श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय में हर्षोल्लास से मना हिंदी दिवस
छात्र-छात्राओं ने कविता पाठ एवं भाषण के माध्यम से हिंदी के महत्व पर रखे विचार, हिंदी के सम्मान का लिया संकल्प
अकलतरा – श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय, बनाहिल में हिंदी दिवस का आयोजन उत्साह, उमंग और गौरवपूर्ण वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों एवं एनसीसी कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए हिंदी भाषा के प्रति अपने सम्मान एवं प्रेम को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहायक प्राध्यापक राहुल राठौर ने विद्यार्थियों को हिंदी दिवस के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे मन और भावनाओं की भाषा है। यह हमें अपने परिवार, समाज और संस्कृति से जोड़ती है तथा हमारी समृद्ध परंपराओं और संस्कारों को सहेजने का कार्य करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना रखने का आह्वान किया।
सहायक प्राध्यापक अनुज जैन ने हिंदी की भावनात्मक एवं सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी सिर्फ बोलने की भाषा नहीं, बल्कि महसूस करने की भाषा है। हिंदी की सहजता, सरलता और आत्मीयता लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है। उन्होंने कहा कि जब हम हिंदी में संवाद करते हैं तो उसमें अपनापन और आत्मीयता का भाव सहज रूप से दिखाई देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग तथा इसके सम्मान को अपने व्यवहार का हिस्सा बनाने की अपील की।
छात्र-छात्राओं ने प्रस्तुत कीं कविताएं और भाषण –
हिंदी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के महत्व, राष्ट्र निर्माण में हिंदी की भूमिका, भारतीय संस्कृति और हिंदी साहित्य से जुड़े विषयों पर कविता पाठ एवं भाषण प्रस्तुत किए।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में हिंदी के प्रति गौरव, मातृभाषा के प्रति सम्मान तथा भारतीय संस्कृति के प्रति जुड़ाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। छात्र-छात्राओं ने अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा और तकनीक के दौर में भी अपनी भाषा एवं संस्कृति के प्रति सम्मान बनाए रखना आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के इतिहास, उसके व्यापक स्वरूप तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व से भी परिचित कराया। उन्होंने कहा कि हिंदी देश के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के बीच संवाद एवं आत्मीयता का महत्वपूर्ण माध्यम रही है। हिंदी के प्रति सम्मान हमारी भाषाई विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
हिंदी के सम्मान का लिया संकल्प –
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय परिवार के सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं ने हिंदी भाषा के सम्मान, संवर्धन एवं अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि हिंदी को केवल एक दिवस तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन, शिक्षा एवं सामाजिक संवाद में भी इसके प्रयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
हिंदी दिवस के आयोजन ने विद्यार्थियों में अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति गौरव की भावना को मजबूत किया। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से होती है और इन्हें संरक्षित रखने में युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर दुर्गा टण्डन, अनुज जैन, संध्या सिंह, सरिता पटेल, चंद्ररुपा कश्यप, संदीप कुर्रे, अशोक पाण्डेय, अनामिका सिंह, सुनीता पाण्डेय, पायल दास, रश्मि मरकाम, समरीन मिर्जा, राजेश, भास्कर कश्यप, विद्या जायसवाल, अविनाश चौहान, नरेंद्र पाटले, मनीष गंधर्व, आकाश दास, नीरज निर्मलकर, बृजनंदन पटेल एवं द्वाशराम कश्यप सहित राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक, एनसीसी कैडेट्स तथा महाविद्यालय के समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।













