मध्यप्रदेश पुलिस में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: 78 निरीक्षकों की पदोन्नति निरस्त, विभागीय जांच और लंबित मामलों का असर
पुलिस मुख्यालय ने जारी किया आदेश; पदोन्नति का लाभ वापस, हालांकि वर्तमान कार्यवाहक पद पर बने रहेंगे अधिकारी
भोपाल – मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय ने निरीक्षक स्तर के अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है।, पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के तहत प्रदेश के 78 निरीक्षकों की पदोन्नति निरस्त कर दी गई है। इन अधिकारियों को पूर्व में उप निरीक्षक/कार्यवाहक निरीक्षक से निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दी गई थी, लेकिन बाद में सामने आई विभागीय जांच, प्रभावी दंड तथा न्यायालय में लंबित आपराधिक प्रकरणों सहित अन्य परिस्थितियों के कारण उनकी पदोन्नति का लाभ वापस लेने का निर्णय लिया गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार यह कार्रवाई 31 अगस्त 2026 को जारी आदेशों के तहत की गई है।
पुलिस मुख्यालय के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 13 जुलाई 2026 के आदेश के माध्यम से जिन कार्यवाहक निरीक्षकों/उप निरीक्षकों को निरीक्षक पद पर पदोन्नति दी गई थी, उनमें से संबंधित अधिकारियों की पदोन्नति अब निरस्त की जाती है हालांकि इस कार्रवाई के बावजूद अधिकारियों को उनके वर्तमान कार्यवाहक पद एवं जिम्मेदारियों पर फिलहाल यथावत रखा गया है।
जांच और दंड के चलते लिया गया फैसला –
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध दंड प्रभावी होना, विभागीय जांच लंबित होना अथवा आपराधिक प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होना पदोन्नति निरस्त करने के प्रमुख आधार हैं। ऐसे मामलों में पदोन्नति दिए जाने के बाद विभागीय स्तर पर समीक्षा की गई और पात्रता संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पूर्व में दी गई पदोन्नति का लाभ वापस लेने का निर्णय लिया गया।
यह कार्रवाई पुलिस विभाग में अनुशासन और पदोन्नति प्रक्रिया में पात्रता की समीक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ताजा रिपोर्टों में भी बताया गया है कि पदोन्नति निरस्त किए जाने के पीछे विभागीय जांच, प्रभावी दंड और लंबित न्यायालयीन मामलों जैसी परिस्थितियां प्रमुख कारण हैं ।
पदोन्नति निरस्त, लेकिन जिम्मेदारी में तत्काल बदलाव नहीं –
इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पदोन्नति निरस्त होने का अर्थ तत्काल पद से हटाया जाना नहीं है। आदेश में संबंधित अधिकारियों को उनके वर्तमान कार्यवाहक पद पर यथावत रखे जाने की बात कही गई है। अर्थात पदोन्नति का लाभ वापस लिया गया है, लेकिन वर्तमान पदस्थापना एवं जिम्मेदारियों को तत्काल प्रभावित नहीं किया गया है
इससे स्पष्ट है कि पुलिस मुख्यालय ने फिलहाल प्रशासनिक स्थिति को यथावत रखते हुए पदोन्नति से संबंधित निर्णय में संशोधन किया है। संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध चल रही जांच अथवा न्यायालयीन प्रक्रिया के परिणाम के आधार पर भविष्य में उनके पदोन्नति संबंधी मामले पर आगे निर्णय लिया जा सकता है।
प्रदेश के कई जिलों के अधिकारी प्रभावित
