महावीर बाल संस्कार केंद्र में शान से लहराया तिरंगा
स्वतंत्रता दिवस पर विद्यार्थियों ने लिया भारत बोलने एवं स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का संकल्प 
अकलतरा – स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर महावीर बाल संस्कार केंद्र में राष्ट्रभक्ति एवं उत्साह का वातावरण देखने को मिला, स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम निर्यापक श्रवण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महाराज एवं मुनि श्री 108 शीतल सागर महाराज के मंगल उपस्थिति में आयोजित हुआ , विद्यालय परिसर में ध्वजारोहण महावीर शिक्षण समिति के कोषाध्यक्ष विजय जैन एवं सचिव वीरेंद्र जैन द्वारा किया गया, कार्यक्रम में संतों के सानिध्य में विद्यार्थियों एवं उपस्थितजनों ने देश की स्वतंत्रता, संस्कृति और स्वाभिमान के महत्व को समझते हुए राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया, 
कार्यक्रम में निर्यापक श्रवण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महराज ने कहा कि भारत में प्रथम राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को कोलकाता में फहराया गया था, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा हमारी एकता एवं शान का प्रतीक है, स्वतंत्रता केवल अधिकारों का नाम नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने और उनका ईमानदारी से निर्वहन करने का भी संदेश देती है, मुनि श्री ने विद्यार्थियों से देश की गौरवशाली संस्कृति, परंपराओं और विरासत को समझने तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। 
‘इंडिया नहीं, भारत’ बोलने का लिया संकल्प –
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा लिया गया संकल्प रहा, निर्यापक श्रवण मुनि श्री 108 प्रसाद सागर महराज एवं मुनि श्री 108 शीतल सागर महराज के मार्गदर्शन में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ शब्द के प्रयोग को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया, इसके साथ ही विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र के प्रति गौरव की भावना को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया 
स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर जोर –
मुनिश्री 108 प्रसाद सागर महराज ने विद्यार्थियों से दैनिक जीवन में अधिक से अधिक स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील की, उन्होंने कहा कि स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग केवल खरीदारी का विषय नहीं, बल्कि देश के स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, विद्यार्थियों से आग्रह किया गया कि वे स्वयं स्वदेशी वस्तुओं के प्रति जागरूक हों और अपने परिवार तथा समाज में भी इसके लिए जनजागृति लाएं।
हम इंडिपेंडेंस तो हो गए लेकिन आधुनिक यंत्रों पर डिपेंड हो गए – मुनि श्री 108 शीतलसागर महराज – स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 शीतलसागर महराज ने कहा कि भारत की गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पूरे विश्व में जाना जाता था, गुरु एवं शिष्य की परंपरा भारत में अनादि काल से चले आ रही थी लेकिन भारत में ब्रिटिश शासन के आगमन के बाद सन 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था को लागू किया इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था लागू करना था जिससे भारत के लोग रंग और रक्त से तो भारतीय हो लेकिन सोच और आचार विचार से अंग्रेज हो, लॉर्ड मैकाले द्वारा अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था लागू करने से भारत में गुरुकुल और स्थानीय पाठशालाओं के माध्यम से प्राचीन शिक्षा व्यवस्था समाप्त होने के साथ देश में संस्कृत एवं अन्य प्राकृत भाषा लुप्त होने के साथ अंग्रेजी भाषा शिक्षा व्यवस्था में घुस गई, भारत देश में कई महान वैज्ञानिकों द्वारा जन्म लेने के बाद विश्व में एक से बढ़कर एक अविष्कार किए गए लेकिन हमें शिक्षा में विदेशी वैज्ञानिकों के द्वारा खोज किए गए अविष्कारों की जानकारी प्रदान करने के साथ भारत के प्राचीन इतिहास को मिटाने का प्रयास किया गया, बच्चों को विद्यालय में प्रवेश लेने के बाद पहले 1 से लेकर 20 तक का पहाड़ा सीखने के साथ-साथ बाजार में अर्थव्यवस्था सीखने के लिए सवा, डेढ़, ढाई एवं अन्य पहाड़ भी सिखाया जाता था लेकिन वर्तमान में अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था में हमें पहाड़े की जगह टेबल सिखाया जा रहा है, देश को आजाद हुए 80 वर्ष हो गए लेकिन हम इंडिपेंडेंस नहीं होकर वर्तमान में कैलकुलेटर, मोबाइल लैपटॉप एवं अन्य आधुनिक यंत्रों के डिपेंड होते जा रहे हैं यह आधुनिक पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है, छात्र जीवन का विशेष महत्व होता है छात्र-छात्राएं जीवन में एक लक्ष्य बनाकर लक्ष्य की ओर अग्रसित होने के होने के साथ देश एवं राष्ट्र की सेवा करने का संकल्प ले । 
स्वागत गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां –
स्वतंत्रता दिवस समारोह में विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया, विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर उपस्थितजनों का मन मोह लिया, विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति और देश के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी ।
पूरे विद्यालय परिसर में देशभक्ति के नारों और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना से वातावरण उत्साहपूर्ण बना रहा, विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को स्मरण करते हुए देश की एकता, अखंडता एवं गौरव को बनाए रखने का संकल्प लिया, 
महावीर बाल संस्कार केंद्र में आयोजित यह स्वतंत्रता दिवस समारोह केवल ध्वजारोहण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, स्वदेशी भावना और राष्ट्रीय स्वाभिमान के संस्कार जागृत करने वाला प्रेरणादायी आयोजन बन गया, समारोह ने उपस्थित सभी लोगों को यह संदेश दिया कि देश का भविष्य मजबूत बनाने के लिए नई पीढ़ी को शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराना भी उतना ही आवश्यक है, कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य विपिन पांडेय ने किया एवं आभार प्रदर्शन जैन समाज के उपाध्यक्ष श्रीजीत जैन ने किया, कार्यक्रम में शैलेंद्र जैन, जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन , विजय किशोर जैन,कमल जैन, सौरभ जैन, गीतेश जैन, तनिष जैन, सरोज जैन, ममता जैन, वंदना जैन, महिला मंडल अध्यक्ष संध्या जैन ,उपाध्यक्ष सारिका जैन, सहसचिव रानू जैन, कोषाध्यक्ष रश्मि जैन, तनिषा जैन, महावीर शिक्षण समिति के समस्त स्टाफ एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।












