सीमांकन के बाद भी सरकारी जमीन पर कब्जा बरकरार
शिकायतों के बाद राजस्व विभाग ने किया सीमांकन, लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब तक नहीं — ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अकलतरा – विकासखंड के ग्राम दर्रीटांड़ में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई की धीमी रफ्तार के चलते लगातार लंबा खिंचता जा रहा है, ग्रामीणों की शिकायतों के बाद राजस्व विभाग द्वारा संबंधित भूमि का सीमांकन कराया जा चुका है, लेकिन सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अब तक शासकीय भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब राजस्व विभाग द्वारा मौके पर सीमांकन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है, तो इसके बाद भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई क्यों लंबित है, यह समझ से परे है।
शिकायतों के बाद हुआ सीमांकन, फिर भी कार्रवाई ठंडे बस्ते में
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम दर्रीटांड़ में शासकीय भूमि पर कुछ लोगों द्वारा लंबे समय से कब्जा किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा कई बार तहसील कार्यालय, राजस्व विभाग तथा संबंधित अधिकारियों को लिखित शिकायतें देकर शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की गई।
लगातार शिकायतों और मांगों के बाद राजस्व विभाग की ओर से भूमि का सीमांकन कराया गया। सीमांकन की कार्रवाई के बाद संबंधित शासकीय भूमि की वास्तविक स्थिति और उसकी सीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। लेकिन सीमांकन के बाद जिस तेजी से आगे की कार्रवाई अपेक्षित थी, वह अब तक नजर नहीं आ रही है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा असंतोष –
कार्रवाई में हो रही देरी को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण यदि समय रहते नहीं हटाया गया तो भविष्य में स्थिति और जटिल हो सकती है। उनका कहना है कि कब्जे की स्थिति लंबे समय तक बनी रहने से अतिक्रमण का विस्तार होने अथवा वहां नए निर्माण किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि शासकीय भूमि सार्वजनिक संपत्ति होती है और उसका संरक्षण प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि किसी शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत सामने आती है तो जांच और सीमांकन के बाद नियमानुसार कार्रवाई होना आवश्यक है।
सीमांकन के बाद कार्रवाई क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों का कहना है कि सीमांकन का उद्देश्य ही भूमि की वास्तविक सीमा और स्थिति स्पष्ट करना है। यदि सीमांकन के बाद भी मामला कार्रवाई के स्तर पर आगे नहीं बढ़ता है तो इससे प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सीमांकन रिपोर्ट एवं उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की जाए तथा यदि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण पाया गया है तो नियमानुसार तत्काल कार्रवाई करते हुए भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए।
सरकारी जमीन की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल –
ग्राम दर्रीटांड़ का यह मामला केवल एक अतिक्रमण की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे शासकीय भूमि की सुरक्षा और राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासकीय भूमि पर कब्जे की शिकायत के बाद सीमांकन कराया जाता है, लेकिन उसके बाद कार्रवाई नहीं होती, तो इससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बढ़ने की आशंका रहती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को लंबित रखने के बजाय सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, शासकीय भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया जाए और भविष्य में दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
अब देखना यह होगा कि सीमांकन के बाद प्रशासन इस मामले में कब तक अगला कदम उठाता है और ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही शिकायत का निराकरण कब होता है। फिलहाल सीमांकन हो जाने के बावजूद सरकारी जमीन पर कब्जा बरकरार रहने से ग्रामीणों के बीच प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर असंतोष और सवाल दोनों बढ़ते जा रहे हैं।













