38 दिनों से कठिन तपस्या की जा रही मुकेश नागदेव द्वारा झूलेलाल चालीहो महोत्सव में आस्था की अनूठी मिसाल
एक समय भोजन, 40 दिनों तक चाय व सफेद खाद्य पदार्थों का त्याग, नंगे पैर कर रहे आराधना
11 वर्षों से लगातार निभा रहे चालीहो की परंपरा, अखंड ज्योत के विसर्जन के साथ 1 सितंबर को होगा 40 दिवसीय महोत्सव का समापन
अकलतरा – भगवान झूलेलाल के प्रति अटूट आस्था, श्रद्धा और समर्पण का ऐसा उदाहरण नगर में देखने को मिल रहा है, जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पूज्य सिंधी पंचायत, श्री झूलेलाल सेवा समिति एवं श्री झूलेलाल महिला सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में नगर के सिंधी धर्मशाला में विगत 23 जुलाई से आयोजित झूलेलाल चालीहो महोत्सव में सिंधी समाज के युवक मुकेश नागदेव पिछले 38 दिनों से कठिन धार्मिक नियमों और संयम का पालन करते हुए भगवान झूलेलाल की आराधना में लीन हैं।
मुकेश नागदेव चालीहो महोत्सव के दौरान दिनभर अपना होटल एवं डेली नीड्स का व्यवसाय संचालित करने के बाद रात में आयोजन स्थल पर पहुंचते हैं और वहीं रहकर अखंड ज्योत की देखरेख एवं भगवान झूलेलाल की साधना करते हैं। वे 40 दिनों तक एक समय भोजन ग्रहण करने के साथ-साथ विभिन्न खाद्य पदार्थों एवं दैनिक जीवन की कई सुविधाओं का त्याग कर धार्मिक नियमों का पालन कर रहे हैं।
एक समय भोजन, 40 दिनों तक चाय का भी त्याग –
चालीहो महोत्सव के दौरान मुकेश नागदेव दिनभर उपवास रखते हैं और रात्रि करीब 10 बजे भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना एवं आरती के पश्चात एक समय भोजन ग्रहण करते हैं। उनके अनुसार आम दिनों में वे दो समय भोजन करने के साथ नाश्ता और दिन में दो से तीन बार चाय का सेवन करते हैं, लेकिन चालीहो के दौरान उन्होंने चाय सहित कई चीजों का पूरी तरह त्याग कर रखा है।
धार्मिक नियमों के अनुसार उनके भोजन में प्याज, लहसुन, तला हुआ भोजन तथा सफेद चीजों से बने खाद्य पदार्थ जैसे दूध, दही, चावल आदि का सेवन नहीं किया जा रहा है। सात्विक भोजन और संयम के साथ वे लगातार 40 दिवसीय साधना को पूर्ण करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
मुकेश नागदेव बताते हैं कि लगातार उपवास और एक समय भोजन करने के बावजूद भगवान झूलेलाल की कृपा से उन्हें ऊर्जा का अनुभव होता है और वे प्रतिदिन अपने व्यवसाय का संचालन भी स्वयं करते हैं।
नंगे पैर चलना और कई सुविधाओं का त्याग –
चालीहो महोत्सव में धार्मिक नियमों का पालन करते हुए मुकेश नागदेव पिछले 38 दिनों से जूते-चप्पल का उपयोग नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा चमड़े के बेल्ट सहित चमड़े से बनी अन्य वस्तुओं का भी त्याग किया गया है।
चालीहो की साधना के दौरान दाढ़ी एवं बाल कटवाना, नाखून काटना और शैंपू का उपयोग करना भी वर्जित माना जाता है, जिसका पालन वे लगातार कर रहे हैं। वे बिस्तर पर सोने के बजाय फर्श पर विश्राम करते हैं तथा ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए पूरी तरह धार्मिक साधना में स्वयं को समर्पित किए हुए हैं।
सुबह 5 बजे से शुरू होती है आराधना की दिनचर्या –
मुकेश नागदेव की धार्मिक दिनचर्या भी विशेष है। वे आयोजन स्थल पर अखंड ज्योत की नियमित देखरेख करने के साथ सुबह करीब 5 बजे और रात्रि में नगर के रामसागर तालाब पहुंचकर भगवान झूलेलाल की आराधना करते हैं।
भगवान झूलेलाल को वरुण देवता के रूप में मानते हुए रामसागर तालाब में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान अखंड ज्योत जलाकर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान झूलेलाल का स्मरण किया जाता है। दिनभर उपवास रखने के बाद रात्रि में आयोजन स्थल पर पूजा-अर्चना एवं आरती संपन्न होने के पश्चात ही वे भोजन ग्रहण करते हैं।
