कोसा हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा: प्रेम प्रसंग में युवक की हत्या, 24 घंटे तक घर के पीछे छिपा रहा शव
SIT की जांच में सामने आई चौंकाने वाली कहानी, एक महिला समेत तीन आरोपी गिरफ्तार; हत्या में प्रयुक्त फावड़ा और शव ठिकाने लगाने में इस्तेमाल सीढ़ी बरामद
जांजगीर-चांपा -थाना मुलमुला क्षेत्र के ग्राम कोसा में 27 जून की रात हुई युवक की सनसनीखेज हत्या की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है, करीब दो माह से पुलिस के लिए चुनौती बने इस हत्याकांड में प्रेम प्रसंग को हत्या की मुख्य वजह बताया गया है। पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक अमित भंडारी का गांव की ही संतोषी सिंह से शादी से पहले से प्रेम संबंध था और शादी के बाद भी दोनों के बीच बातचीत जारी थी। इसी प्रेम संबंध को लेकर हुए विवाद के बाद संतोषी के भाई बजरंग सिंह ने कथित तौर पर अमित की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को करीब 24 घंटे से अधिक समय तक घर के पीछे छिपाकर रखा गया और फिर रात के अंधेरे में गांव के बीच निर्जन बाड़ी में ले जाकर रख दिया गया।
पुलिस ने मामले में बजरंग सिंह निवासी कोसा, संतोषी सिंह निवासी हाथनेवरा चांपा (मायका कोसा) तथा पप्पू सिंह निवासी कोसा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार घटना में प्रयुक्त छोटा फावड़ा/रापा तथा शव को दूसरी जगह ले जाने में इस्तेमाल की गई छोटी सीढ़ी भी आरोपियों की निशानदेही पर बरामद की गई है।
27 जून की रात घर से निकला था अमित, दो दिन बाद मिला शव
पुलिस के अनुसार 27 जून 2026 की रात अमित भंडारी अपने घर से निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। 29 जून की सुबह गांव के ही अमहदा तालाब के पास एक निर्जन बाड़ी में उसका शव बरामद हुआ। गांव के बीचों-बीच युवक की हत्या और शव मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शुरुआत से ही कई संभावित पहलुओं को जांच में शामिल किया। मृतक के प्रेम संबंध, गांव में रात के समय होने वाली जुआ-सट्टा एवं शराब जैसी गतिविधियों से जुड़े असामाजिक तत्वों की भूमिका तथा पूर्व ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान हुए विवादों सहित कई बिंदुओं पर जांच की गई –
CDR से लेकर टावर डंप और GPS तक खंगाला
मामले की जांच में पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। संदिग्धों के सीडीआर, आईपीडीआर, टावर डंप, जीपीएस लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज तथा घटना के समय संदिग्ध व्यक्तियों की लोकेशन का बारीकी से विश्लेषण किया गया। इसके साथ ही घटना के संभावित कारण, हत्या के बाद आरोपियों की गतिविधियों और उनके व्यवहार को जोड़कर पूरी कड़ी तैयार की गई।
जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित SIT ने जांच को आगे बढ़ाते हुए तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को भी जोड़ा। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने पुलिस को हत्याकांड के पीछे छिपी कहानी तक पहुंचने में महत्वपूर्ण मदद की।
शादी से पहले का प्रेम संबंध बना विवाद की वजह –
पुलिस की जांच के अनुसार अमित भंडारी और संतोषी सिंह के बीच शादी से पहले से प्रेम संबंध था। शादी के बाद भी दोनों के बीच बातचीत जारी रही। अमित बाहर रहकर काम करता था और जब भी गांव लौटता था, दोनों के बीच मुलाकात और बातचीत होती थी। पुलिस के अनुसार संतोषी भी अपने पति से विवाद के बाद कई बार मायके गांव आती थी।
घटना वाली रात भी दोनों के बीच करीब रात 1:30 बजे तक फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद लगभग 2:30 बजे अमित संतोषी से मिलने उसके घर के पीछे पहुंचा।
इसी दौरान संतोषी का भाई बजरंग सिंह टेंट का काम समाप्त कर घर लौटा। घर के पीछे से आवाज आने पर वह वहां पहुंचा तो उसने अपनी बहन के साथ अमित को देखा। पुलिस के मुताबिक इसके बाद विवाद बढ़ गया और बजरंग सिंह ने अमित के साथ मारपीट शुरू कर दी।
दीवार फांदकर भागने की कोशिश, फावड़े से हमला
