वेतन एरियर निकालने के नाम पर 10 हजार की रिश्वत लेते प्राचार्य और बाबू गिरफ्तार, एसीबी बिलासपुर की ट्रैप कार्रवाई से शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला किरारी में मचा हड़कंप, 20 हजार की मांग के बाद 10 हजार में हुआ था सौदा
अकलतरा – जिले में सरकारी काम के बदले रिश्वतखोरी के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) बिलासपुर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला किरारी की प्राचार्य अंजुला सोनी और सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी विकास मसीह को कथित रूप से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। कार्रवाई उस समय हुई, जब एक कर्मचारी से उसके वेतन वृद्धि से संबंधित एरियर की राशि निकालने के एवज में रिश्वत लिए जाने की शिकायत पर एसीबी ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की।
बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता कर्मचारी का करीब 80 हजार रुपये का वेतन एरियर बनता था। आरोप है कि उक्त एरियर की राशि निकालने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए प्राचार्य द्वारा पहले 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई। शिकायतकर्ता द्वारा इतनी रकम देने में असमर्थता जताने के बाद कथित तौर पर बातचीत के माध्यम से 10 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। इसके बाद कर्मचारी ने पूरे मामले की शिकायत एसीबी बिलासपुर से की।
शिकायत के सत्यापन में आरोप सही पाए जाने के बाद एसीबी ने जाल बिछाया और तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को रिश्वत की रकम के साथ स्कूल भेजा गया। जैसे ही रिश्वत की रकम संबंधित व्यक्ति तक पहुंची, पहले से निगरानी में तैनात एसीबी की टीम ने तत्काल दबिश देकर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान कथित रिश्वत की 10 हजार रुपये की रकम भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
80 हजार के एरियर के लिए मांगे गए थे 20 हजार
मामले के अनुसार शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला किरारी में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी मनीष राठौर ने अपनी परिवीक्षा अवधि पूर्ण करने के बाद वर्ष 2025 में नियमितीकरण प्राप्त किया था। शिकायत के मुताबिक वर्ष 2022 से जून 2026 तक वेतन वृद्धि से संबंधित उनका लगभग 80 हजार रुपये का एरियर बनता था।
इसी एरियर की राशि के भुगतान एवं उससे संबंधित प्रक्रिया को लेकर कथित तौर पर प्राचार्य अंजुला सोनी द्वारा 20 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता ने जब इतनी बड़ी राशि देने में अपनी असमर्थता जताई तो बातचीत के बाद कथित तौर पर रिश्वत की रकम घटाकर 10 हजार रुपये कर दी गई।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय पूरे मामले की जानकारी एंटी करप्शन ब्यूरो बिलासपुर को दी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी अधिकारियों ने नियमानुसार शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन में शिकायत की पुष्टि होने के बाद टीम ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए पूरी योजना तैयार की।
प्राचार्य ने रकम बाबू को देने के लिए कहा, एसीबी ने दबोच लिया –
एसीबी की योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये की रिश्वत की रकम लेकर स्कूल भेजा गया। बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता ने जब प्राचार्य अंजुला सोनी को रकम देने का प्रयास किया, तब प्राचार्य ने कथित तौर पर उक्त रकम स्कूल में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी विकास मसीह को देने के लिए कहा।
शिकायतकर्ता द्वारा जैसे ही 10 हजार रुपये विकास मसीह को दिए गए, पहले से आसपास तैनात एसीबी बिलासपुर की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया, इसके बाद प्राचार्य अंजुला सोनी को भी टीम ने अपनी कार्रवाई के दायरे में लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।
ट्रैप कार्रवाई के दौरान एसीबी की टीम ने रिश्वत की रकम बरामद करने के साथ ही मामले से संबंधित आवश्यक साक्ष्य जुटाए। कार्रवाई के बाद स्कूल परिसर में काफी देर तक हड़कंप की स्थिति बनी रही।
स्कूल में एसीबी की दबिश से मचा हड़कंप –
शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला किरारी में एसीबी की अचानक हुई कार्रवाई से न केवल स्कूल परिसर बल्कि शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मच गया, सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों के वेतन, एरियर, पदोन्नति, नियमितीकरण एवं अन्य सेवा संबंधी मामलों को लेकर होने वाले कथित लेन-देन पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिक्षा का क्षेत्र सीधे तौर पर विद्यार्थियों और समाज के भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे विभाग में पदस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर सरकारी कार्यों को निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से पूरा करने की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में किसी कर्मचारी के वैधानिक वेतन अथवा एरियर से संबंधित प्रक्रिया के लिए रिश्वत मांगने का आरोप सामने आना व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ACB की लगातार 56वीं ट्रैप कार्रवाई –
किरारी में की गई यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसे ACB बिलासपुर की लगातार 56वीं ट्रैप कार्रवाई बताया जा रहा है। लगातार हो रही ट्रैप कार्रवाइयों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि सरकारी कामकाज में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों पर एसीबी की निगरानी लगातार जारी है।
एसीबी की कार्रवाई से सरकारी विभागों में यह संदेश भी गया है कि शासकीय कार्यों के बदले अवैध राशि की मांग करना संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के लिए गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई
मामले में एसीबी द्वारा दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 एवं धारा 12 के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। धारा 7 सरकारी कार्य से संबंधित रिश्वत अथवा अनुचित लाभ की मांग या स्वीकार किए जाने से संबंधित है, जबकि धारा 12 रिश्वत संबंधी अपराध में सहायता या उकसावे से संबंधित प्रावधानों से जुड़ी है।
ट्रैप कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के विरुद्ध वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मामले में रिश्वत की मांग से लेकर रकम स्वीकार किए जाने तक की परिस्थितियों तथा अन्य संबंधित पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
वेतन और एरियर के नाम पर कथित रिश्वतखोरी ने उठाए गंभीर सवाल –
किरारी का यह मामला केवल 10 हजार रुपये की रिश्वत की कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले उनके वैधानिक अधिकारों और विभागीय प्रक्रियाओं को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि किसी कर्मचारी का वेतन अथवा एरियर नियमानुसार स्वीकृत और देय है, तो उसके भुगतान की प्रक्रिया के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग किया जाना प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामी को सामने लाता है। कर्मचारी को अपने ही वेतन की राशि प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त रकम देने की कथित मांग भ्रष्टाचार की उस प्रवृत्ति को उजागर करती है, जिसके खिलाफ शासन और जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
एसीबी की कार्रवाई से भ्रष्टाचारियों में बढ़ी चिंता
किरारी में हुई इस ट्रैप कार्रवाई को सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर ऐसे मामलों में जहां किसी कर्मचारी या आम नागरिक से उसके वैधानिक कार्य को पूरा करने के एवज में रिश्वत की मांग किए जाने का आरोप हो, वहां एसीबी की कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश देती है।
हालांकि, मामले में आरोपियों के विरुद्ध अंतिम दोषसिद्धि न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगी। फिलहाल एसीबी द्वारा की गई कार्रवाई और दर्ज प्रकरण के आधार पर दोनों आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
किरारी की शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला में 10 हजार रुपये की कथित रिश्वत के इस ट्रैप ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में कर्मचारियों के वैधानिक कार्यों को बिना किसी दबाव या लेन-देन के पूरा कराने की व्यवस्था आखिर कितनी पारदर्शी है। एसीबी की लगातार कार्रवाई से जहां भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों में चिंता बढ़ी है, वहीं आम कर्मचारियों और नागरिकों में यह उम्मीद भी मजबूत हुई है कि रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ शिकायत करने पर जांच एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।













