राजेन्द्र कुमार सिंह स्कूल में शिक्षक दिवस पर अनूठा आयोजन
छात्र बने शिक्षक, संभाली प्राचार्य से लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारियां; ‘छात्र नियंत्रित शाला’ ने दिया नेतृत्व और जिम्मेदारी का अनूठा अनुभव
अकलतरा – अकलतरा एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित राजेन्द्र कुमार सिंह उच्चतर माध्यमिक शाला, अकलतरा में भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन की जयंती एवं शिक्षक दिवस के अवसर पर एक अनूठा, रचनात्मक एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। सांस्कृतिक एवं पाठ्येतर गतिविधि विभाग के तत्वावधान में आयोजित ‘छात्र नियंत्रित शाला’ कार्यक्रम में कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों ने एक दिन के लिए विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली और शिक्षक, प्राचार्य, उप प्राचार्य सहित विभिन्न भूमिकाओं का प्रभावी निर्वहन किया।
इस अभिनव पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी की भावना, अनुशासन, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता एवं शिक्षण कौशल का विकास करना था। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने न केवल कक्षाओं में अध्यापन कराया, बल्कि विद्यालय के संचालन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को भी समझा और उनका सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
छात्रों ने संभाली प्राचार्य एवं उप प्राचार्य की जिम्मेदारी-
‘छात्र नियंत्रित शाला’ के अंतर्गत कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को विद्यालय के विभिन्न पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई। किरण निर्मलकर (12वीं ‘अ’) ने छात्र प्राचार्य तथा निखिल निर्मलकर (12वीं ‘स’) ने छात्र उप प्राचार्य की भूमिका निभाई। वहीं अंकित नोर्गे एवं आयुष तिवारी ने खेल शिक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई।
इसके अलावा कक्षा 12वीं के छात्र-छात्राओं ने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में छात्र शिक्षक के रूप में पहुंचकर अध्यापन कार्य किया। विद्यार्थियों ने विषयवार कक्षाओं का संचालन करते हुए शिक्षण की बारीकियों को समझा तथा शिक्षक की जिम्मेदारी और भूमिका का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। पूरे विद्यालय का संचालन विद्यार्थियों द्वारा किया जाना कार्यक्रम का सबसे आकर्षक एवं शिक्षाप्रद पहलू रहा।
दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ –
मंचीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अकलतरा एजुकेशन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष अशोक अग्रवाल, विशिष्ट अतिथि सचिव ईश्वर खंडेलिया, सह सचिव पंकज दोशी, कोषाध्यक्ष स्वप्निल जैन तथा शाला के प्राचार्य आर. के. विश्वकर्मा उपस्थित रहे।
अतिथियों द्वारा मां सरस्वती एवं सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतिथियों के स्वागत के पश्चात छात्र प्राचार्य किरण निर्मलकर ने स्वागत उद्बोधन दिया और छात्र प्राचार्य के रूप में विद्यालय संचालन के अपने अनुभव साझा किए।
‘शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाते, जीवन जीने की कला सिखाते हैं’ –
इस अवसर पर शाला के प्राचार्य श्री आर. के. विश्वकर्मा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाते, बल्कि वे विद्यार्थियों को जीवन जीने की कला सिखाते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अडिग रहकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को जब जिम्मेदारियां दी जाती हैं तो उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। ‘छात्र नियंत्रित शाला’ जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अध्यापन प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा –
कार्यक्रम के दौरान छात्र-शिक्षकों के बीच अध्यापन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने विषयों को रोचक एवं सरल तरीके से प्रस्तुत करते हुए अपनी शिक्षण क्षमता का प्रदर्शन किया। उत्कृष्ट अध्यापन करने वाले छात्र-शिक्षकों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किया गया।
मिडिल स्कूल वर्ग में प्रथम स्थान राजमणि (12वीं ‘द’) तथा द्वितीय स्थान अंजू साहू (12वीं ‘ब’) ने प्राप्त किया।
हाई स्कूल वर्ग में प्रथम स्थान सुखनंदन बरेठ (12वीं ‘अ’) तथा द्वितीय स्थान कु. रागिनी (12वीं ‘ब’) ने हासिल किया।
वहीं हायर सेकेंडरी स्कूल वर्ग में प्रथम स्थान पुष्पेंद्र देवांगन (12वीं ‘स’) तथा द्वितीय स्थान पंकज मरार (12वीं ‘स’) ने प्राप्त किया।
अकलतरा एजुकेशन ट्रस्ट की ओर से छात्र प्राचार्य, छात्र उप प्राचार्य, छात्र पदाधिकारियों तथा अध्यापन कार्य करने वाले सभी छात्र-शिक्षकों को भी पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
विद्यार्थियों ने किया शिक्षकों का सम्मान
शिक्षक दिवस के अवसर पर कक्षा 12वीं के सभी संकायों के छात्र-छात्राओं ने विद्यालय के समस्त शिक्षकों का सम्मान किया। विद्यार्थियों ने शिक्षकों के प्रति अपनी कृतज्ञता एवं आभार व्यक्त करते हुए उनके मार्गदर्शन और योगदान को नमन किया।
इस अवसर पर विद्यालय परिसर में भावनात्मक एवं आत्मीय वातावरण देखने को मिला। विद्यार्थियों ने शिक्षक दिवस को केवल एक औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना व्यक्त की।
शिक्षकों ने निभाई निर्णायक की भूमिका –
अध्यापन प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में एच. के. राठौर, छाया सिंह चंदेल, सी. के. सोनी, जी. पी. देवांगन, रानी विंध्याचल, जी. पी. डहरिया, सुमनचंद्र साहू, ओ. पी. शर्मा एवं योगवती भारद्वाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने छात्र-शिक्षकों के अध्यापन कौशल, विषय की प्रस्तुति, आत्मविश्वास, संवाद शैली एवं विद्यार्थियों के साथ समन्वय सहित विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन किया।
कार्यक्रम का संचालन छात्र अंकित नोर्गे ने किया। कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा एवं विभिन्न गतिविधियों का संचालन वरिष्ठ शिक्षक आर. के. पाण्डेय एवं पाठ्येतर गतिविधि प्रभारी वर्षा यादव के मार्गदर्शन में किया गया।
‘छात्र नियंत्रित शाला’ बनी विद्यार्थियों के लिए यादगार अनुभव –
‘छात्र नियंत्रित शाला’ का आयोजन विद्यार्थियों के लिए एक नया और प्रेरणादायी अनुभव साबित हुआ। एक दिन के लिए शिक्षक एवं प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी संभालने वाले विद्यार्थियों ने यह महसूस किया कि विद्यालय संचालन और अध्यापन केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अनुशासन, समय प्रबंधन, जिम्मेदारी, धैर्य, निर्णय क्षमता एवं निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है।
इस आयोजन ने विद्यार्थियों को शिक्षक की भूमिका को करीब से समझने का अवसर दिया। साथ ही छात्र-शिक्षकों ने भी अनुभव किया कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता अलग होती है और एक शिक्षक को हर विद्यार्थी तक पहुंचने के लिए धैर्य एवं प्रभावी संवाद की आवश्यकता होती है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। आयोजन ने शिक्षक दिवस को एक अलग और सार्थक स्वरूप प्रदान करते हुए विद्यार्थियों को ‘जिम्मेदारी लेकर सीखने’ का व्यावहारिक अवसर दिया। विद्यालय परिवार की यह अभिनव पहल विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सराही गई।