पुलिस के अनुसार मारपीट के दौरान अंधेरे में अमित का सिर पीछे की दीवार से टकराया, जिससे वहां खून के निशान भी बने। जान बचाने के लिए अमित ने पीछे की दीवार फांदकर भागने का प्रयास किया। इसी दौरान पास में पड़े छोटे फावड़े/रापा से बजरंग सिंह ने अमित के सिर और छाती पर वार कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद आरोपी बजरंग घबरा गया और उसने शव को घर के पीछे स्थित बाड़ी में झुरमुट के नीचे छिपा दिया। बताया गया कि उसी रात गांव में चोरी की सूचना के कारण डायल-112 की टीम भी गांव में मौजूद थी और कई लोग जाग रहे थे। ऐसे में उसी रात शव को कहीं और ले जाने पर पकड़े जाने का खतरा आरोपियों को था।
पुलिस के अनुसार संतोषी सिंह ने पूरी घटना देखी तथा शव छिपाने में अपने भाई बजरंग की मदद की।
अगले दिन भाई को बताया राज, फिर रची गुमराह करने की साजिश –
28 जून को बजरंग का बड़ा भाई पप्पू सिंह काम से गांव वापस लौटा। पुलिस के मुताबिक बजरंग ने उसे पूरी घटना की जानकारी दी और सहयोग मांगा। इसके बाद दोनों भाइयों ने पुलिस और मृतक के परिजनों को गुमराह करने की योजना बनाई।
दोनों मृतक के परिजनों के साथ अमित को तलाशने का नाटक करते रहे और गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाना मुलमुला भी पहुंचे। पुलिस के मुताबिक इस दौरान उनका उद्देश्य जांच को दूसरी दिशा में ले जाना था।
बाद में 28 जून की मध्यरात्रि करीब 12 बजे मौका देखकर दोनों आरोपियों ने अमित के शव को घर के पीछे से निकालकर गांव के बीचो-बीच एक ऐसी जगह पर रख दिया, जहां उन्हें उम्मीद थी कि पुलिस का संदेह उन पर नहीं जाएगा। अगले दिन 29 जून को शव बरामद होने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
ट्रैकर डॉग विमला की भूमिका भी रही अहम –
हत्याकांड की जांच में बिलासपुर से बुलाए गए सीनियर ट्रैकर डॉग ‘विमला’ की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। घटनास्थल और शव से जुड़े सुरागों के आधार पर डॉग स्क्वॉड से मिले लीड को पुलिस ने अन्य तकनीकी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर आगे की जांच की।
पुलिस को संदिग्धों की लोकेशन, घटना के बाद उनका व्यवहार और पूछताछ के दौरान उनके बयानों में लगातार बदलाव जैसी बातें भी संदेहास्पद लगीं।
आधुनिक तकनीकों ने जांच को दी नई दिशा
पुलिस के अनुसार मामले को सुलझाने में ब्रेन मैपिंग, पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट जैसी आधुनिक जांच तकनीकों का भी उपयोग किया गया। इन तकनीकी प्रक्रियाओं से प्राप्त संकेतों तथा पुलिस द्वारा जुटाए गए अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों से दोबारा पूछताछ की गई।
लगातार पूछताछ के बाद पुलिस के अनुसार आरोपियों ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की। इसके बाद उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त छोटा फावड़ा/रापा और शव को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में इस्तेमाल की गई छोटी सीढ़ी बरामद की गई।
तीनों आरोपी गिरफ्तार, दो न्यायिक रिमांड पर –
पुलिस ने मामले में बजरंग सिंह, संतोषी सिंह और पप्पू सिंह को विधिवत गिरफ्तार किया है। इनमें संतोषी सिंह और पप्पू सिंह को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। वहीं बजरंग सिंह को पुलिस रिमांड पर लेकर आगे की फॉरेंसिक एवं आधुनिक तकनीकी जांच की जा रही है।
दो महीने से उलझी गुत्थी सुलझाने में तकनीक और मानवीय जांच का मिला सहारा –
कोसा हत्याकांड की जांच में पुलिस ने केवल एक पहलू पर निर्भर रहने के बजाय तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल, लोकेशन, सीसीटीवी, टावर डंप, संदिग्धों के व्यवहार, पूछताछ, ट्रैकर डॉग और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को आपस में जोड़कर जांच को आगे बढ़ाया। यही वजह रही कि करीब दो माह से रहस्य बनी हत्या की इस वारदात की परतें धीरे-धीरे खुलती चली गईं।
प्रेम संबंध से शुरू हुआ विवाद, आवेश में हत्या और फिर पुलिस को गुमराह करने के लिए शव को ठिकाने लगाने की कोशिश—कोसा हत्याकांड की पूरी कहानी ने गांव ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अब पुलिस की आगे की फॉरेंसिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया से इस मामले में सामने आए तथ्यों की पुष्टि और साक्ष्यों की अंतिम कड़ियां स्पष्ट होंगी।