11 वर्षों से लगातार चालीहो की साधना कर रहे मुकेश – 
पूज्य सिंधी पंचायत के अध्यक्ष के.के. चंदवानी एवं उपाध्यक्ष नरेश हरगुनानी ने बताया कि अकलतरा नगर में पिछले 11 वर्षों से झूलेलाल चालीहो महोत्सव का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन में समाज के युवक मुकेश नागदेव भी पिछले कई वर्षों से निरंतर भगवान झूलेलाल की आराधना करते आ रहे हैं।
पदाधिकारियों ने बताया कि मुकेश नागदेव चालीहो के दौरान 40 दिनों तक व्रत रखने, एक समय भोजन करने, सात्विक भोजन ग्रहण करने तथा विभिन्न धार्मिक नियमों का पालन करने के साथ पूरी श्रद्धा से भगवान झूलेलाल की साधना करते हैं। व्यवसाय की व्यस्तता के बावजूद उनकी धार्मिक दिनचर्या में कोई व्यवधान नहीं आता।
व्यवसाय के साथ साधना में भी निरंतरता –
मुकेश नागदेव की साधना की खास बात यह है कि वे दिनभर अपने होटल एवं डेली नीड्स के व्यवसाय का संचालन करते हैं। दिनभर व्यवसाय में व्यस्त रहने के बाद रात को आयोजन स्थल पर पहुंचकर अखंड ज्योत की देखरेख करते हैं और वहीं रहकर भगवान झूलेलाल की आराधना करते हैं।
लगातार 38 दिनों से इस कठिन धार्मिक अनुशासन का पालन करना उनके लिए आस्था और समर्पण का विषय है। उनका कहना है कि भगवान झूलेलाल के प्रति श्रद्धा और विश्वास के कारण उन्हें इस साधना को पूरा करने की प्रेरणा मिलती है।
“भगवान झूलेलाल की कृपा से मिलती है ऊर्जा” –
मुकेश नागदेव ने बताया कि वे पिछले 11 वर्षों से लगातार चालीहो महोत्सव के दौरान भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना एवं आराधना करते आ रहे हैं। इस दौरान एक समय भोजन करने और दिनभर उपवास रखने की परंपरा का पालन करते हैं।
उन्होंने बताया कि आम दिनों में भोजन और चाय की नियमित आदत होने के बावजूद चालीहो के 40 दिनों के दौरान वे चाय का भी सेवन नहीं करते। इसके बावजूद सुबह से लेकर रात तक अपने व्यवसाय का संचालन करते हैं। उनका कहना है कि भगवान झूलेलाल की भक्ति और आशीर्वाद से उन्हें साधना के दौरान ऊर्जा और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
अखंड ज्योत के विसर्जन के साथ 1 सितंबर को होगा समापन –
नगर के सिंधी धर्मशाला में 23 जुलाई से प्रारंभ हुआ 40 दिवसीय झूलेलाल चालीहो महोत्सव अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। आगामी 1 सितंबर को महोत्सव का विधिवत समापन किया जाएगा,
समापन अवसर पर सिंधी समाज द्वारा नगर में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा के पश्चात धार्मिक विधि-विधान के साथ अखंड ज्योत का विसर्जन किया जाएगा। अखंड ज्योत के विसर्जन के साथ ही 40 दिवसीय चालीहो महोत्सव का समापन होगा।
आस्था, अनुशासन और समर्पण का संदेश –
झूलेलाल चालीहो महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। 40 दिनों तक कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान झूलेलाल की आराधना करने वाले मुकेश नागदेव की साधना समाज के लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
अखंड ज्योत की निरंतर सेवा, उपवास, एक समय भोजन, नंगे पैर रहना और विभिन्न सांसारिक सुविधाओं का त्याग करते हुए भगवान झूलेलाल की आराधना—मुकेश नागदेव की यह साधना झूलेलाल चालीहो महोत्सव में श्रद्धा और समर्पण की अनूठी मिसाल प्रस्तुत कर रही है। आगामी 1 सितंबर को शोभायात्रा और अखंड ज्योत के विसर्जन के साथ जब 40 दिवसीय महोत्सव का समापन होगा, तब यह आयोजन नगर में धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता की एक और स्मृति छोड़ जाएगा।













