अकलतरा में सजेगा आस्था का विराट दरबार, 13 सितंबर से बहेगी श्रीमद् भागवत की अमृतधारा, अनुराग कृष्ण शास्त्री के मुखारविंद से होगा सात दिवसीय संगीतमय कथा ज्ञानयज्ञ, भव्य कलश शोभायात्रा से होगा शुभारंभ
पितृमोक्षार्थ श्री गया श्राद्धान्तर्गत निमित्त आयोजित धार्मिक महोत्सव में उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब, 19 सितंबर को हवन-पूर्णाहुति के साथ होगा समापन
अकलतरा – धर्म, अध्यात्म और भक्ति की पावन नगरी के रूप में अकलतरा में एक बार फिर ऐसा अवसर आने जा रहा है, जब भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, श्रीमद्भागवत के दिव्य प्रसंगों और संगीतमय कथा की अमृतधारा से पूरा अंचल भक्तिमय हो उठेगा। नगर एवं आसपास के श्रद्धालुओं के लिए 13 सितंबर से 19 सितंबर तक भव्य एवं संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ सप्ताह महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पितृमोक्षार्थ श्री गया श्राद्धान्तर्गत निमित्त आयोजित होने वाले इस धार्मिक महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से प्रारंभ हो चुकी हैं।
सात दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक आयोजन में परम पूज्य कथा व्यास, वैदिक पथिक भागवतकिंकर अनुराग कृष्ण शास्त्री कन्हैयाजी’ अपने मुखारविंद से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का अमृतरस पान कराएंगे। उनकी ओजस्वी वाणी एवं संगीतमय शैली में भगवान श्रीहरि, श्रीराम एवं श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं तथा भक्तों के चरित्रों का वर्णन श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
धर्मध्वजा और मंगल कलश के साथ निकलेगी भव्य शोभायात्रा –
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ 13 सितंबर को सुबह 9 बजे भव्य कलश शोभायात्रा के साथ होगा। शोभायात्रा लिखमानिया धर्मशाला, अकलतरा से प्रारंभ होकर भवानी ऑटो तक निकाली जाएगी।
कलश शोभायात्रा में बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं श्रद्धालु मंगल कलश और धर्मध्वजा धारण कर शामिल होंगे। भक्ति गीतों, भजनों और भगवान के जयघोष के बीच निकलने वाली शोभायात्रा से नगर का वातावरण पूरी तरह धर्ममय होने की उम्मीद है। आयोजन समिति द्वारा शोभायात्रा को आकर्षक एवं व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए तैयारियां की जा रही हैं।
कान्हा राईस प्रोडक्ट परिसर में सजेगा कथा का भव्य दरबार –
श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 2:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक किया जाएगा, कथा का आयोजन कान्हा राईस प्रोडक्ट, नया घर परिसर, झलमला रोड, नरियरा में होगा।
कथा के दौरान श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का क्रमबद्ध एवं भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। आयोजन में श्रद्धालुओं को भगवान की लीलाओं के साथ धर्म, भक्ति, संस्कार, सदाचार, कर्तव्य और जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों का संदेश भी प्राप्त होगा।
कृष्ण जन्म से लेकर महारास और सुदामा चरित्र तक, सात दिनों में भक्ति के अनेक रंग –
13 सितंबर : श्रीमद्भागवत महात्म्य से होगी शुरुआत
पहले दिन श्रीगणेश पूजन एवं मंगलाचरण के साथ कथा का शुभारंभ होगा। इसके बाद श्रीमद्भागवत महात्म्य, भीष्म-पाण्डवादि चरित्र, परीक्षित जन्म एवं श्री शुकदेव प्राकट्य का वर्णन किया जाएगा।
14 सितंबर : सृष्टि रहस्य और कपिलोपाख्यान
दूसरे दिन ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति, भगवान विराट का प्राकट्य, विदुर-मैत्रेय संवाद एवं कपिलोपाख्यान जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों का श्रवण श्रद्धालु करेंगे।
15 सितंबर : ध्रुव और प्रहलाद की अटूट भक्ति
तीसरे दिन सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़भरत एवं प्रहलाद चरित्र के माध्यम से भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा एवं भक्ति की शक्ति का संदेश दिया जाएगा।