पदोन्नति निरस्त किए जाने वाले 78 निरीक्षकों की सूची में प्रदेश के अलग-अलग जिलों और पुलिस इकाइयों में पदस्थ अधिकारी शामिल हैं। आदेश में दी गई सूची के अनुसार भोपाल, मुरैना, मंडला, सतना, टीकमगढ़, बैतूल, छतरपुर, खंडवा, भिंड, इंदौर, रीवा, नारकोटिक्स विंग इंदौर, खरगोन, धार, बुरहानपुर, नीमच, उमरिया, शहडोल, ग्वालियर, मंदसौर, बालाघाट, भोपाल यू., नर्मदापुरम, अलीराजपुर सहित कई क्षेत्रों में पदस्थ अधिकारियों का नाम शामिल है।
आदेश की सूची में उदाहरण के तौर पर सुरेश कुमार मीणा, कुलदीप सिंह राजपूत, भानु प्रताप सिंह भावेदी, योगेंद्र सिंह परिहार, रवि कुमार गुप्ता, नरेंद्र सिंह परिहार, त्रिवेंद्र त्रिवेदी, विकास खिंची, मुकेश कुमार शाक्य, अमित कुमार भावसार, विकास कपिस, अनिल अजमेरिया, गणपत कनेल, रोहित कच्छावा, टीकम चंद शिंदे, विजय सागरिया, श्वेता मौर्य, विजय कुमार पटले, राम कुमार गायकवाल, रामबाबू सिंह यादव, सनात कुमार द्विवेदी, सत्येंद्र प्रसाद चतुर्वेदी, सोनपाल सिंह तोमर, सौरभ शर्मा, विनय सिंह तोमर, वरुण कुमार तिवारी, रविंद्र शर्मा, संदीप चौहरसिया, राकेश कुमार बघेल, विजय राजपूत, राजेंद्र कुमार बांडेवार, प्रशांत शर्मा, तेजेंद्र सिंह सेंगर, मन सिंह चौधरी, प्रवीण कुमार चौहान, विजय कुमार देवड़ा और विक्रम सिंह हिवने सहित अन्य अधिकारियों के नाम दर्ज हैं।
161 पुलिसकर्मियों पर पड़ा पदोन्नति निरस्तीकरण का असर –
यह कार्रवाई केवल निरीक्षक स्तर तक सीमित नहीं है, पुलिस मुख्यालय ने अलग-अलग आदेशों के माध्यम से कुल 161 पुलिसकर्मियों की पदोन्नति निरस्त की है, जिनमें 78 निरीक्षक और 83 उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी/कर्मचारी शामिल हैं।
बताया गया है कि उप निरीक्षक स्तर की पदोन्नतियों से संबंधित अलग आदेश में भी विभागीय जांच, दंड, न्यायालयीन प्रकरण, पदोन्नति स्वीकार नहीं करने तथा कुछ मामलों में संबंधित अधिकारियों को नए पद पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए कार्यमुक्त नहीं किए जाने जैसी परिस्थितियों को आधार बनाया गया है ।
पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना फैसला –
पुलिस मुख्यालय के इस निर्णय के बाद प्रदेश के पुलिस महकमे में पदोन्नति प्रक्रिया और अधिकारियों की सेवा संबंधी पात्रता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बड़ी संख्या में अधिकारियों की पदोन्नति वापस लिए जाने से यह स्पष्ट संकेत गया है कि पदोन्नति के बाद भी यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच, प्रभावी दंड अथवा न्यायालयीन मामला सामने आता है तो उसकी पदोन्नति की समीक्षा की जा सकती है।
यह फैसला पुलिस प्रशासन में अनुशासन, जवाबदेही और पदोन्नति की पात्रता को लेकर मुख्यालय के सख्त रुख के तौर पर भी देखा जा रहा है।
फिलहाल पद और जिम्मेदारी यथावत –
पदोन्नति निरस्त किए जाने के बाद संबंधित 78 निरीक्षकों को फिलहाल उनके वर्तमान कार्यवाहक पद पर ही जिम्मेदारी संभालनी होगी। यानी इस आदेश से तत्काल पुलिस थानों या इकाइयों में उनकी मौजूदा जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। आगे विभागीय जांच अथवा न्यायालयीन प्रकरणों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इन अधिकारियों के पदोन्नति संबंधी भविष्य पर निर्णय होने की संभावना है
पुलिस मुख्यालय का यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ओर प्रदेशभर में पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जांच एवं अनुशासन संबंधी मामलों में घिरे अधिकारियों की पदोन्नति की समीक्षा कर उसे निरस्त किया गया है। इससे पुलिस विभाग में पदोन्नति पाने वाले अधिकारियों की पात्रता और सेवा अभिलेखों की गंभीरता से जांच किए जाने का संदेश गया है।
