक्षा, असहज स्पर्श की पहचान और ऐसी स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति को तत्काल जानकारी देने के महत्व को समझाया।
विद्यार्थियों को बताया गया कि किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि, स्पर्श या व्यवहार जिससे वे असहज महसूस करें, उसे चुपचाप सहन करने के बजाय अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करना चाहिए।
यह जानकारी विद्यार्थियों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा केवल घर और स्कूल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मोबाइल जरूरत बने, लत नहीं—विद्यार्थियों को दी विशेष सलाह –
साइबर सुरक्षा के साथ-साथ कार्यक्रम में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग को लेकर भी विद्यार्थियों को सचेत किया गया।
भास्कर शर्मा ने विद्यार्थियों से कहा कि मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग शिक्षा एवं आवश्यक जानकारी हासिल करने के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसका अनावश्यक एवं अत्यधिक उपयोग विद्यार्थियों के अध्ययन, स्वास्थ्य और दिनचर्या पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से मोबाइल स्क्रीन पर अनावश्यक समय बिताने के बजाय पढ़ाई, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहने की अपील की।
लक्ष्य तय करें और अभी से शुरू करें तैयारी : आविनाश सिंह –
कार्यक्रम में वेल विशर फाउंडेशन के अध्यक्ष आविनाश सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन भविष्य की नींव तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण समय है।
उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने तथा अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित कर उसकी तैयारी अभी से शुरू करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सफलता अचानक नहीं मिलती, बल्कि नियमित मेहनत, अनुशासन और सही दिशा में निरंतर प्रयास से प्राप्त होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल और सोशल मीडिया की अनावश्यक गतिविधियों से समय बचाकर अपनी पढ़ाई और भविष्य निर्माण में लगाने का संदेश दिया।
नशे से दूर रहें, योग और ध्यान को बनाएं जीवन का हिस्सा : मोहन सिंह कश्यप –
समाजसेवी मोहन सिंह कश्यप ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवार और पूरे सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से पूरी तरह दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन के लिए योग और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी जितनी अधिक सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ेगी, उतनी ही मजबूती से वह नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रह सकेगी।
साइबर सुरक्षा का संदेश लेकर घर लौटे विद्यार्थी
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि विद्यार्थियों को केवल जानकारी देकर कार्यक्रम समाप्त नहीं किया गया, बल्कि उन्हें साइबर जागरूकता के वाहक बनने का संदेश दिया गया।
विद्यार्थियों से आह्वान किया गया कि वे स्कूल में मिली जानकारी को अपने घर और आसपास के लोगों तक पहुंचाएं। खासकर ऐसे परिवारों में जहां बुजुर्ग मोबाइल बैंकिंग, OTP, डिजिटल भुगतान और इंटरनेट से जुड़ी तकनीकों का उपयोग करते हैं, वहां बच्चों की जागरूकता बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
आज जब साइबर ठग लोगों को फोन कॉल, फर्जी लिंक, सोशल मीडिया संदेश और अन्य डिजिटल माध्यमों से निशाना बना रहे हैं, ऐसे में जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपायों में से एक है।
कार्यक्रम ने दिया तीन महत्वपूर्ण संदेश
सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम ने विद्यार्थियों के बीच तीन महत्वपूर्ण संदेश मजबूती से पहुंचाए—
पहला—साइबर सुरक्षा में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।
अनजान लिंक, कॉल और OTP से जुड़ी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
दूसरा—किसी भी असहज परिस्थिति को छिपाएं नहीं।
गुड टच और बैड टच को समझना तथा समस्या होने पर भरोसेमंद व्यक्ति को बताना जरूरी है।
तीसरा—नशे और मोबाइल की लत से दूरी बनाकर लक्ष्य की ओर बढ़ें।
योग, ध्यान, पढ़ाई और सकारात्मक गतिविधियां विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बन सकती हैं।
सार्थक संवाद से विद्यार्थियों में दिखी जागरूकता –
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े विषयों को गंभीरता से सुना। पुलिस अधिकारी द्वारा वास्तविक जीवन में सामने आने वाली साइबर ठगी की परिस्थितियों और उनसे बचने के उपायों की जानकारी दिए जाने से विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा की व्यवहारिक समझ मिली।
कार्यक्रम का संचालन वेल विशर फाउंडेशन के सचिव चिराग शर्मा ने किया, आभार प्रदर्शन विद्यालय की प्राचार्या बबिता वर्मा ने किया।
इस अवसर पर साइबर थाना से रोहित कहरा एवं प्रदीप दुबे, वेल विशर फाउंडेशन के अध्यक्ष आविनाश सिंह, सचिव चिराग शर्मा, समाजसेवी मोहन सिंह कश्यप, विद्यालय से शैलेश विश्वकर्मा सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
संदेश स्पष्ट है—सतर्क रहें, सुरक्षित रहें
सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम ने यह संदेश स्पष्ट किया कि साइबर अपराध से बचाव केवल तकनीक का नहीं, बल्कि जागरूकता और सतर्कता का विषय है।
एक OTP, एक अनजान लिंक या एक गलत क्लिक पूरी जिंदगी की जमा पूंजी पर भारी पड़ सकता है—इसलिए सावधानी बरतें, जागरूक रहें और दूसरों को भी जागरूक करें।