16 सितंबर : अवतारों की कथा और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
चौथे दिन गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन, वामन अवतार एवं श्रीराम चरित्र का वर्णन होगा। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण प्राकट्योत्सव अर्थात नंदोत्सव का भव्य एवं भावपूर्ण आयोजन होगा। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कथा के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेगा।
17 सितंबर : बाल लीलाओं से गोवर्धन पूजा और छप्पनभोग
पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं का वर्णन होगा। इसके साथ ही श्रीगोवर्धन पूजा एवं छप्पनभोग का आयोजन किया जाएगा। कृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन धारण के प्रसंग श्रद्धालुओं को भक्तिरस में डुबो देंगे।
18 सितंबर : महारासलीला और रुक्मिणी मंगल
छठे दिन महारासलीला, श्रीकृष्ण का मथुरा गमन, गोपी-उद्धव संवाद एवं रुक्मिणी मंगल (श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह) का दिव्य प्रसंग सुनाया जाएगा।
19 सितंबर : सुदामा चरित्र के साथ कथा का भावपूर्ण विश्राम
सातवें एवं अंतिम दिन सुदामा चरित्र, श्री शुकदेव विदाई, व्यास पूजन, कथा विश्राम तथा हवन एवं पूर्णाहुति के साथ सात दिवसीय ज्ञानयज्ञ का समापन होगा।
▣ कथा की खास बातें ▣
◆ आयोजन अवधि : 13 से 19 सितंबर
◆ शुभारंभ : 13 सितंबर, सुबह 9 बजे भव्य कलश शोभायात्रा
◆ कथा समय : प्रतिदिन दोपहर 2:30 से शाम 6:30 बजे तक
◆ कथा स्थल : कान्हा राईस प्रोडक्ट, नया घर परिसर, झलमला रोड, नरियरा
◆ कथा व्यास : परम पूज्य श्री अनुराग कृष्ण शास्त्री ‘श्री कन्हैयाजी’
◆ आयोजन : पितृमोक्षार्थ श्री गया श्राद्धान्तर्गत निमित्त
◆ प्रमुख आकर्षण : श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, नंदोत्सव, गोवर्धन पूजा, छप्पनभोग, महारासलीला एवं रुक्मिणी मंगल
◆ समापन : 19 सितंबर को हवन एवं पूर्णाहुति
पितरों के मोक्ष की कामना से जुड़ा है आयोजन
इस धार्मिक आयोजन का उद्देश्य केवल कथा श्रवण तक सीमित नहीं है, बल्कि पितृमोक्षार्थ आयोजित होने के कारण इसका आध्यात्मिक महत्व भी विशेष माना जा रहा है। श्रीमद्भागवत कथा भारतीय सनातन परंपरा में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य का अद्भुत संगम मानी जाती है। भगवान की कथा का श्रवण मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर धर्म, सदाचार एवं आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।
आयोजन समिति द्वारा क्षेत्र के अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को इस धार्मिक महोत्सव से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कथा के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए आयोजन स्थल पर आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
समस्त जिंदल परिवार ने किया धर्मप्रेमियों से आह्वान-
इस भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन का दायित्व समस्त जिंदल परिवार—अकलतरा (कापन वाले), खरसिया एवं राबर्टसन द्वारा उठाया गया है। जिंदल परिवार एवं आयोजन समिति ने अकलतरा सहित आसपास के सभी गांवों एवं नगरों के धर्मप्रेमी नागरिकों, मातृशक्ति एवं श्रद्धालुओं से परिवार सहित कथा स्थल पर पहुंचने का आग्रह किया है।
आयोजकों ने अपील करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, संस्कार एवं जीवन मूल्यों से जुड़ने का अवसर है। इसलिए सभी श्रद्धालु इस सात दिवसीय ज्ञानयज्ञ में सहभागी बनकर कथा श्रवण करें और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, संतों के उपदेश एवं श्रीमद्भागवत के दिव्य संदेश का पुण्य लाभ प्राप्त करें।
13 सितंबर से 19 सितंबर तक अकलतरा अंचल में भक्ति, संगीत और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। श्रीकृष्ण के जयघोष और कथा व्यास श्री कन्हैयाजी महाराज की अमृतवाणी से पूरा क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर होने को तैयार है।












