कार्यस्थल सुरक्षित तो नारी सशक्त — श्रीमती शिवानी सिंह
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम को लेकर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित
अकलतरा – कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं गरिमापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना केवल संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और न्यायपूर्ण समाज की बुनियादी आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को लेकर तालुका विधिक सेवा समिति अकलतरा एवं एकीकृत बाल विकास परियोजना अकलतरा के संयुक्त तत्वावधान में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन नगर के मिनीमाता मंगल भवन अकलतरा में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता तालुका विधिक सेवा समिति अकलतरा की अध्यक्ष एवं माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती शिवानी सिंह ने की। शिविर में महिला अधिकारों, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, यौन उत्पीड़न की शिकायत की प्रक्रिया तथा महिलाओं को उपलब्ध कानूनी संरक्षण के संबंध में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई।
कानून महिलाओं को गरिमा के साथ काम करने का अधिकार देता है –
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती शिवानी सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की विशाखा गाइडलाइन के बाद बनाए गए कानून का उद्देश्य प्रत्येक कामकाजी महिला को सुरक्षित एवं गरिमापूर्ण वातावरण में कार्य करने का अधिकार सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला को कार्यस्थल पर किसी प्रकार की असुरक्षा या उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है तो कानून उसके साथ खड़ा है।
उन्होंने कहा कि “चुप रहना समाधान नहीं, बोलना ही सशक्तिकरण है।” महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ किसी भी अनुचित व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यस्थल पर महिला के साथ होने वाला उत्पीड़न केवल शारीरिक व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि कई प्रकार के अशोभनीय एवं आपत्तिजनक व्यवहार भी कानून के दायरे में आते हैं।
10 या अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में आंतरिक परिवाद समिति अनिवार्य –
श्रीमती सिंह ने अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी अथवा निजी कार्यालय या संस्थान, जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां आंतरिक परिवाद समिति (ICC) का गठन किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने महिलाओं को शिकायत की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार घटना के संबंध में लिखित शिकायत प्रस्तुत कर सकती है।
उन्होंने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के विभिन्न स्वरूपों को समझाते हुए कहा कि अशोभनीय टिप्पणी करना, गलत इशारा करना, अनुचित शारीरिक संपर्क करना, अश्लील सामग्री दिखाना अथवा किसी महिला को मानसिक रूप से परेशान करना भी यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे मामलों में महिलाओं को भय या संकोच के कारण चुप नहीं रहना चाहिए, बल्कि उपलब्ध कानूनी
व्यवस्था का सहारा लेना चाहिए।
जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना उद्देश्य –
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परियोजना अधिकारी अकलतरा श्रीमती राजेश्वरी पाटले ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का प्रमुख उद्देश्य जनहित से जुड़े विषयों के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना तथा केंद्र एवं राज्य शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकता है, जब लोग अपने अधिकारों और शासन द्वारा संचालित योजनाओं के प्रति जागरूक हों। उन्होंने महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित योजनाओं और अधिकारों की जानकारी को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
निःशुल्क कानूनी सहायता और महिलाओं के अधिकारों की दी जानकारी –
कार्यक्रम का मंच संचालन करते हुए पीएलव्ही गजानंद प्रसाद कश्यप ने उपस्थित लोगों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने निःशुल्क कानूनी सहायता, नालसा हेल्पलाइन नंबर, प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर), बाल विवाह, महिलाओं के अधिकार तथा भरण-पोषण अधिनियम सहित कई महत्वपूर्ण कानूनी विषयों को सरल भाषा में समझाया।
उन्होंने बताया कि आर्थिक अथवा सामाजिक कारणों से कोई व्यक्ति न्याय पाने से वंचित न रहे, इसके लिए विधिक सेवा संस्थाओं के माध्यम से पात्र लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे स्वयं भी कानूनी अधिकारों की जानकारी प्राप्त करें और अपने कार्यक्षेत्र में अन्य महिलाओं तथा जरूरतमंद लोगों तक भी यह जानकारी पहुंचाएं।
बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की रही सहभागिता –
विधिक जागरूकता शिविर में महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षकगण, पीएलव्ही डालेश्वर प्रसाद पटेल सहित बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिलाओं ने कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं कानूनी अधिकारों से जुड़े विषयों की जानकारी प्राप्त की।
शिविर में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी देना ही उन्हें सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जब महिला अपने अधिकारों, शिकायत की प्रक्रिया और उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में जानती है, तब वह किसी भी अनुचित व्यवहार का सामना अधिक जागरूकता और कानूनी समझ के साथ कर सकती है।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना नहीं, बल्कि महिलाओं में आत्मविश्वास, अधिकार-बोध और सुरक्षित कार्यस्थल की भावना को मजबूत करना रहा। जागरूकता शिविर के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता तथा सुरक्षित कार्यस्थल ही सशक्त नारी और सशक्त समाज की आधारशिला है।













