आरटीआई के 30 दिन बाद भी जानकारी नहीं, वार्ड पार्षद को भी नहीं मिला जवाब
नगर पालिका अकलतरा में सूचना के अधिकार के पालन पर उठे सवाल, बोर उत्खनन के एमबी रिकॉर्ड, भुगतान और वाउचर की मांगी गई थी प्रमाणित प्रतिलिपि
अकलतरा – नगर पालिका परिषद अकलतरा में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराए जाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि जानकारी मांगने वाला कोई सामान्य आवेदक नहीं, बल्कि नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 6 के निर्वाचित पार्षद मुरलीधर मिश्रा हैं, पार्षद द्वारा नगर पालिका क्षेत्र में जून 2026 के दौरान कराए गए बोर उत्खनन कार्यों से संबंधित दस्तावेज एवं भुगतान संबंधी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी उन्हें जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। अब पार्षद ने 1 सितंबर को प्रथम अपील प्रस्तुत करते हुए जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। जानकारी नहीं मिलने पर राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष शिकायत करने की चेतावनी दी गई है।
31 जुलाई को लगाया था आरटीआई आवेदन –
पार्षद मुरलीधर मिश्रा के अनुसार उन्होंने 31 जुलाई 2026 को नगर पालिका परिषद कार्यालय अकलतरा में सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन के माध्यम से जून 2026 में नगर पालिका परिषद द्वारा नगर के विभिन्न वार्डों में कराए गए बोर उत्खनन कार्यों से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई थी।
आरटीआई आवेदन में बोर उत्खनन कार्य से संबंधित एमबी रिकॉर्ड (मेजरमेंट बुक), भुगतान संबंधी दस्तावेज तथा वाउचर की प्रमाणित प्रतिलिपियां उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इसका उद्देश्य नगर पालिका द्वारा कराए गए बोर उत्खनन कार्यों में कितने कार्य कराए गए, उन पर कितना व्यय हुआ तथा भुगतान किस आधार पर किया गया, इसकी जानकारी प्राप्त करना था।
30 दिन की समय-सीमा बीतने के बाद भी नहीं मिली जानकारी –
पार्षद का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद निर्धारित समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध कराया जाना अपेक्षित था, लेकिन आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नगर पालिका कार्यालय द्वारा न तो मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई गई और न ही उन्हें संतोषजनक जवाब दिया गया।
इस स्थिति ने नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली और सूचना के अधिकार के प्रावधानों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक निर्वाचित पार्षद द्वारा नगर पालिका के विकास कार्य से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी मांगी जाती है और निर्धारित अवधि में जानकारी उपलब्ध नहीं होती, तो आम नागरिकों द्वारा लगाए जाने वाले आरटीआई आवेदनों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
बोर उत्खनन कार्य और भुगतान से जुड़ी जानकारी क्यों महत्वपूर्ण –
नगर पालिका द्वारा जून माह में नगर के विभिन्न वार्डों में बोर उत्खनन कार्य कराए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में इन कार्यों की वास्तविक स्थिति, कार्य की मात्रा, स्वीकृत राशि, खर्च की गई राशि और संबंधित भुगतान की प्रक्रिया सार्वजनिक होने से कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकती है।
पार्षद द्वारा विशेष रूप से एमबी रिकॉर्ड, भुगतान एवं वाउचर की प्रमाणित प्रतियां मांगे जाने से इन दस्तावेजों के माध्यम से यह स्पष्ट हो सकता है कि बोर उत्खनन कार्य वास्तव में कितनी मात्रा में कराया गया, उसका मापन किस प्रकार दर्ज किया गया तथा संबंधित कार्य के लिए कितना भुगतान किया गया।
यही कारण है कि पार्षद द्वारा मांगी गई जानकारी को नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है।
1 सितंबर को प्रथम अपील, अब राज्य सूचना आयुक्त तक पहुंचाने की तैयारी –
पार्षद मुरलीधर मिश्रा ने बताया कि नगर पालिका कार्यालय से निर्धारित अवधि में जानकारी नहीं मिलने के बाद उन्होंने 1 सितंबर 2026 को प्रथम अपील का आवेदन पुनः प्रस्तुत किया है। उनका कहना है कि प्रथम अपील के माध्यम से मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इसके बाद भी नगर पालिका परिषद द्वारा सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो वे मामले को राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष ले जाएंगे और शिकायत पत्र प्रस्तुत करेंगे।
नियमों के पालन और पारदर्शिता पर उठे सवाल –
मामले ने नगर पालिका परिषद में सूचना के अधिकार अधिनियम के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आरटीआई का मूल उद्देश्य ही सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों की सूचना तक पहुंच सुनिश्चित करना है। ऐसे में निर्धारित समय-सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से देखे जाने की आवश्यकता है।
पार्षद का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराकर सूचना के अधिकार से जुड़े नियमों के साथ-साथ शासन की पारदर्शिता संबंधी मंशा की भी अनदेखी की जा रही है। हालांकि नगर पालिका प्रशासन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
‘जानकारी सार्वजनिक होने से ही सामने आएगी कार्यों की वास्तविक स्थिति –
पार्षद मुरलीधर मिश्रा का कहना है कि उनका उद्देश्य नगर पालिका द्वारा कराए गए बोर उत्खनन कार्यों से संबंधित वास्तविक स्थिति की जानकारी प्राप्त करना है, यदि कार्य नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से हुए हैं तो संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि प्रथम अपील के बाद नगर पालिका परिषद द्वारा पार्षद को मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाती है या मामला राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष पहुंचता है। फिलहाल आरटीआई आवेदन के बाद भी जानकारी नहीं मिलने का यह मामला नगर पालिका अकलतरा की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।













