एसडीएम के आदेश के 13 माह बाद भी नहीं हुआ पचपेडिया तालाब का पुनर्निर्माण
90 दिनों में तालाब बनाने और 7.77 लाख रुपये जमा करने का था आदेश, सरपंच-सचिव ने नहीं मानी कार्रवाई; ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अकलतरा – ग्राम पंचायत कल्याणपुर में निस्तारी के लिए उपयोग किए जाने वाले पचपेडिया तालाब को कथित रूप से नियमों को ताक पर रखकर राखड़ से पाटे जाने का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद अधर में लटक गया है, मामले में विधानसभा में मुद्दा उठने और जिला प्रशासन के निर्देश के बाद तत्कालीन एसडीएम द्वारा 10 जुलाई 2025 को ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव को तालाब का पुनर्निर्माण 90 दिनों के भीतर कराने तथा तालाब निर्माण में खर्च होने वाली 7 लाख 77 हजार 900 रुपये की राशि जनपद पंचायत अकलतरा के खाते में 29 जुलाई 2025 तक जमा कराने का आदेश दिया गया था, लेकिन आदेश जारी हुए लगभग 13 माह बीत जाने के बाद भी न तो तालाब का पुनर्निर्माण शुरू हुआ और न ही निर्धारित राशि जमा कराई गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर आदेश जारी करने और पत्राचार करने तक ही कार्रवाई सीमित रह गई है। आदेश की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी संबंधित सरपंच एवं सचिव के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से पूरे मामले की निष्पक्षता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बिना ग्राम पंचायत प्रस्ताव के तालाब में पाट दी गई राखड़ –
ग्राम पंचायत कल्याणपुर के मुख्य मार्ग पर रेलवे अंडरब्रिज के पास स्थित पचपेडिया तालाब गांव के लोगों के लिए निस्तारी का महत्वपूर्ण जलस्रोत रहा है। आरोप है कि ग्राम पंचायत की सरपंच लता लहरें एवं सचिव जलवती वैष्णव द्वारा ग्राम पंचायत की बैठक एवं प्रस्ताव के बिना ही तालाब में राखड़ पाटने के लिए जगह उपलब्ध कराई गई।
इसके बाद केएसके महानदी पावर कंपनी लिमिटेड, नरियरा द्वारा तालाब में बड़ी मात्रा में राखड़ डाले जाने के साथ जेसीबी मशीनों से तालाब को समतलीकरण करने का कार्य किया गया। ग्रामीणों के अनुसार तालाब में 500 से अधिक गाड़ियों में राखड़ पाटे जाने से निस्तारी के इस जलस्रोत का स्वरूप प्रभावित हुआ और तालाब के अस्तित्व पर ही संकट खड़ा हो गया।
मनरेगा से लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया था तालाब –
ग्रामीणों का कहना है कि पचपेडिया तालाब को शासन द्वारा पहले से ही संरक्षित एवं विकसित किया गया था। मनरेगा योजना के अंतर्गत वर्ष 2013-14 में तालाब के गहरीकरण एवं पचरी निर्माण के लिए लगभग 10 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे, जिसमें से 7 लाख 77 हजार 900 रुपये खर्च किए गए थे।
एक ओर शासन द्वारा ग्रामीणों की निस्तारी सुविधा और जल संरक्षण के उद्देश्य से तालाब के विकास पर लाखों रुपये खर्च किए गए, वहीं दूसरी ओर उसी तालाब को राखड़ से पाटे जाने और समतलीकरण किए जाने से सरकारी राशि से निर्मित परिसंपत्ति के संरक्षण पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
विधायक ने विधानसभा में उठाया था मामला –
पचपेडिया तालाब को राखड़ से पाटे जाने का मामला अकलतरा विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह द्वारा विधानसभा के बजट सत्र 2025 में उठाया गया था। विधानसभा में मामला उठने के बाद राज्य शासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इसके पश्चात कलेक्टर द्वारा एसडीएम को मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद एसडीएम द्वारा 10 जुलाई 2025 को आदेश जारी कर ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव को निर्धारित अवधि में तालाब का पुनर्निर्माण कराने तथा तालाब निर्माण में खर्च होने वाली 7,77,900 रुपये की राशि जनपद पंचायत अकलतरा के खाते में जमा कराने के निर्देश दिए गए थे।
लेकिन आदेश की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आदेश के बाद भी न पुनर्निर्माण, न राशि जमा
एसडीएम के आदेश के अनुसार तालाब का पुनर्निर्माण 90 दिनों में पूरा किया जाना था। वहीं निर्धारित राशि 29 जुलाई 2025 तक जमा करनी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों ही निर्देशों का पालन नहीं हुआ।
सबसे गंभीर बात यह है कि आदेश की समय-सीमा बीतने के बाद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा सरपंच एवं सचिव के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी अथवा पंचायत प्रतिनिधि को सरकारी आदेश का पालन नहीं करने पर भी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़े, तो इससे प्रशासनिक आदेशों की गंभीरता पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
