जैन समाज ने 50 से अधिक शिक्षकों का सम्मान किया,
निर्यापक श्रवण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महाराज ने बताया जीवन में शिक्षक का महत्व
अकलतरा – शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थी के जीवन को सही दिशा प्रदान करने वाला मार्गदर्शक और व्यक्तित्व निर्माण का प्रमुख आधार होता है, शिक्षक के संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थी न केवल अपने भविष्य का निर्माण करता है, बल्कि समाज एवं राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसी भावना को आत्मसात करते हुए जैन समाज अकलतरा द्वारा शिक्षक दिवस के अवसर पर जैन भवन में भव्य शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन निर्यापक श्रवण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महाराज एवं मुनि श्री 108 शीतल सागर महाराज के मंगल सानिध्य में किया गया, समारोह में नगर एवं क्षेत्र के बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही, 
समारोह में निर्यापक श्रवण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महाराज ने शिक्षक दिवस के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला, उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में शिक्षक का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक उसके जीवन को ज्ञान, संस्कार और सही दिशा प्रदान करता है। शिक्षक विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे निखारने तथा जीवन में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने का कार्य करता है,
मुनिश्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करना नहीं है, बल्कि शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति में संस्कार, विनम्रता, अनुशासन, विवेक, सेवा और सदाचार जैसे गुणों का विकास होना चाहिए। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा की भारतीय संस्कृति में रही महान भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि एक अच्छे शिक्षक का प्रभाव विद्यार्थी के जीवन में लंबे समय तक बना रहता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को किसी न किसी रूप में शिक्षक का मार्गदर्शन प्राप्त होता है। शिक्षक हमें केवल पढ़ना-लिखना नहीं सिखाता, बल्कि सही और गलत के बीच अंतर समझने, कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा भी देता है। इस दृष्टि से शिक्षक समाज के सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शकों में से एक हैं।
इस अवसर पर जैन समाज द्वारा 50 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया , सम्मान समारोह में शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे योगदान, समर्पण और सेवाभाव के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षकों में उत्साह एवं प्रसन्नता का वातावरण दिखाई दिया।
कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन एवं उपाध्यक्ष श्रीजीत जैन ने कहा कि शिक्षक समाज की भावी पीढ़ी को तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण से लेकर उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने तक शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में शिक्षकों का सम्मान करना वास्तव में ज्ञान, संस्कार और शिक्षा की परंपरा का सम्मान करना है।
शिक्षक सम्मान समारोह के दौरान जैन भवन का वातावरण श्रद्धा, सम्मान एवं आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत रहा। मुनिश्री के मंगल प्रवचन ने उपस्थित लोगों को शिक्षक के वास्तविक महत्व एवं गुरु-शिष्य संबंध की गरिमा का बोध कराया। शिक्षकों के सम्मान के माध्यम से समाज में शिक्षा एवं संस्कारों के प्रति सकारात्मक संदेश भी दिया गया।
समारोह में जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। समाज के सदस्यों ने सभी सम्मानित शिक्षक-शिक्षिकाओं को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य एवं निरंतर शिक्षा सेवा के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं।
जैन समाज द्वारा आयोजित यह शिक्षक सम्मान समारोह केवल सम्मान प्रदान करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज में गुरु के प्रति श्रद्धा, शिक्षा के प्रति सम्मान और संस्कारों के महत्व का प्रभावी संदेश दिया। कार्यक्रम ने यह भावना मजबूत की कि शिक्षक राष्ट्र और समाज की भावी पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनका सम्मान करना प्रत्येक समाज का नैतिक दायित्व है, कार्यक्रम में महावीर शिक्षण समिति के अध्यक्ष अरविंद जैन, सचिव वीरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष विजय जैन, विनीत जैन, प्राचार्य विपिन पांडेय, वर्षा यादव, विनीत जैन, डॉ जयकुमार जैन, महिला मंडल अध्यक्ष संध्या जैन एवं जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।













