रक्षाबंधन विधान के द्वितीय दिवस श्रद्धा-भक्ति से गूंजा जैन मंदिर, 300 श्रीफल चढ़ाए गए
अकलतरा – नगर के जैन मंदिर में चल रहे तीन दिवसीय रक्षाबंधन विधान के द्वितीय दिवस धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साह, श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता निभाई, निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 प्रसाद सागर महाराज एवं मुनिश्री 108 शीतल सागर महाराज के मंगल सानिध्य में आयोजित विधान के दौरान मंदिर परिसर भक्ति एवं धर्ममय वातावरण से सराबोर रहा।
विधान के द्वितीय दिवस प्रातः श्रद्धालुओं ने विधि-विधानपूर्वक भगवान जिनेंद्र देव की पूजा-अर्चना करते हुए विभिन्न धार्मिक क्रियाएं संपन्न कीं, मंत्रोच्चार, पूजन एवं भक्ति के बीच 300 श्रीफल अर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग एवं आस्था के साथ विधान में सहभागिता निभाते हुए धर्मलाभ अर्जित किया। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही तथा पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया।
मुनिश्री ने बताया रक्षाबंधन विधान का धार्मिक महत्व – निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 प्रसाद सागर महाराज ने जैन धर्म में रक्षाबंधन विधान के महत्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला, उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि जैन परंपरा में रक्षाबंधन केवल सांसारिक भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह धर्म, संयम, सदाचार एवं आत्मरक्षा के आध्यात्मिक भाव से भी जुड़ा हुआ है। धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने भीतर के विकारों से रक्षा करना और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना ही इस पर्व की वास्तविक भावना है।
मुनिश्री ने अपने प्रवचन में विष्णु कुमार मुनि की प्रेरणादायी कथा का विस्तार से वर्णन किया, उन्होंने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को जैन धर्म में त्याग, तपस्या, करुणा, संयम, धर्मनिष्ठा एवं परोपकार के महत्व को समझाया। कथा प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने बताया कि धर्म और साधना के मार्ग पर दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने वाला व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आत्मबल और संयम को बनाए रख सकता है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों का उद्देश्य केवल बाहरी पूजा-पाठ करना नहीं, बल्कि उनके माध्यम से आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और जीवन में सद्गुणों का विकास करना है, जब धर्म के सिद्धांतों को जीवन में उतारा जाता है, तभी पूजा एवं विधान की सार्थकता सिद्ध होती है।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
रक्षाबंधन विधान के द्वितीय दिवस श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही जैन मंदिर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालुओं ने अनुशासन एवं भक्तिभाव के साथ धार्मिक क्रियाओं में सहभागिता निभाई। 300 श्रीफल अर्पित किए जाने के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
मुनिश्री के मंगल प्रवचन के दौरान श्रद्धालुओं ने एकाग्रचित्त होकर धर्मोपदेश का श्रवण किया। विष्णु कुमार मुनि की कथा के माध्यम से दिए गए आध्यात्मिक संदेश ने उपस्थित धर्मावलंबियों को धर्म एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
तीन दिवसीय रक्षाबंधन विधान के आगामी दिवसों को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। जैन समाज के धर्मावलंबियों ने अधिक से अधिक संख्या में विधान में सहभागिता निभाकर धार्मिक लाभ अर्जित करने का संकल्प व्यक्त किया।, आयोजन के दौरान जैन समाज के श्रद्धालुओं एवं आयोजन से जुड़े सदस्यों द्वारा आवश्यक व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सक्रिय सहभागिता निभाई जा रही है।
रक्षाबंधन विधान के दूसरे दिवस का यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति, संयम और आध्यात्मिक चेतना का सुंदर संगम बना, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म के मर्म को समझने और उसे अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा प्रदान की ।