पत्र जारी करने तक सीमित रही कार्रवाई का आरोप –
ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब के पुनर्निर्माण और राशि जमा कराने के लिए अधिकारियों द्वारा पत्र जारी किए गए, लेकिन पत्र जारी होने के बाद भी जब न तो काम शुरू हुआ और न ही राशि जमा कराई गई, तब भी मामले में आगे की कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों के अनुसार संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों को पुनः नोटिस जारी करने, जवाब मांगने अथवा नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय मामले को धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
शिकायत और जांच के बाद भी कार्रवाई पर सवाल –
ग्रामीणों ने पचपेडिया तालाब में राखड़ पाटे जाने की शिकायत जिला प्रशासन एवं पर्यावरण विभाग से भी की थी। उनका कहना है कि शिकायत के बाद जांच की प्रक्रिया हुई और मामले में पंचायत पदाधिकारियों की भूमिका भी सामने आई, इसके बावजूद सरपंच को पद से हटाने तथा सचिव के निलंबन जैसी कार्रवाई अब तक नहीं की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब मामले में शिकायत, जांच, विधानसभा में सवाल और एसडीएम का स्पष्ट आदेश—सभी कुछ सामने आ चुका है, तब भी कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर भी गंभीर सवाल –
ग्रामीणों ने कहा कि तालाब केवल पंचायत की जमीन का हिस्सा नहीं, बल्कि गांव की निस्तारी व्यवस्था और जल संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण सार्वजनिक संसाधन है। ऐसे जलस्रोतों को किसी भी प्रकार से नष्ट या प्रभावित करने से पहले नियमों का पालन आवश्यक है।
पचपेडिया तालाब में राखड़ पाटे जाने से न केवल ग्रामीणों की निस्तारी व्यवस्था प्रभावित हुई, बल्कि शासन द्वारा पूर्व में तालाब के विकास पर खर्च की गई लाखों रुपये की राशि से निर्मित परिसंपत्ति की उपयोगिता पर भी सवाल खड़ा हो गया है।
मुख्यमंत्री से लेकर कलेक्टर तक शिकायत, हाई कोर्ट जाने की चेतावनी –
मामले में ग्रामीणों द्वारा मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, बिलासपुर संभाग आयुक्त एवं कलेक्टर को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच एवं दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन द्वारा जल्द ही तालाब का पुनर्निर्माण शुरू कराने, निर्धारित राशि जमा कराने तथा जिम्मेदार पंचायत पदाधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई नहीं की जाती है तो वे न्यायालय की शरण लेने पर मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने मामले में हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की बात भी कही है।
“भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप” — विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह
अकलतरा विधायक राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि ग्राम कल्याणपुर के पचपेडिया तालाब को राखड़ से पाटे जाने के मामले में उन्होंने मुख्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, बिलासपुर संभाग आयुक्त एवं कलेक्टर को पत्र लिखने के साथ विधानसभा के बजट सत्र 2025 में राज्य शासन का ध्यान आकर्षित किया था। विधानसभा में शासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद आज तक राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। विधायक ने कहा कि “यदि जांच एवं प्रशासनिक आदेश के बाद भी दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होती है तो इससे भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण मिलने की आशंका मजबूत होती है। सरपंच को पद से हटाने तथा सचिव के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए और तालाब का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाना चाहिए।”
13 माह बाद भी सवाल जस का तस –
पचपेडिया तालाब प्रकरण में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एसडीएम द्वारा स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित कर आदेश जारी किया गया था, तो 13 माह बाद भी आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ? सरकारी राशि जमा नहीं होने और तालाब का पुनर्निर्माण शुरू नहीं होने के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक तालाब का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी आदेशों के पालन, सार्वजनिक जलस्रोतों के संरक्षण, पंचायत स्तर पर नियमों की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में केवल पत्राचार तक सीमित रहता है या जिम्मेदारों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करते हुए पचपेडिया तालाब का वास्तविक पुनर्निर्माण सुनिश्चित करता है।












